मध्यप्रदेश में इतना बढ़ गया भ्रष्टाचार, विधानसभा में अपने ही विधायकों से घिर गई शिवराज सरकार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उस समय अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा, जब भ्रष्टाचार को लेकर पार्टी के ही विधायकों ने उन्हें और सरकार को विधानसभा में घेर लिया।

By नवजीवन डेस्क

व्यापमं के दाग बड़ी आसानी से छिपाने में कामयाब रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उस वक्त भारी फजीहत का सामना करना पड़ा, जब बीजेपी के विधायकों ने विधानसभा में अपनी ही सरकार और उसके मुखिया को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर लिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शिवराज सरकार के मंत्रियों को उसी समय सदन में ही भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश देना पड़ा।

राज्य में अपनी ही पार्टी की सरकार में भ्रष्टाचार की स्थिति पर बीजेपी विधायकों में इतनी हताशा फैल गई है कि शिवराज सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए एक बीजेपी विधायक ने तो आगे से सदन में कोई भी सवाल नहीं पूछने की बात कह दी। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने भी भ्रष्टाचार को लेकर शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सरकार के पास कोई दूरगामी नीति नहीं होने को राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार का कारण बताया।

वहीं सदन की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायक सूबेदार सिंह राजौधा ने किसानों को अनुदान बांटे जाने की योजना में अनियमितता और धांधली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने इस योजना के लाभार्थियों की फर्जी सूची विधानसभा को भेजी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी अफसर का 3 बार तबादला हो चुका है, लेकिन अपने रसूख के दम पर वह हर बार अपना तबादला रुकवा लेता है। सूबेदार सिंह राजौधा के तेवर को देखते हुए कृषि राज्यमंत्री ने सदन में ही आरोपी अधिकारी को बर्खास्त करने का फैसला सुना दिया। इसके बाद एक अन्य बीजेपी विधायक ने आरडी प्रजापति ने छतरपुर के एक स्कूल में 14 लाख रुपए की धांधली को लेकर सवाल उठाए। इस मामले में भी विधायकों के तेवर को देखते हुए मंत्री विजय शाह ने फौरन ही सदन में ऐलान किया कि शाम तक दोषी अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार पर विपक्ष भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाता रहा है। कुछ ही समय पहले कांग्रेस नेता और सांसद अरुण यादव ने शिवराज सरकार पर राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय निर्माण में 1500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने अपनी सरकार की ब्रांडिंग पर अंधाधुंध पैसा खर्च करने पर भी शिवराज सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि ऐसे में जब राज्य पर 1.70 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है, शिवराज सिंह सिर्फ अपनी छवि गढ़ने पर दोनों हाथों से पैसे खर्च कर रहे हैं । कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के खुलेआम भ्रष्टाचार पर पीएम मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया था। इससे पहले राज्य के चर्चित व्यापमं घोटाले को लेकर भी मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार देश-दुनिया में पहले भी चर्चा में आ चुकी है।

राज्य में बदहाल शिक्षा व्यवस्था, किसानों की समस्या और सराकारी विभागों में जारी भ्रष्टाचार को लेकर अब तक विपक्षी पार्टियां ही आरोप लगाती रही थीं। लेकिन विधानसभा का ताजा वाकया यह बताने के लिए काफी है कि मध्य प्रदेश में 12 सालों से सत्ता पर काबिज शिवराज सिंह के शासन में राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। जिसकी वजह से अब तक तो सिर्फ आम जनता प्रभावित थी, लेकिन अब पानी सर के इतना ऊपर चला गया है कि सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के विधायक भी अपना आपा खो रहे हैं। राज्य में इसी साल के अंत तक चुनाव होने हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार को लेकर जनता और अपने ही विधायकों के बीच बनी छवि से शिवराज सरकार मुश्किलों में पड़ सकती है।

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