यूपी: मोबाइल की किस्त के लिए हद पार! युवक को 5 दिन बंधक रखा, ब्लड बैंक ले जाकर खून निकलवाने का आरोप

लखनऊ में मोबाइल की एक किस्त के लिए युवक को बंधक बनाने का आरोप लगा है। परिवार ने रिकवरी एजेंटों पर मारपीट और ब्लड बैंक ले जाने का गंभीर आरोप लगाया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मोबाइल की महज एक किस्त की वसूली के लिए एक युवक को कथित तौर पर अगवा कर कई दिनों तक बंधक बनाए रखने का मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र में नवल नाम के युवक के परिजनों ने मोबाइल रिकवरी एजेंट शुभम सिंह और उसके साथी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि नवल को करीब पांच दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपियों ने उसे एक ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया और उसे बेच दिया। हालांकि, खून बेचने के आरोप की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

परिवार के मुताबिक, नवल ने सितंबर 2025 में करीब 21 हजार रुपये का मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर फाइनेंस कराया था। इसकी करीब 2,799 रुपये की एक किस्त बकाया थी। आरोप है कि इसी रकम की वसूली के लिए रिकवरी एजेंट शुभम सिंह अपने एक साथी के साथ पहले नवल के घर पहुंचा। इसके बाद मंगलवार को दोनों उसे स्कूटी पर बैठाकर अपने साथ ले गए। परिवार का दावा है कि इसके बाद नवल को एक जगह बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई।

परिवार से फोन पर मांगे पैसे, UPI से जमा कराई किस्त

परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने नवल के फोन से परिवार का नंबर लिया और उनसे किस्त के पैसे मांगे। परिवार के मुताबिक, नवल को जान से मारने की धमकी भी दी गई। डर के कारण परिजनों ने UPI के जरिए 2,799 रुपये आरोपियों को ट्रांसफर कर दिए। घर लौटने के बाद नवल ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान उसे खाना तक नहीं दिया गया। प्यास लगने पर पानी भी नहीं देने का आरोप है।

परिवार के अनुसार, आरोपियों ने अगले दिन फोन कर 12,500 रुपये और मांगे। इसके बाद परिजन निगोहां थाने पहुंचे और दरोगा मोहित को पूरी जानकारी दी। परिवार का आरोप है कि दरोगा ने आरोपियों को फोन कर नवल को छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद शनिवार शाम नवल को ऑटो से थाने भेज दिया गया।


ब्लड बैंक ले जाने और खून निकलवाने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप ब्लड बैंक से जुड़ा है। परिवार का दावा है कि बंधक बनाए जाने के दौरान आरोपी नवल को एक ब्लड बैंक लेकर गए, जहां उसका एक यूनिट खून निकाला गया। परिजनों का आरोप है कि इस खून को बेच दिया गया। हालांकि, इस दावे की अभी पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वास्तव में ब्लड बैंक में क्या हुआ था और खून निकालने के पीछे क्या वजह थी।

परिवार का आरोप है कि नवल के थाने पहुंचने के बाद भी पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद परिजनों ने डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक से शिकायत की। डीसीपी के निर्देश के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले में आरोपियों की तलाश के लिए तीन पुलिस टीमें लगाई गई हैं। साथ ही डीसीपी ने थाने की पुलिस की कथित लापरवाही की जांच के भी निर्देश दिए हैं।

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