अर्थतंत्र की खबरें: क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल, डीजल के दाम? और पश्चिम एशिया में तनाव से शेयर बाजार में गिरावट

पेट्रोलियम मंत्रालय ने विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25-28 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने का दावा करने वाली खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25-28 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाने का दावा करने वाली खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक संवाददाता सम्मेलन में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि कच्चे तेल और एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत अस्थिर रही हैं। फिर भी सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

उन्होंने बताया कि कच्चा तेल पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल था और इस महीने औसतन 113 डॉलर से अधिक रहा। ''भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं और सरकार का प्रयास कीमतों को स्थिर रखने का रहा है।''

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी, ‘‘कुछ खबरों में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की बात कही जा रही है। स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’

पश्चिम एशिया में तनाव से शेयर बाजार में गिरावट जारी, सेंसेक्स 852 अंक टूटा

स्थानीय शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंक लुढ़क गया जबकि एनएसई निफ्टी 205 अंक नुकसान में रहा। अमेरिकी-ईरान वार्ता रुकने के कारण कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से बाजार में गिरावट आई।

कारोबारियों के अनुसार विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी के साथ ही एशियाई और यूरोपीय बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

तीस शेयर वाला बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंक यानी 1.09 प्रतिशत टूटकर 77,664 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 942.31 अंक यानी 1.20 प्रतिशत फिसलकर 77,574.18 पर आ गया था।

दूसरी ओर 50 शेयर पर आधारित एनएसई निफ्टी 205.05 अंक यानी 0.84 प्रतिशत गिरकर 24,173.05 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के शेयर में ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस और एचडीएफसी बैंक में उल्लेखनीय गिरावट हुई।

दूसरी ओर अदाणी पोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, सन फार्मा, भारती एयरटेल और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लाभ में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.89 प्रतिशत बढ़कर 103.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

लाइवलॉन्ग वेल्थ के शोध विश्लेषक और संस्थापक हरिप्रसाद ने कहा, ''भारतीय बाजारों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा, निफ्टी में लगातार दूसरे दिन नरमी देखी गई। पिछले दो कारोबारी दिनों में इसमें 400 अंक से अधिक की गिरावट आई। बाजार का मिजाज जोखिम से बचने का है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है और घरेलू कारक राहत देने में विफल रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि आज की गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव का तेजी से बढ़ना है।


रुपया 33 पैसे टूटकर 94.11 प्रति डॉलर पर

रुपये में बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन गिरावट आई और यह 33 पैसे टूटकर 94.11 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। रुपया एक महीने में दूसरी बार 94 के स्तर से नीचे आया। पश्चिम एशिया में शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से घरेलू मुद्रा दबाव में है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और अमेरिकी मुद्रा की वैश्विक मांग में वृद्धि के बीच विदेशी पूंजी की निकासी के कारण भी रुपये पर दबाव बना रहा। पिछले एक सप्ताह में रुपया एक प्रतिशत से अधिक टूटा है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.03 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 94.17 के निचले स्तर तक पहुंचा। बाद में दिन के उच्च स्तर 93.98 को छूने के बाद यह 94.11 (अस्थायी) पर रहा जो पिछले बंद भाव से 33 पैसे की गिरावट है।

रुपया बुधवार को 34 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.78 पर बंद हुआ था। पिछले चार सत्र में घरेलू मुद्रा 17 अप्रैल को 92.91 के बंद भाव के मुकाबले 120 पैसे यानी लगभग 1.3 प्रतिशत टूटी है।

पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बीच घरेलू मुद्रा 23 मार्च को पहली बार 94 डॉलर प्रति डॉलर के स्तर से नीचे पहुंची थी। रुपया 30 मार्च को कारोबार के दौरान अपने अब तक के सबसे निचले 95.22 तक लुढ़क गया था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि घरेलू बाजारों में कमजोरी एवं डॉलर की मजबूती से रुपये में लगातार चौथे सत्र में गिरावट आई और 94 के स्तर को पार कर गया।

चौधरी ने कहा, ‘‘ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का भी रुपये पर दबाव रहा। अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार की धारणा प्रभावित हुई।’’ उन्होंने कहा कि डॉलर के रुपये का हाजिर भाव 93.80 से 94.50 रुपये के बीच रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.88 प्रतिशत चढ़कर 103.83 डॉलर प्रति बैरल रहा।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकी, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ईरान द्वारा दो जहाजों को जब्त करने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही ठप्प हो गई है, जिनमें एक गुजरात के कांडला बंदरगाह जा रहा था। इससे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा निर्यात इसी रास्ते से गुजरते हैं।

इसका असर गुरुवार को तेल की कीमतों पर दिखा, जहां ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।

भारत अपनी एलपीजी का बड़ा हिस्सा और करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल फारस की खाड़ी से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से इस पर असर पड़ा है। हालांकि, सरकार आयात के स्रोतों में विविधता ला रही है और एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ा रही है। कुछ उपभोक्ता अब प्राकृतिक गैस, कोयला और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे विकल्पों की ओर भी बढ़ रहे हैं।

अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्धविराम के उल्लंघन के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना 'संभव नहीं' है।

उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर कहा कि इन उल्लंघनों में ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और इजरायल की आक्रामक गतिविधियां शामिल हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन समझौतों का उल्लंघन, नाकेबंदी और धमकियां असली बातचीत में बाधा हैं।

इस बीच, भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर 'देश गरिमा' बुधवार को सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गया। यह जहाज 97,000 मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल और 31 भारतीय क्रू मेंबर के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य पार करके आया, जिसे भारतीय नौसेना ने सुरक्षा दी। सरकार ने यह भी साफ किया कि 'इंडियन सनमार हेराल्ड' जहाज के कप्तान द्वारा कोई टोल चुकाने की खबर गलत है।

मध्य पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपए प्रति लीटर घटा दिया है, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। देश भर में पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

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