अर्थतंत्र की खबरें: अमेरिका से आया एक संदेश ने शेयर बाजार में भरा जोश, और 10, 20 और 50 रुपए के नोटों की है कमी ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत के बाद जोखिम भावना में सुधार होने से घरेलू बाजार ने लगातार दो दिनों की गिरावट को समाप्त कर दिया।

फोटो: ians
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नवजीवन डेस्क

मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते पिछले दिन की बड़ी गिरावट से उबरते हुए भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 639.82 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,205.98 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 233.55 अंक यानी 0.97 प्रतिशत चढ़कर 24,261.60 के स्तर पर बंद हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत के बाद जोखिम भावना में सुधार होने से घरेलू बाजार ने लगातार दो दिनों की गिरावट को समाप्त कर दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा बाजार में कई दिनों तक चले भारी उतार-चढ़ाव के बाद बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध का समाधान 'बहुत जल्द' हो सकता है। इस खबर से निवेशकों का मनोबल बढ़ा और उनमें जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी।

इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

दिन के कारोबार के दौरान बाजार में और ज्यादा तेजी देखने को मिली। इंट्राडे में सेंसेक्स करीब 960 अंक यानी लगभग 1.2 प्रतिशत उछलकर 78,526.25 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 275.75 अंक यानी करीब 1.1 प्रतिशत बढ़कर 24,303.80 के स्तर तक पहुंचा। हालांकि बाद में दोनों सूचकांकों में थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई।

व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में जहां 1.62 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.12 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो इंडेक्स (3.10 प्रतिशत की तेजी) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बनकर उभरा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (बैंक को छोड़कर) इंडेक्स ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, निफ्टी बैंक में 1.66 प्रतिशत, तो निफ्टी एफएमसीजी में 0.84 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

इस बीच, निफ्टी आईटी इंडेक्स (0.46 प्रतिशत की गिरावट) को क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। वहीं, निफ्टी ऑयल एंड गैस का प्रदर्शन भी खराब रहा।

इससे पहले सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में बिकवाली के कारण घरेलू बाजार दबाव में आ गया था।

देश में 10, 20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं : केंद्र

देश में करेंसी सर्कुलेशन में 10,20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं है। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में दी गई। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि आरबीआई के अनुसार, कम मूल्य के नोट परंपरागत रूप से एटीएम के माध्यम से नहीं दिए जाते रहे हैं।

उन्होंने सदन को सूचित किया, "कम मूल्यवर्ग के नोटों को छोटे मूल्य के नोट वितरकों के माध्यम से वितरित करने के लिए एक पायलय प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।"

सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में केंद्रीय बैंक द्वारा 10 रुपए के 439.40 करोड़ नोट, 20 रुपए के 193.70 करोड़ नोट और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई है।

पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में 10 रुपए के 180 करोड़ नोट, 20 रुपए के 150 करोड़ नोट और 50 रुपए के 300 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई थी।

आरबीआई, एक सतत प्रक्रिया के तहत, विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को आवश्यक मूल्यवर्ग के नोटों के मिश्रण की सलाह देती है।

कम मूल्य के मुद्रा की मांग नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरी की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान माध्यम कुल लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें कम मूल्य के लेन-देन भी शामिल हैं।


रुपया 36 पैसे की बढ़त के साथ 91.85 प्रति डॉलर पर

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले मंगलवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से जोरदार वापसी करते हुए 36 पैसे की बढ़त के साथ 91.85 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कम होने की उम्मीदों के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से रुपये को मजबूती मिली।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में बढ़त और कमजोर डॉलर ने भी भारतीय मुद्रा को मजबूती प्रदान की।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.92 पर खुला और 91.71 से 92.19 के दायरे में कारोबार करने के बाद 91.85 (अस्थायी) पर बंद हुआ।

सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.21 पर बंद हुआ था जो इसका सर्वकालिक निचला स्तर था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, "रुपया वैश्विक बाजारों में जोखिम कम होने की धारणा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेतों के बाद रिकॉर्ड निचले स्तर से उबर गया। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी ने भी रुपये की मजबूती में मदद की है।'" उन्होंने कहा कि डॉलर-रुपये की विनिमय दर 91.60 से 92.20 के बीच रहने की उम्मीद है।

चांदी का वायदा भाव 10,442 रुपये के उछाल के साथ 2.77 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने के कारण मंगलवार को वायदा कारोबार में चांदी की कीमतें 10,442 रुपये बढ़कर 2.77 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं।

मल्टी कमोडिटी एक्स्चेंज में चांदी के मई महीने में आपूर्ति वाले अनुबंध की कीमत 10,442 रुपये या लगभग चार प्रतिशत बढ़कर 2,77,602 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इसमें 2,265 लॉट का कारोबार हुआ।

विश्लेषकों ने कहा कि पिछले सत्र में गिरावट के बाद डॉलर में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर धारणा के कारण चांदी की कीमतों में तेजी आई।

विदेशी बाजारों में, न्यूयॉर्क में मई अनुबंध के लिए चांदी की वायदा कीमतें 5.07 अमेरिकी डॉलर या छह प्रतिशत बढ़कर 89.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

ऑगमोंट की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा, ‘‘चांदी ने पिछले सत्र में अस्थायी रूप से 80 डॉलर से नीचे गिरने के बाद लगभग 90 डॉलर तक वापसी की, जिसमें अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने मजबूती प्रदान की।’’

सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान में सैन्य अभियान तेजी से पूरा होने की ओर है।

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