
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को रद्द कर दिया। इससे ट्रंप प्रशासन के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है। यह निर्णय आपातकालीन शक्तियों से संबंधित कानून के तहत लगाए गए शुल्कों पर केंद्रित है, जिसमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक ‘‘पारस्परिक’’ शुल्क भी शामिल हैं।
यह ट्रंप के व्यापक एजेंडे का पहला प्रमुख हिस्सा है, जो सीधे तौर पर देश की शीर्ष अदालत के सामने आया है, जिसे उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में तीन रूढ़िवादी न्यायाधीशों की नियुक्तियों के माध्यम से आकार देने में मदद की थी।
राष्ट्रपति इस मामले में मुखर रहे हैं और इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ फैसला आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
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भारत को ‘‘बेहद शक्तिशाली’’ बताते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश अपने सहयोगियों के साथ ‘‘गठबंधन मजबूत कर रहा है।’’ उन्होंने अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रस्तावित यरुशलम यात्रा का उल्लेख करते हुए यह बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी के 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर इजराइल पहुंचने की उम्मीद है, जिस दौरान वह संभवतः नेसेट (संसद) को संबोधित करेंगे तथा नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे।
नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार को यरुशलम से लगभग 190 किलोमीटर दक्षिण में स्थित बहाद 1 (आईडीएफ अधिकारी स्कूल) में इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के कैडेट के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल बुराई के खिलाफ ‘‘निवारक उपाय’’ करता है और इसलिए, क्षेत्र में खतरों को बेअसर करने के लिए, आवश्यकतानुसार, समय-समय पर कार्रवाई करेगा।
उन्होंने कहा, “हम अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाएंगे। अगले सप्ताह एक बेहद शक्तिशाली देश के प्रधानमंत्री, इजराइल का दौरा करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और निश्चित रूप से, आप जानते हैं कि कुछ दिन पहले मैं एक और महत्वपूर्ण दौरे से लौटा हूं, जो राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद से सातवां दौरा था, जहां मैंने इजराइल के सबसे पक्के मित्र - अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘हाल में प्रकाशित अमेरिकी सुरक्षा सिद्धांत में, इजराइल दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसे अमेरिका 'आदर्श सहयोगी' बताता है।’’
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक नया आदेश जारी किया है जिससे देश में मौजूद उन हजारों शरणार्थियों को गिरफ्तार किया जा सकता है जो यहां वैध रूप से रह तो रहे हैं लेकिन अब तक उनका कोई स्थायी आवास नहीं है।
मिनिसोटा में बृहस्पतिवार को होने वाली संघीय अदालत की सुनवाई से पहले गृह मंत्रालय (डीएचएस) द्वारा दाखिल एक मेमो में कहा गया है कि ‘ग्रीन कार्ड’ के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को अपने आवेदनों की समीक्षा के लिए अमेरिका में प्रवेश किए जाने के एक साल बाद संघीय हिरासत में रहना होगा।
बुधवार को दाखिल मेमो में कहा गया है कि डीएचएस ‘‘निरीक्षण और जांच प्रक्रिया की अवधि के लिए आव्रजकों को हिरासत में रख सकता है।’’
मानवाधिकार कार्यकर्ता और पुनर्वास समूहों ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की है और संभवत: इस आदेश को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस आदेश से पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान अमेरिका आए लगभग 200,000 शरणार्थियों के बीच भ्रम और भय पैदा हो सकता है। यह आदेश ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन पाबंदियों की श्रृंखला में हालिया कार्रवाई है।
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इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जानकारी दी है कि अमेरिकी विदेश सचिव रुबियो मार्को भारत दौरे पर पहुंचने वाले हैं। उन्होंने ये भी बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले समय में भारत का दौरा कर सकते हैं। अमेरिकी राजदूत ने रूस से तेल खरीदने को लेकर बड़ा बयान दिया है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, "भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है। हम दोनों देशों के संबंधों को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं। दोनों देशों के पास मिलकर काम करने के अपार अवसर हैं। दोनों पक्षों ने लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर किया। यह डील केवल टैरिफ और ट्रेड को लेकर नहीं है, बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार के बजाय मिलकर विकास करने की प्रतिबद्धता के बारे में है।"
गोर ने कहा, "भारत अपने ऊर्जा विकल्पों में विविधता लाने पर काम कर रहा है और वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए बातचीत चल रही है। तेल को लेकर एक सहमति बनी है और अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी देश रूस से तेल खरीदे। यह केवल भारत की बात नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर बहुत स्पष्ट हैं। वह युद्ध की समाप्ति चाहते हैं और शांति की उम्मीद में उन सभी गतिविधियों को खत्म होते देखना चाहते हैं जो इस संघर्ष से जुड़ी हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका और भारत एक साथ काम कर सकते हैं। हम भारत में एक ही मैसेज के साथ आए हैं कि हम अपने एआई स्टैक, एनर्जी और अन्य क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। हम यह ऑफर दुनिया के दूसरे देशों को नहीं दे रहे हैं।"
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