मिडिल ईस्ट तनाव का असर: दुबई में पहली बार प्रॉपर्टी की कीमतें 5.9% तक गिरीं, घर खरीदना हुआ सस्ता
दुबई में 2020 के बाद पहली बार प्रॉपर्टी कीमतों में 5.9% की गिरावट दर्ज हुई है। मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं। इससे मार्केट की रफ्तार धीमी पड़ी है और नए खरीददारों के लिए मौके बने हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को झटका लगा है। कोरोना महामारी के बाद लगातार तेज़ी से बढ़ रहे प्रॉपर्टी बाजार में अब पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर पड़ा है, जिसके चलते ऊंची इमारतों वाले इस शहर में संपत्तियों की कीमतें नीचे आने लगी हैं। ऐसे में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह एक अहम मौका बन सकता है।
4 साल बाद पहली बार गिरे दाम
दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट में 2020 के बाद पहली बार कीमतों में कमी आई है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी वैलूस्ट्रैट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में रेसिडेंशियल प्राइस इंडेक्स में 5.9% की गिरावट दर्ज की गई। यह बदलाव उन निवेशकों के लिए चौंकाने वाला है, जो पिछले चार सालों से लगातार बढ़ते दाम देख रहे थे।
तनाव से निवेशकों का भरोसा प्रभावित
मार्केट में इस गिरावट की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का मौजूदा तनाव बताया जा रहा है। खासकर ईरान से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार फिलहाल सतर्क हो गए हैं। निवेशक अब पैसा लगाने से पहले इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार की गति धीमी पड़ गई है।
अनादोलु एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में सेकेंडरी मार्केट यानी पुराने घरों की बिक्री में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है। कुछ समय पहले तक जो बाजार खरीदारी की तेजी से भरा हुआ था, वहां अब सुस्ती साफ नजर आ रही है, खासकर लग्जरी प्रॉपर्टी सेगमेंट में।
गिरावट नहीं, ‘करेक्शन’ मान रहे एक्सपर्ट
हालांकि कीमतों में आई कमी को एक्सपर्ट्स बाजार की कमजोरी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद दुबई में प्रॉपर्टी कीमतें 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी थीं, जो एक असामान्य तेजी थी। अब बाजार सिर्फ संतुलन की ओर लौट रहा है और निवेश के फैसले हाइप के बजाय वास्तविक वैल्यू के आधार पर लिए जा रहे हैं।
डेवलपर्स ने बदली रणनीति
बाजार को स्थिर करने के लिए दुबई के डेवलपर्स ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वे अब फिर से फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान और रेंट-टू-ओन जैसी स्कीम्स ला रहे हैं। राहत की बात यह है कि ‘ऑफ-प्लान’ यानी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का सेक्टर अभी भी स्थिर बना हुआ है। दुबई का स्काईलाइन लगातार विस्तार कर रहा है, लेकिन बीते चार साल की तेज रफ्तार पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
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