पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कौन भर रहा है मासूम बच्चों की नसों में जहर? 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार कई वर्षों से फलफूल रहा है। हाल में जहरीली शराब से हुई 100 लोगों की मौत के बाद से यह मुद्दा गर्म है। मेरठ और उसके आसपास के स्कूलों में हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जो हैरान और परेशान करने वाली हैं।

फोटो- आस मोहम्मद कैफ 
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आस मोहम्मद कैफ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार कई वर्षों से फलफूल रहा है। हाल में हुई 100 लोगों की मौत के बाद से यह मुद्दा गर्म है। स्थितियां और भी विकराल होती जा रही हैं। मेरठ और उसके आसपास के स्कूलों में हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जो हैरान और परेशान करने वाली हैं। दरअसल पिछले महीने मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज के आठवीं के पांच छात्र शराब पीकर कक्षा में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि इन छात्रों कक्षा में भी शराब पी। इस तरह की घटनाएं दूसरे स्कूलों में भी घटी हैं, जहां छात्रों ने पहले शराब पी और फिर स्कूल गए। ऐसे मामलों में बच्चों के परिजनों को बुलाकर चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता हैै।

दरअसल इन इलाकों में कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। छोटी से छोटी दुकानों पर भी शराब का पाउच उपलब्ध है। परचून की दुकान से लेकर कोलड्रिंक वाले भी इस कारोबर में लिप्त हैं। ये अपने फायदे के लिए बच्चों को भी शराब बेच रहे हैं। आसानी से उपलब्ध होने की वजह से बच्चों को इसकी लत लगती जा रही है।

फोटो- आस मोहम्मद कैफ 
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प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि उत्तराखंड से लेकर मेरठ तक कच्ची शराब का सिंडिकेट चल रहा है। सहारनपुर, रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ और बिजनौर में कच्ची शराब की भट्ठियां चलाए जाने की खबर है। इन इलाकों में बनी शराब को आसपास के गांव में सप्लाई किया जा रहा है। यह कच्ची शराब इन जिलों के गांव में परचून की दुकानों में भी उपलब्ध है। शराब तक बच्चों की पहुंच आसान हो गई है और वो इसकी लत की शिकार हो रहे हैं।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब से करीब 100 लोगों की मौत हो गई। सहारनपुर और रुड़की में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा थी। सहारनपुर में जहरीली शराब से 50 तो रुड़की में 20 लोग काल के गाल में समा गए। सहारनपुर जिले के नागल, गागलहेड़ी और देवबंद थाना क्षेत्र के कई गांवों में दर्जनों मौतें हुईं।

फोटो- आस मोहम्मद कैफ 
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कच्ची शराब के अवैध कारोबार करने वालों को कानून का भी कोई डर नहीं है। यूपी सरकार इन पर लगाम लगाने में नाकाम है। इन इलाकों में आबकारी अधिकारी और पुलिस प्रशान भी जाने से खौफ खाते हैं। कई बार इन पर हमले भी हुए हैं।

इन इलाकों में कच्ची शराब का कारोबार कोई नया नहीं है। कच्ची शराब से पहले भी सैकड़ों लोगों ने अपनी जानें गंवाई है। मौत के बाद सरकार कार्रवाई करने की बात करती है। दिखावे के लिए एक्शन भी होता है। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से कच्ची शराब बनाने का खतरनाक खेल शुरू हो जाता है।

फोटो- आस मोहम्मद कैफ 
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ग्रामीणों की मानें तो यह खेल आबकारी अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है। जब भी कोई घटना घटती है तो प्रशासन एक्शन में आता है। पुलिस ने मंगलवार को रुड़की से अर्जुन नाम के एक युवक को पकड़ने का दावा किया है। सहारनपुर प्रशासन के मुताबिक अर्जुन ने ही रेक्टिफाइड वाले केमिकल का इस्तेमाल करके 6 ड्रम शराब बनाई थी। अर्जुन की बनाई शराब को पीकर ही ज्यादातर लोगों की मौतें हुईं। आबकारी अधिकारियों के मुताबिक रेक्टिफाइड की मात्रा अधिक होने के कारण यह शराब जहर बन गई।

इस मामले में सहारनपुर के पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जगपाल सिंह ने कहा है कि अवैध शराब का कारोबार पुलिस की शह पर चलता है। पुलिस वालों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बनाया हुआ है। पुलिस की मिलीभगत से ही इन इलाकों में कच्ची शराब का धंधा फलफूल रहा है। सहारनपुर के उमाही गांव में कच्ची शराब पीने से पांच लोगों की मौत हुई थी। इस गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस से कच्ची शराब की शिकायत कई बार की गई लेकिन पुलिस ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उनका मानना है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से ही गांव के पांच लोगों की जान चली गई।

फोटो- आस मोहम्मद कैफ 
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हालांकि घटना के बाद से पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 271 लीटर शराब और 350 लीटर लहन की बरामदगी हुई है। वहीं इस पर राजनीति भी तेज हो गई है। यूपी सरकार इसे षड़यंत्र का नाम दे रही है तो विपक्ष ने इसे योगी सरकार की नाकामी बताया है।

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Published: 13 Feb 2019, 5:00 PM