अर्थजगत की खबरें: स्पाइसजेट पर साइबर हमले की कोशिश, अडानी पोर्ट्स के शुद्ध लाभ में 22 फीसदी की गिरावट आई

बैंकिंग और वित्त समूहों को छोड़ अन्य सभी समूहों में हुई जबरदस्त बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट में बंद हुए। केंद्र ने दावा किया कि है चीनी उत्पादन के मामले में अब देश पहले स्थान पर पहुंच गया है जबकि निर्यात के मामले में भारत दूसरे पायदान पर है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

स्पाइसजेट पर साइबर हमले की कोशिश, कुछ देर के लिए बाधित हुई सेवायें

निजी विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने बुधवार को रैनसमवेयर हमले की सूचना दी और बताया कि साइबर हमले की कोशिश किये जाने की वजह से सुबह की उड़ानें प्रभावित रहीं। किफायती विमान सेवा प्रदाता कंपनी ने ट्वीट करके बताया कि स्पाइस जेट के कुछ सिस्टम पर गत रात रैनसनवेयर हमला करने की कोशिश की गई थी। इसकी वजह से सुबह की उड़ानें प्रभावित रहीं। आईटी टीम ने इस हमले के निष्फल कर दिया है और अब सेवाएं सामान्य रूप से बहाल हो गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कई विमान यात्रियों ने बताया कि वे काफी देर तक एयरपोर्ट पर या विमान के अंदर फंसे रहे और एयरलाइन की ओर से उन्हें कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था। स्पाइस जेट के बेड़े में 91 विमान हैं।

अडानी पोर्ट्स के शुद्ध लाभ में 22 फीसदी की गिरावट

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड का शुद्ध लाभ गत वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 21.78 प्रतिशत यानी 287.67 करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 1,033.02 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी द्वारा मंगलवार को जारी वित्तीय परिणाम के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2021 को समाप्त तिमाही में उसने 1,320.69 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था।

कंपनी की कुल आमदनी हालांकि, आलोच्य तिमाही में 4,072.42 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,417.87 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी का कुल व्यय 31 मार्च 2021 को समाप्त तिमाही के 2,526.91 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2022 को समाप्त तिमाही में 3,309.99 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने बताया कि गत वित्त वर्ष उसने कुल 4,795.24 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था जबकि वित्त वर्ष 21 में उसने 5,048.74 करोड़ रुपये कमाये थे।

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बेतहाशा गर्मी ने बढ़ाई भारत में बिजली की मांग

अंतराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एसएंडपी का कहना है कि सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने के कारण भारत में 1-17 मई के दौरान बिजली मांग उम्मीद से अधिक बढ़कर करीब 196 गीगावाट हो गई। एसएंडपी ने कहा कि महीने के शुरूआती दो हफ्तों के दौरान तापमान वार्षिक आधार पर दो डिग्री अधिक दर्ज किया गया। दिल्ली जैसे कुछ इलाकों में इस दौरान तापमान चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अप्रैल की तरह मौसम की मार मई में भी रही। अप्रैल में तापमान के बढ़ने के कारण बिजली की मांग सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर औसतन 194 गीगावाट पहुंच गई थी।

एसएंडपी ने आगे मौसम के सामान्य रहने का अनुमान जताया जिससे बिजली मांग मई से सितंबर के बीच औसतन 182 गीगावाट रह सकती है। यह वार्षिक आधार पर 10 गीगावाट की बढ़ोतरी है। मई 2021 में कई सप्ताह तक लॉकडाउन रहा था, जिससे बिजली की मांग सीमित रही थी। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत मानसून सीजन से पहले अप्रैल-मई में 11 से 13 मिलियन मीट्रिक टन कोयले का आयात कर सकता है। इस साल गर्मी के मौसम में कोयले का आयात सितंबर तक प्रतिमाह औसतन 14 मिलियन टन रह सकता है।

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शेयर बाजार में तीसरे दिन भी जारी रहा गिरावट का सिलसिला

बैंकिंग और वित्त समूहों को छोड़कर अन्य सभी समूहों में हुई जबरदस्त बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट से उबरने में नाकाम रहे। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 303.35 अंक यानी 0.56 प्रतिशत फिसलकर 53,749.26 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 91.25 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट में 16,033.90 अंक पर बंद हुआ।

बुधवार को शेयर बाजार में शुरूआती कारोबार में लिवाली देखी गई जिससे शेयर बाजार हरे निशान में लौट आया लेकिन दोपहर से शुरू हुई बिकवाली कारोबार समाप्ति तक जारी रही, जिससे यह लाल निशान में बंद हुआ। बीएसई में बैंकिंग और वित्त के अलावा शेष सभी 18 समूहों के सूचकांक गिरावट में रहे। सर्वाधिक बिकवाली आईटी और रियल्टी समूह को झेलनी पड़ी। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि विदेशी बाजारों से मिलेजुले संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी रहा। निवेशक इस बात को लेकर आशंकित है कि अमेरिका की सख्त मौद्रिक नीति वहां आर्थिक सुस्ती ला सकती है। निफ्टी में सर्वाधिक गिरावट आईटी, मीडिया, दवा, पीएसयू बैंक और रियल्टी क्षेत्र में रही।

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भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा बड़ा निर्यातक बना

केंद्र सरकार ने बुधवार को दावा किया कि चीनी उत्पादन के मामले में अब देश पहले स्थान पर पहुंच गया है जबकि निर्यात के मामले में भारत दूसरे पायदान पर है। खाद्य एवं जनवितरण विभाग के संयुक्त सचिव सुबोध सिंह ने मीडिया को बताया कि साल 2022-23 में भारत ने ब्राजील से भी अधिक चीनी का उत्पादन किया है।

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उन्होंने कहा कि 2018-19 में इथेनॉल उत्पादन के लिए तीन लाख मीट्रिक टन चीनी के उपयोग के अलावा 332 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था, 2019-20 में नौ लाख मीट्रिक टन इथेनॉल उत्पादन के लिए रखे जाने के बाद 274 लाख मीट्रिक टन चीनी, 2020-21 में इथेनॉल उत्पादन के लिए 22 लाख मीट्रिक टन चीनी रखे जाने के बाद 310 लाख मीट्रिक टन चीनी तथा 2021-22 में 35 लाख मीट्रिक टन इथेनॉल उत्पादन के लिए रखे जाने के बाद 335 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

चीनी उत्पादन के साथ-साथ चीनी का निर्यात भी बढ़ रहा है। चीनी सत्र 2017-18 में 6.2 लाख मीट्रिक टन, चीनी सत्र 2018-19 में 38 लाख मीट्रिक टन तथा चीनी सत्र 2019-20 में 59.60 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात किया गया था।

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Published: 25 May 2022, 7:32 PM