अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता, फैक्ट्रियां बंद और सरकार कह रही है कि सबकुछ ठीक है: सुरजेवाला

कांग्रेस ने कार्पोरेट कर की दर कम किए जाने के सरकार के कदम पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ‘इकोनॉमिक मैनेजमेंट’ नहीं, बल्कि ‘इवेंट मैनेजमेंट’ कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी अपने दूसरे कार्यकाल में देश के लिए आर्थिक और राजनीति विपत्ति लेकर आई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस से बात की। उन्होंने मोदी सरकार भारत के लिए एक आर्थिक और राजनीतिक आपदा बन गई है। तेजी से बढ़ता आर्थिक संकट बीजेपी निर्मित आर्थिक अराजकता में बदल रहा है।

केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करते हुए सुरजेवाला ने कहा, “सावन के अंधे की कहावत मोदी सरकार के लिए सच साबित हो रही है। अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, जीडीपी गिर रही है, निर्यात फेल हो गया है और सरकार कह रही है कि सबकुछ ठीक है। लेकिन हकीकत यह है कि सबकुछ गलत है, सत्ता में बैठे नेताओं को कुछ नजर नहीं आ रहा है। तेजी से फैला भीजेपी निर्मित आर्थिक आराजकता से लोग परेशान हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और उनके सहयोगियों के पास बीमार होती अर्थव्यवस्था में सुधार की कोई योजना तक नहीं है। देश की आर्थिक स्थिरता, रोजगार, रोटी और धंधा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार अगर एक कदम आगे बढ़ाती है, तो तीन कदम पीछे खिसक जाती है। प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री देश की अर्थव्यवस्था और आजीविका नौसिखियों की तरह चला रहे हैं, ये मुझे खेद के साथ कहना पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार द्वारा 1,45,000 करोड़ रु. सालाना का कॉर्पोरेट टैक्स खत्म करने की घोषणा बिना विचारे लिया गया एक और फैसला है, जो सरकार ने डगमगाते सेंसेक्स इंडेक्स से घबराकर देश के लिए बिना किसी मजबूत आर्थिक विज़न और वित्तीय नीति के आनन-फानन में कर डाला। ये ना किसी मजबूत आर्थिक विजन पर आधारित है और ना किसी दूर दृष्टि वाली वित्तीय नीति पर।”

उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट टैक्स की दरों को 30 प्रतिशत से कम कर 22 प्रतिशत, 25 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत से 1,45,000 करोड़ रु. सालाना का नुकसान होगा। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री देश को ये बताएं कि इस पैसे की भरपाई 1,45,000 करोड़ रुपए के वित्तीय घाटे की भरपाई कहां से होगी? क्या इसकी भरपाई एक बार फिर तनख्वाह लेने वाले व्यक्तियों, मध्यम वर्ग के लोगों, गरीब किसान, छोटे दुकानदार, छोटे व्यवसायियों पर पेट्रोल, डीजल और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं के भाव बढ़ा कर और टैक्स लगा कर की जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “क्या प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बताएंगे कि 1,45,000 करोड़ जो कोर्पोरेट टैक्स के अंदर आपने छूट दी है, उसके चलते फिसकल डेफिसिट जो बहुत बढ़ जाएगा, उसके लिए आपके पास क्या उपाय है या फिर आप जैसे बजट में आपने आंकड़ों का फर्जीवाड़ा कर आपने वित्तीय घाटे को छुपा लिया, फिसकल डेफिसिट का छुपा लिया, आप फिर एक बार वही करने वाले हैं?”

उन्होंने आगे पूछा, “प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री, देश की संसद जिसकी जिम्मेवारी है बजट को पारित करना और बजट के भिन्न-भिन्न मदों को देखना, उसको दर किनार कर अपमानित क्यों कर रहे हैं? क्योंकि ये पहली सरकार है 70 वर्षों में जिसने बजट पेश करने के 45 दिन के अंदर खुद के पेश किए बजट को ही खारिज कर दिया या संशोधन कर दिया या उसे वापस ले लिया। क्या देश की संसद और संसदीय प्रणाली की इस प्रकार की व्यापक अवहेलना उचित है?”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आपने टैक्स में राहत ही देनी थी, तो फिर इस देश के साधारण जनमानस, नौकरी पेशा लोगों को, इस देश के मध्यम वर्ग को इंकम टैक्स में राहत क्यों नहीं दी गई? आज भी जब आर्थिक मंदी की मार पड़ रही है तो उसकी सबसे बुरी मार पड़ रही है नौकरी पेशा व्यक्तियों पर, मध्यम वर्ग के लोगों पर, साधारण आम आदमी पर, आप जैसे और मेरे जैसे व्यक्तियों पर।”

उन्होंने एक सवाल दागते हुए पूछा कि क्या केवल टैक्स राहत देने से ही मंदी की मार ठीक हो जाएगी? क्य़ा यही आपका आर्थिक विजन और दृष्टि है और अगर टैक्स राहत देने से मंदी की मार दूर हो जाती है तो फिर जो व्यक्तितगत इंकम टैक्स देने वाले लोग हैं, वो 30 प्रतिशत पर टैक्स देंगे और हजारों करोड़ रुपए का मुनाफा कमाने वाली कंपनियां, वो 22 और 15 प्रतिशत पर टैक्स देंगी, ये इस देश में कौन सी उचित और न्याय संगत बात है?

सुरजेवाला ने कार्पोरेट कर की दर कम किए जाने के सरकार के कदम पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ‘इकोनॉमिक मैनेजमेंट’ नहीं, बल्कि ‘इवेंट मैनेजमेंट’ कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी अपने दूसरे कार्यकाल में देश के लिए आर्थिक और राजनीति विपत्ति लेकर आई है।

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