लखनऊ: 8 साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या, पुलिस पर दबाव डालकर अफरा-तफरी में अंतिम संस्कार कराने का आरोप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 8 साल की बच्ची के अपहरण और फिर बलात्कार कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उस पर बच्ची के गरीब मां-बाप पर दबाव डालकर अंतिम संस्कार कराने का आरोप लग रहा है।

फोटो : ओबैद नासिर
फोटो : ओबैद नासिर
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उबैद उल्लाह नासिर

वैसे तो पूरा उत्तर प्रदेश उलटा प्रदेश बना हुआ है, लेकिन राजधानी लखनऊ पूरी तरह से अपराधियों की गिरिफ्त में है। हत्या, लूट, बलात्कार, स्नैचिंग जैसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। पुराने लखनऊ के ठाकुर गंज इलाके में अभी दो सगे भाइयों की हत्या का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था, कि इसी इलाके में आठ साल की एक बच्ची की अपहरण के बाद संदिग्ध बलात्कार और हत्या ने शहर वासियों को हिला कर रख दिया है I

यह बच्ची शुक्रवार की शाम को लापता हुई थी। रात में ही घर वाले थाना ठाकुर गंज में रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे, जहां कथित तौर से उन से रिश्वत मांगी गयी। फल बेचने वाले बच्ची का पिता रिश्वत के पैसे नहीं दे सका, तो उसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी गयी। अगली सुबह एक झाड़ी में बच्ची का शव दिखाई दिया, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गयी। शव बरामद होने के साथ ही मामले को रफा दफा करने का पुलिसिया सिलसिला भी शुरु हो गया।

इतना ही नहीं बच्ची के मां-बाप पर दबाव डाल कर देर रात में बच्ची के शव को दफ्न भी करा दिया गया। बच्ची के घर के पास जमा लोगों का आरोप है कि पोस्टमोर्टम हाउस के बाहर मौजूद इलाके के छुटभैया नेताओं ने गाली देकर पीड़ित बच्ची के पिता पर तुरंत अंतिम संस्कार का दबाव डाला, तो कुछ लोगों ने उसे धर्म का भी हवाला दिया। बताया गया है कि पुलिस वालों ने खुद ही शव को नहलाकर बिना सिले कफ़न में लपेट कर शव को दफ्न करा दिया।

इस पूरी कवायद से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस क्यों इतनी जल्दी अंतिम संस्कार कराना ताहती थी, और इलाके के नेता क्यों मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे थे।

इस हत्याकांड के खिलाफ सोमवार को कई समाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हुसैनाबाद में धरना भी दिया और ठाकुर गंज थाने का घेराव भी किया। पुलिस का कहना है कि वह मामले की पूरी गहराई से छान बीन करेगी और अपराधियों को जल्द कानून के कटघरे में खड़ा करेगी। लेकिन, पुलिस के इस दावे में सच्चाई नजर नहीं आती क्योंकि पीड़िता के माता-पिता बेहद डरे हुए हैं और कुछ भी पूछने पर पुलिस के खिलाफ मुंह नहीं खोल पा रहे।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को आशंका है कि पुलिस की हीलाहवाली और दबाव की नीति के चलते इस मासून की इज्जत से खिलवाड़ और हत्या जैसे जघन्य अपराध की जांच भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी।

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