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जन्मदिन विशेषः अभिनय का सरताज था ‘शतरंज का खिलाड़ी’

पर्दे पर देख कर कभी ये लगा ही नहीं कि सईद जाफरी एक्टिंग कर रहे हैं। सहज अभिनय करने में वे बेमिसाल थे। सईद जाफरी भारतीय फिल्मों के पहले ऐसे सफल अभिनेता थे जिन्होंने पहले हॉलीवुड की फिल्मों में अभिनय किया और फिर बॉलीवुड में प्रवेश किया।

फोटोः सोशल मीडिया

इकबाल रिजवी

चश्मे बद्दूर का खालिस पुरानी दिल्ली की जबान बोलने वाला पान वाला लल्लन हो या फिल्म मासूम का ठेठ पंजाबी किरदार मिस्टर सूरी। फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ का मीर रौशन अली जो 18वीं शताब्दी के लखनऊ की खालिस उर्दू बोलता था या फिर ‘गांधी’ के धीर-गंभीर सरदार बल्लभ भाई पटेल का किरदार रहा हो, इन सारे किरदारों को पर्दे पर साकार करने वाले सईद जाफरी ने जो भी भूमिका निभाया वो यादगार बन गया।

8 जनवरी 1929 को पंजाब के मलेरकोटला में जन्में सईद जाफरी की शिक्षा इलाहाबाद और लखनऊ में हुई। अपने कैरियर के शुरुआती दिनों में वह अमेरिका में रेडियो से जुड़े और फिर नाटकों में हिस्सा लेने लगे। बाद में सईद को अमेरिका और इंगलैंड के धारावाहिकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने का मौका मिला।

सईद की पहली हिंदी फिल्म थी सत्यजीत रे की ‘शतरंज के खिलाड़ी’। इसके बाद रिचर्ड एटनबरो ने उन्हें उन्हें फिल्म ‘गांधी’ में मौका दिया। इसी दौरान उन्हें बॉलीवुड की पहली फिल्म ‘चशमेबद्दूर’ मिल गयी। ‘चश्मेबद्दूर’ की रिलीज के साथ ही सईद को बॉलीवुड ने हाथों-हाथ लिया। ‘मासूम’, ‘किसी से ना कहना’, ‘मंडी’, ‘मशाल’, ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘राम लखन’, ‘अजूबा’ और ‘हिना’ जैसी फिल्मों में अपने बेमिसाल अभिनय की वजह से सईद जाफरी ने अभिनय की दुनिया में खुद को अमर बना दिया। सईद जाफरी विदेशी धारावाहिक ‘तंदुरी नाइट्स’ और ‘ज्वेल इन द क्राउन’ जैसे कई टीवी शोज में अभिनय के लिए भी चर्चा में रहे।

जन्मदिन विशेषः अभिनय का सरताज था ‘शतरंज का खिलाड़ी’

सईद जाफरी की शादी 19 साल की उम्र में 17 साल की मेहरुनिसा से हुई थी, लेकिन सईद अपनी पत्नी के घरेलूपन और सादगी से खिन्न रहते थे। वे अपनी पत्नी को ऐसी मॉर्डन महिला के रूप में देखना चाहते थे जो एक हद तक अंग्रेजी कल्चर में रची बसी हो। आखिरकार मेहरुनिसा से उनका तलाक हो गया।

बाद में मेहरूनिमा मधुर जाफरी के नाम से मशहूर हुईं। जाफरी की तीन बेटियां हुईं। मीरा, ज़िया और सकीना। सकीना खुद एक अभिनेत्री हैं। 1982 में आई फिल्म ‘मसाला’ में सकीना ने सईद जाफरी के साथ अभिनय भी किया। मेहरूनिसा के बाद सईद ने दो शादियां और भी कीं।

70 से ज्यादा हिंदी फिल्में कर चुके सईद जाफरी को 90 के दशक में बॉलीवुड में अंकल या ससुर टाइप के ही रोल मिलने लगे, जिससे वह उकताने लगे। तब उन्होंने मुंबई को अलविदा कहा और लंदन जाकर रहने लगे। आखिरी समय तक सईद लंदन में रहते रहे, जहां 15 नवंबर 2015 को उनका निधन हो गया।

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