कानपुर गोलीकांड में एक और फिल्मी मोड़, मृत अपराधी की जेल में बंद विधवा के ‘नाबालिग’ होने का दावा

बिकरू कांड के बाद मारे गए अमर दुबे की जेल में बंद पत्नी खुशी के पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी नाबालिग बेटी को मामले में जानबूझ कर फंसाया है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी ने अपराध किया भी है, तो पुलिस को उसके साथ नाबालिग के रूप में पेश आना चाहिए।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 8 पुलिस वालों की जान लेने वाले गोलीकांड में अब एक और फिल्मी मोड़ आता दिख रहा है। कांड के मास्टरमाइंड विकास दुबे के मारे गए अपराधी साथी अमर दुबे की पत्नी खुशी के परिवार ने दावा किया है कि वह नाबालिग है। खुशी के पिता ने बुधवार को कानपुर देहात में विशेष एंटी-डकैत कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर खुशी के साथ नाबालिग के तौर पर पेश आने का अनुरोध किया है।

यहां बता दें कि गैंगस्टर विकास दुबे के साथी अमर दुबे और खुशी की शादी बिकरू हत्याकांड से मात्र चार दिन पहले 29 जून को हुई थी। इस हत्याकांड में आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे, जिसके बाद अमर को स्पेशल टास्क फोर्स ने 8 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसी दिन वह हमीरपुर में मारा गया।

खुशी के पिता श्याम लाल तिवारी के वकील शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि बिकरू कांड वाले दिन खुशी की उम्र 16 साल और 11 महीने थी। एफिडेविट के साथ खुशी के हाई स्कूल सर्टिफिकेट को भी संलग्न किया गया है, जिससे पता चलता है कि उसका जन्म 21 अगस्त 2003 को हुआ था।

खुशी के पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी नाबालिग बेटी को बिकरू कांड में जानबूझ कर फंसाया है। उन्होंने कहा, "वह वयस्क नहीं है और न ही इतनी परिपक्व है कि गैंगस्टर और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर योजना बना सके। हमें संदेह है कि पुलिस ने उसे फंसाया है। और अगर मेरी बेटी ने अपराध किया भी है, तो पुलिस को उसके साथ नाबालिग के रूप में पेश आना चाहिए और कोर्ट को इस बारे में फैसला करने देना चाहिए।"

बता दें कि खुशी को जेल में रहते हुए एक महीने से अधिक वक्त हो गया है। उस पर आईपीसी की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या और आपराधिक साजिश भी शामिल है। सरकारी वकील राजीव पोरवाल ने कहा, "न्यायाधीश ने खुशी की उम्र का पता लगाने के लिए जुवेनाइल जस्टीस बोर्ड को खुशी की फाइल भेज दी है।"

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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