अर्थजगत की खबरें: कोयला संकट से हो सकती है बिजली की किल्लत, शुरूआती तेजी खोकर गिरावट में बंद हुआ शेयर बाजार

नागर विमानन महानिदेशालय ने निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी स्पाइस जेट के 90 पायलटों के बोइंग 737 मैक्स विमान उड़ाने पर रोक लगा दी है। भारतीय स्टेट बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में किरासन तेल और जलावन की लकड़ी का इस्तेमाल बढ़ गया है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

कोयला संकट से गर्मी में हो सकती है बिजली किल्लत

बिजली संयंत्रों को गर्मी में बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त मात्रा में कोयले की आपूर्ति न होने से देश के कई राज्यों को बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। एसएंडपी के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कोयले की कीमतों में तेजी बनी हुई है। इसके कारण आपूर्ति संकट भी गहरा गया है। आपूर्ति बाधा और कीमतों में तेजी के बीच यूरोप में कोयले की मांग बढ़ गयी है, जिससे कोयले का आयात महंगा हो गया है।

एसएंडपी का कहना है कि अप्रैल में कोयले का भंडार अक्टूबर 2021 के कोयला आपूर्ति संकट के समान होता जा रहा है, जब देश के 115 बिजली संयंत्रों का कोयला भंडार आपात स्तर से कम हो गया था। महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड ने गत 31 मार्च को नोटिस जारी किया था कि राज्य में कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में अस्थायी रूप से कटौती की जायेगी। इसी तरह मध्यप्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा और झारखंड में भी आपूर्ति संकट देखा गया।

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शुरूआती तेजी को खोकर गिरावट में बंद हुआ शेयर बाजार

विदेशी बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच वाहन, वित्त एवं बैंकिग समूहों में हुई बिकवाली के कारण बुधवार को घरेलू शेयर बाजार शुरूआती तेजी को खोते हुये गिरावट में बंद हुये। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 237 अंक यानी 0.4 प्रतिशत लुढ़ककर 58,339 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 55 अंक यानी 0.3 प्रतिशत फिसलकर 17,476 अंक पर बंद हुआ।

अमेरिकी बांड यील्ड के कमजोर पड़ने से शुरूआती बाजार में निवेशकों का रूझान शेयर बाजार में बढ़ा, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में रही तेजी और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बढ़े भू-राजनीतिक विवाद ने निवेशकों के सारे मंसूबों पर पानी फेरने का काम किया। बीएसई के वाहन, बैंकिंग, सीडी, रिएल्टी, टेक, आईटी, सीडीजीएस, वित्त, दूरसंचार समूहों के सूचकांक लाल निशान में रहे। दिग्गज कंपनियों की तरह मंझोली कंपनियों पर भी बिकवाली हावी रही, जबकि छोटी कंपनियों पर निवेशक मेहरबान रहे।

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93 फीसद भारतीय कंपनियों को नहीं है साइबर सुरक्षा की पूरी जानकारी

रैंसमवेयर के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह कर्मचारियों के बीच साइबर सुरक्षा की जानकारी का अभाव है। आपको बता दें कि रैंसमवेयर एक वायरस से भरा सॉफ्टवेयर है, जो डेटा या कंप्यूटर सिस्टम को हानि पहुंचाता है। आपके डेटा पर घात लगाए बैठे साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल कर सारी जानकारी हासिल कर लेते हैं। इससे डेटा हमेशा के लिए चला जाता है।

हैरान करने वाली बात यह है कि 93 फीसदी भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी ही नहीं हैं। यूके स्थित साइबर सुरक्षा फर्म सोफोस ने पिछले 12 महीनों में एशिया प्रशांत और जापान के संगठनों में साइबर सुरक्षा व्यय और स्व-मूल्यांकन परिपक्वता को समझने के लिए एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है।

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DGCA ने स्पाइस जेट के 90 पायलट को बोइंग 737 मैक्स उड़ाने से रोका

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी स्पाइस जेट के 90 पायलटों के बोइंग 737 मैक्स विमान उड़ाने पर रोक लगा दी है। हालांकि, ये पायलट अन्य विमानों को उड़ा सकते हैं। डीजीसीए के महानिदेशक अरूण कुमार ने कहा कि फिलहाल ये पायलट बोइंग 737 मैक्स को नहीं उड़ा सकते हैं। इन्हें यह विमान उड़ाने के लिये पहले दोबारा प्रशिक्षण लेना होगा।

उन्होंने कहा कि जो भी इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में स्पाइस जेट के 650 पायलट बोइंग 737 मैक्स विमान का संचालन करने के लिए प्रशिक्षित हैं। इसी वजह से डीजीसीए के नए आदेश से विमान परिचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। स्पाइस जेट देश की एकमात्र ऐसी विमानन कंपनी है, जिसके पास बोइंग 737 मैक्स विमान है। कंपनी के पास 11 ऐसे विमान हैं और इनके संचालन के लिए कंपनी को करीब 144 पायलट की जरूरत होती है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में फिर बढ़ी किरासन और जलावन की लकड़ियों की मांग

गत साल अक्टूबर से ही महंगाई में पेट्रोल और डीजल का योगदान घटता जा रहा है लेकिन साथ ही एक और बात सामने आयी है कि खुदरा महंगाई दर में किरासन तेल और जलावन की लकड़ी की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। भारतीय स्टेट बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब किरासन तेल और जलावन की लकड़ी का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं।

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एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकर सौम्य कांति घोष ने कहा कि ऐसा लगता है कि ओमीक्रॉन की नयी लहर के आने से पहले से ही ईंधन की खपत घट गयी और लोगों का रूझान किरासन तेल और लकड़ी जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर चला गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह चलन और जोर पकड़ सकता है। यह ग्रामीण मांग के लिये अच्छा नहीं है।

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Published: 13 Apr 2022, 7:51 PM