जानें क्यों सेक्सुअलिटी को लेकर चर्चा में रहने वाले हॉलीवुड के चर्चित अभिनेता अर्मी हैमर की बिश्वजीत से हो रही तुलना

अर्मी हैमर हॉलीवुड के चर्चित अभिनेता हैं। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित अपनी नई फिल्मल ‘रेबेका’ को लेकर वह एक बार फिर से चर्चा में हैं। आर्मी हैमर बहुत ज्यादा पसंद किए जाने वाले कलाकार हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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सुभाष के झा

अर्मी हैमर हॉलीवुड के चर्चित अभिनेता हैं। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित अपनी नई फिल्मल ‘रेबेका’ को लेकर वह एक बार फिर से चर्चा में हैं। आर्मी हैमर बहुत ज्यादा पसंद किए जाने वाले कलाकार हैं। पता नहीं किन अजीब कारणों से लोग उन्हें हमेशा गे (समलैंगिक पुरुष) समझते हैं (जो सही है, सच में) क्योंकि उन्हें गे (समलैंगिक) विषय पर आधारित फिल्म ‘कॉल मी बाय योर नेम’ से प्रसिद्धि मिली।

जब आर्मी हैमर से उनकी सेक्सुअलिटी को लेकर प्रश्न किया जाता है तो वह इसे हंसी में टाल देते हैं। लेकिन कहीं-न-कहीं देखा जाए तो एक प्रश्न उठकर आता है कि क्या आर्मी हैमर और उनके सहयोगी कलाकार टिमोथी चेलमेट वास्तव में एक-दूसरे के करीब थे। यह ऑस्कर विजेता फिल्म है। इटली में इसकी शूटिंग के दौरान दोनों सेट पर पूर्णतः निर्वस्त्र होते थे और शायद इसी सब ने आर्मी हैमर की नसों में गर्मी पैदा करना शुरू किया होगा। फिल्म ‘जे एडगर’ में लियोनार्डो डिकैपरियो के साथ एक दृश्य में उनका लिप-टु-लिप स्मूच भी लगातार प्रश्नों के घेरे में रहा है। और आर्मी हैमर ने इस स्थिति को यह स्वीकार कर के बदतर बना दिया कि उन्हें लियानार्डो के साथ उस चुंबन (किस) में बहुत आनंद आया। इसके कारण उनकी (आर्मी हैमर की) सेक्सुअलिटी को लेकर प्रश्न कई गुना बढ़ गए।

हाल ही में उनका दस वर्ष का वैवाहिक जीवन समाप्त हो गया और यह उनके प्रशंसकों के लिए एक आघात था... क्योंकि जाहिराना तौर पर वह बहुत ही ख्याल रखने वाले पतिऔर पिता प्रतीत होते थे। लेकिन इन चीजों के बारे में कभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

आर्मी हैमर की नवीनतम फिल्म डेफ्नेड्यूमोरिएर का लोगों के बीच सदा ही अतिप्रिय रहने वाला उपन्यास ‘रेबेका’ का रुपहले पर्दे पर रूपांतरण है। उम्मीद है कि इस फिल्म के बाद शायद उनसे जुड़े समलैंगिकता के सभी मत ओझल हो जाएंगे।

फिल्म ‘रेबेका’ और अपने आगे आने वाले प्रोजेक्ट ‘डेथ ऑन द नाइल’ में आर्मी हैमर एक बहुत ही कुख्यात हेटरो सेक्सुअल के किरदार निभा रहे हैं। जैसे कि वह अपने आज तक के सबसे चर्चित स्क्रीन रोल से गढ़ी अपनी समलैंगिक होने की छवि को ही चुनौती दे रहे हैं।


‘रेबेका’ किसी भी कलाकार के लिए बहुत ही पेचीदा है। यह विश्व में अंग्रेजी भाषा में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला उपन्यास है। सन 1940 में सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अल्फ्रेड हिचकॉक ने इस उपन्यास पर करीब-करीब बिल्कुल ही दोष रहित फिल्म बनाई थी। उस फिल्म में लॉरेन्स ऑलिविएर ने रहस्यमयी मैक्सिम डिविंटर का किरदार निभाया था। उस फिल्म में मैक्सिम डिविंटर नई दुल्हन को घर लाता है। इस नई दुल्हन का किरदार अपने जमाने की अति खूबसूरत अभिनेत्री जोआन फोंटेन ने निभाया था। लेकिन नई दुल्हन के घर आते ही मैक्सिम की पहली पत्नी का भूत और उसकी वफादार महिला साथी डरावनी मिसिज डेनवर्स द्वारा उसे प्रताड़ित किया जाता है।

मेरा मानना है कि यह प्रश्न अप्रासंगिक है कि क्या आर्मी हैमर सर लॉरेन्स जितने ही मंजे हुए कलाकार हैं। हम से पूछा जाने वाला प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या आर्मी हैमर बॉलीवुड के बीते दिनों के चर्चित अभिनेता बिश्वजीत जितने अच्छे हैं जिन्होंने 1964 में ‘रेबेका’ के अघोषित बॉलीवुड रूपांतरण ‘कोहरा’ फिल्म में मुख्य किरदार निभाया था। ‘कोहरा’ ने मूल कहानी के साथ बिल्कुल वैसा ही किया जैसा कि अपराधी बलात्कार पीड़िता के साथ करते हैं।

‘रेबेका’ का यह बॉलीवुड संस्करण मूल कहानी से इतना दूर था कि मैं हैरान था कि कैसे उन्होंने इतने बदलाव संभव किए जिस में उन्होंने अंत तक को बदल दिया और किसी ने कुछ कहा भी नहीं। इस फिल्म से मेरे जहन में जो उतर पाया, वह था अलौकिक वहीदा रहमान का वह दृश्य जिस में वह लता मंगेशकर की कालजयी आवाज में गाए गए गीत ‘ओ बेकरार दिल’ को स्क्रीन पर गा रही थीं।

‘कोहरा’ फिल्म में वहीदा रहमान एक संदिग्ध से दिखने वाले रहस्यमयी अभिजात व्यक्ति की नई पत्नी हैं और बहुत ही छुईमुई सी हैं। लेकिन उस अभिजात व्यक्ति के मन में क्या है, यह किसी को खबर नहीं। मैं अक्सर यही सोचता हूं कि निर्देशक बीरेन नाग ने इस फिल्म में इस किरदार के लिए बिश्वजीत को क्यों चुना। ऐसा कहा जाता है कि फिल्म निर्माता हेमंत कुमार मुखर्जी अपने पहले प्रोडक्शन ‘बीस साल बाद’ की हिट जोड़ी को ही रखना चाहते थे। खैर छोड़िए, जैसा सही लगा और जो व्यवस्थित हुआ।नेटफ्लिक्स पर ‘रेबेका’ का यह रूपांतरण अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में नेटफ्लिक्स पर आया है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि बिश्वजीत के मुकाबले आर्मी हैमर डेफ्नेड्यूमोरिएर के बहुत बेहतर नायक हैं। जहां तक सर लॉरेन्स ऑलिविएर का सवाल है, तो क्या लीजेन्ड को लीजेन्ड ही नहीं रहने दिया जाए?

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