क्या चंबल घाटी में शान्ति की नई शुरुआत होगी?

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क्या चंबल घाटी में शान्ति की नई शुरुआत होगी?

असहमतियां पहले भी होती थीं। पर अब शासन-प्रशासन के विरुद्ध कुछ भी कहना, सुनना लगभग असंभव है। ऐसे में इतिहासकार रोमिला थापर और हरबंस मुखिया जैसों को इस तरह सुनना दिनों-दिन मुश्किल होता जा रहा है

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अशोक वाजपेयी / क्षत-विक्षत लोकतंत्र में बुद्धिजीवियों की अप्रासंगिकता

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प्रधानमंत्री जी, आप जिस त्याग की मांग कर रहे हैं, उसका सबसे ज्यादा बोझ आखिर पड़ेगा किस पर?

दिल्ली में नीट परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक होने के खिलाफ एनटीए के बाहर विरोध करते एनएसयूआई कार्यकर्ता (फोटो : विपिन)

हालात

बिना ‘बड़ों’ के शामिल हुए, नीट पेपर लीक होना नहीं आसान

हिन्दू राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का तीव्र अवमूल्यन

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राम पुनियानी का लेखः हिन्दू राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का तीव्र अवमूल्यन

केरल के निर्वाचित मुख्यमंत्री वी डी सतीशन

शख्सियत

वी डी सतीशन: वैचारिक स्पष्टता और विधायी राजनीति की राह से सीएम की कुर्सी तक का सफर

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ऑपरेशन सिंदूर: कहानी एक ऐसे युद्ध की जिसने दिया अनचाहा नतीजा

एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

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100% एथनॉल की दौड़ में सूखता महाराष्ट्र, प्यासे इलाकों पर बढ़ा खतरा

फोटो सौजन्य : आर्टिकल 14

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आकार पटेल / नफरत के हॉटस्पॉट में तब्दील होता ओडिशा

4 मई 2026 को चुनावी नतीजे आने के बाद जश्न मनाते बीजेपी समर्थक (फोटो : Getty Images)

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पश्चिम बंगाल: एसआईआर की धुंध में गुम हुआ जनमत

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पश्चिम एशिया में जोखिम भरा एक और दांव

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10 मई, 1857: पहले स्वतंत्रता संग्राम का वह क्रांतिकारी आग़ाज़

यह समय जालिमों और हत्यारों का, हत्या ही उनका भोजन, साहित्य और संगीतप्रेम है!

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विष्णु नागर का व्यंग्यः यह समय जालिमों और हत्यारों का, हत्या ही उनका भोजन, साहित्य और संगीतप्रेम है!