अर्थतंत्र की खबरें: सरकार का एक फैसले से झटके में सोना-चांदी की कीमतों में लगी आग और ऑल-टाइम लो पहुंचा रुपया
सोने की कीमत 8,550 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई। चांदी की कीमत 20,500 रुपये बढ़कर 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो कल 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) थी।

सरकार के बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत किए जाने के बाद बुधवार को स्थानीय बाजार में सोने की कीमत 8,550 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 20,500 रुपये बढ़कर 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो कल 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 8,550 रुपये या पांच प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,65,350 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। इसका पिछला बंद भाव 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं। ये नए शुल्क बुधवार से लागू हो गए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद एवं विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों के आह्वान के बाद यह घोषणा की गई है।
सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी : एक्सपर्ट
सोने पर कस्टम ड्यूटी और सेस में बढ़ोतरी से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी। यह जानकारी एक्सपर्ट की ओर से बुधवार को दी गई।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्चीगर ने कहा कि सरकार ने कस्टम ड्यूटी (सेस सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार के इस फैसले से सोने के आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के देश से बाहर जाने से रोकने में मदद मिलेगी।
पच्चीगर ने आगे कहा कि कस्टम ड्यूटी बढ़ने से सोने की ज्वेलरी की कीमत में भी इजाफा होगा और इससे ग्राहक पहले के मुकाबले कम आएंगे और ज्वेलरी की बिक्री में भी गिरावट आएगी।
पच्चीगर के मुताबिक, सरकार को सोने के आयात को कम करने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) को दोबारा से शुरू करना चाहिए। इससे देश में पुराना सोना बाहर आएगा और इससे कारीगरों को भी अपना जीवन यापन करने में मदद मिलेगी। कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई है।
रुपया 95.80 के सर्वकालिक निचले स्तर तक टूटने के बाद 95.67 प्रति डॉलर पर बंद
रुपया बुधवार को कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.80 पर पहुंच गया। हालांकि मामूली सुधार के साथ अंत में 95.67 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप एवं सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाए जाने से रुपये का निचले स्तर पर समर्थन मिला।
कारोबारियों के मुताबिक, रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है और इसमें अब तक छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। महंगा कच्चा तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर बढ़ती चिंताएं इसकी मुख्य वजह हैं।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.52 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें काफी उतार-चढ़ाव रहा और यह एक समय 95.80 प्रति डॉलर तक गिर गया। अंत में रुपया 95.67 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा जो पिछले बंद स्तर से एक पैसा अधिक है। रुपया मंगलवार को 40 पैसे टूटकर 95.68 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
शेयर बाजार में चार दिन से जारी गिरावट थमी, सेंसेक्स में 50 अंक की मामूली बढ़त
स्थानीय शेयर बाजारों में पिछले चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर बुधवार को विराम लगा और दोनों मानक सूचकांक लाभ में रहे। बीएसई सेंसेक्स 50 अंक चढ़ा जबकि एनएसई निफ्टी में 33 अंक की तेजी रही। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और वैश्विक अनिश्चितता से तेजी पर अंकुश लगा।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 49.74 अंक यानी 0.07 प्रतिशत बढ़कर 74,608.98 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ऊंचे में 75,191.57 अंक तक गया जबकि नीचे में 74,134.48 अंक तक आया।
इसी तरह, एनएसई निफ्टी 33.05 अंक यानी 0.14 प्रतिशत बढ़कर 23,412.60 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, भारती एयरटेल और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख रूप से लाभ में रहे।
दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, सन फार्मा और टेक महिंद्रा शामिल हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.27 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 1,959.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
पिछले दो दिन से भारी बिकवाली के बाद घरेलू शेयर बाजारों में आज अपेक्षाकृत स्थिरता देखने को मिली और दोनों मानक सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।
खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 27 में औसत 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान : रिपोर्ट
भारत में महंगाई दर वित्त वर्ष 27 में औसत 5.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अप्रैल में महंगाई दर मामूली रूप से बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई है, जो कि मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया में तनाव को 74 दिन का समय हो गया है और खुदरा महंगाई के ऊपर बढ़ने के जोखिम बहुत धीमी गति से सामने आ रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उपभोक्ता अभी भी तेज महंगाई से सुरक्षित बने हुए हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से उत्पन्न ऊर्जा संकट ने तेल की कीमतों के पूर्वानुमानों को बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 90-95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत अधिक है।
अप्रैल में बेस इफेक्ट के कारण बिजली, गैस और ईंधन की महंगाई में कमी आई, जबकि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के निर्णय से परिवहन ईंधन की महंगाई नियंत्रण में रही।
ऊर्जा और अन्य इनपुट की बढ़ती कीमतों का उपभोक्ताओं पर अपेक्षित प्रभाव अभी पूरी तरह से नहीं पड़ा है, जिसके चलते कोर मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने 3.7 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही।
हालांकि रेस्तरां और आवास सेवाओं के साथ-साथ घरेलू साज-सामान और उपकरणों की मुद्रास्फीति में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई, लेकिन कीमती धातुओं की मुद्रास्फीति में धीमी वृद्धि ने कुछ हद तक राहत प्रदान की।
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