गुजरात में दलित सरपंच के पति की पीट-पीट कर हत्या, पुलिस से की थी सुरक्षा की मांग

51 साल के मांजीभाई सोलंकी रणपुर-बरवाला सड़क से गुजर रहे थे। तभी उनकी बाइक की टक्कर एक गाड़ी से हो गई। जिसके बाद 6 लोगों ने उन्हें पीट पीट कर अधमरा कर दिया। मांजीभाई ने इसकी खबर अपने जानने वालों की दी, लेकिन अस्पताल जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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नवजीवन डेस्क

गुजरात से आए दिन दलितों पर अत्याचार की खबरें आती रहती हैं। एक बार फिर एक दलित व्यक्ति की हत्या का मामला समाने आया है। दलित सरपंच के पति को कुछ लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला। दरअसल 51 साल के मांजीभाई सोलंकी रणपुर-बरवाला सड़क से गुजर रहे थे। तभी उनकी बाइक की टक्कर एक गाड़ी से हो गई। जिसके बाद 6 लोगों ने उन्हें पीट पीट कर अधमरा कर दिया। मांजीभाई ने इसकी खबर अपने जानने वालों की दी, लेकिन अस्पताल जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

मांजीभाई के परिजनों के मुताबिक उन्होेंने फोन पर बताया कि उनकी मोटरसाइकिल को एक गाड़ी ने टक्कर मार दी, उसके बाद 5-6 लोग आए और उनके साथ मारपीट की। लोगों ने उन्हें लाठी-डंडों से मारा। मांजीभाई, रणपुर तालुका के जलिया गांव की सरपंच गीता सोलंकी के पति हैं।


घायल मांजभाई को उनके परिजनों ने अहमदबाद के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मांजीभाई सोलंकी सड़क पर घायल अवस्था में पड़े हुए हैं। और उनके रिश्तेदार उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मांजीभाई को पहले से ही हमले की आशंका थी। मांजी और उनकी पत्नी ने पुलिस से सुरक्षा देने की मांग भी की थी। लेकिन उन्हों सुरक्षा मुहैया नहीं करवाया गया। 2018 जून में उन्होंने इस मसले पर राज्य के लॉ एंड ऑर्डर डीजीपी को चिट्ठी भी लिखी गई थी। जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके परिवार को जान से मारे जाने का खतरा है, यही कारण है कि उन्हें पुलिस सुरक्षा की जरूरत है। उन्हें सुरक्षा दि गई थी लेकिन दो महीने में ही वापस ले ली गई।

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी इस घटना को लेकर गुजरात सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गुजरात में जातिवादी अत्याचार और हत्या लगातार हो रही है। सुरक्षा कीं मांग के बावजूद एक दलित की निर्मम हत्या कर दी गई। मायावती ने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में इस प्रकार के जघन्य अपराधों का लगातार जारी रहना बहुत दुखद, निंदनीय और शर्मनाक है।

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