सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, भाई ने 22 आरोपियों को बरी करने के फैसले को दी चुनौती
नवंबर 2005 में अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी गई थी। कौसर बी की कुछ दिनों बाद हत्या कर दी गई और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया। मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह प्रजापति की भी बाद में कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई।

गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई ने बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या के मामले में 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों के बरी होने के फैसले को बरकरार रखा था।
भाई नयाबुद्दीन शेख ने दायर की याचिका
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, यह याचिका नयाबुद्दीन शेख ने दायर की है। यह याचिका 13 अगस्त को रात लगभग 10.52 बजे दायर की गई थी और अभी इसे 90 दिनों के लिए मान्य डिफेक्ट लिस्ट (कमियों वाली सूची) के तहत मामले के तौर पर दिखाया जा रहा है। इस मामले में सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है, जबकि याचिका वकील अचिंत कुमार के जरिए दायर की गई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती
याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती दी गई है। इस बेंच ने सोहराबुद्दीन के भाइयों की उन अपीलों को खारिज कर दिया था, जिनमें स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिसंबर 2018 में सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 7 मई के अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में दखल देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष भरोसेमंद सबूतों के जरिए कथित साजिश और हत्याओं को साबित करने में नाकाम रहा है।
हाईकोर्ट में बरी करने के फैसले पर उठाया था सवाल
बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने दायर अपीलों में आरोपियों के बरी होने के फैसले को रद्द करने या फिर दोबारा ट्रायल कराने की मांग की गई थी। अपील करने वालों ने तर्क दिया था कि ट्रायल में गंभीर कमियां थीं, जिसमें उन मजिस्ट्रेटों को न बुलाना भी शामिल था जिनके सामने कुछ होस्टाइल गवाहों ने पहले अपने बयान दर्ज कराए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में कई गवाहों ने दावा किया कि ट्रायल के दौरान उनके बयान सही ढंग से दर्ज नहीं किए गए थे। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट बरी करने के फैसले को पलटने के लिए सहमत नहीं हुआ। सीबीआई ने हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि उसने 2018 में बरी करने के फैसले को स्वीकार कर लिया था और अपील में इसे चुनौती देने का कोई फैसला नहीं किया था।
नवंबर 2005 में की गई थी हत्या
यह मामला 22-23 नवंबर, 2005 की रात को हैदराबाद से सांगली जा रही एक लग्जरी बस से सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और प्रजापति के कथित अपहरण से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवंबर 2005 में अहमदाबाद के पास गुजरात और राजस्थान पुलिस के जवानों की एक संयुक्त टीम ने कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी थी। कौसर बी की भी कुछ दिनों बाद कथित तौर पर हत्या कर दी गई और उसके शव को चुपके से ठिकाने लगा दिया गया। इस मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह माने जाने वाले प्रजापति की बाद में दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक और कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई।
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