अर्थतंत्र की खबरे: कच्चा तेल हुआ सस्ता, शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन रौनक और सोना-चांदी धड़ाम

कच्चे तेल के दाम में नरमी और वैश्विक बाजारों में तेजी के साथ निवेशकों की धारणा मजबूत होने से वाहन, विमानन और बैंक शेयरों में लिवाली से बीएसई सेंसक्स 109 अंक चढ़ गया जबकि एनएसई निफ्टी 34 अंक के लाभ में रहा।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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 शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रही और दोनों मानक सूचकांक लाभ में रहे। कच्चे तेल के दाम में नरमी और वैश्विक बाजारों में तेजी के साथ निवेशकों की धारणा मजबूत होने से वाहन, विमानन और बैंक शेयरों में लिवाली से बीएसई सेंसक्स 109 अंक चढ़ गया जबकि एनएसई निफ्टी 34 अंक के लाभ में रहा।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 109.25 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100.47 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में 19 में गिरावट आई और 11 लाभ में रहे।

सूचकांक बढ़त के साथ खुला और एक समय 811.96 अंक यानी एक प्रतिशत और चढ़कर दिन के उच्चतम स्तर 77,803.18 अंक पर पहुंच गया था। हालांकि, कारोबार के दूसरे सत्र में सूचना प्रौद्योगिकी और धातु शेयरों में मुनाफावसूली से कारण इसकी बढ़त सिमट गई।

पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 34.35 अंक यानी 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सूचकांक ऊंचे में 24,261.60 अंक तक गया और नीचे में 24,039 अंक तक आया।

सेंसेक्स के शेयरों में इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में सबसे अधिक 4.82 प्रतिशत की तेजी आई। इसके अलावा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी प्रमुख रूप से लाभ में रहे।

दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में पावर ग्रिड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और भारती एयरटेल शामिल हैं।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘घरेलू बाजार कारोबार के अंत में लगभग स्थिर रहा। कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त मुनाफावसूली के कारण कायम नहीं रह पायी। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने रुपये को सहारा दिया और कुछ राहत दी। लेकिन यह तेजी को बनाये रखने के लिए पर्याप्त नहीं था।’’

कमजोर वैस्श्विक संकेतों के बीच सोना 2,800 रुपये टूटा, चांदी 5,000 रुपये कमजोर

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को बाज़ार की कमजोर मांग और सुस्त वैश्विक रुख के कारण सोने की कीमत 2,800 रुपये घटकर 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। वहीं चांदी की कीमत भी 5,000 रुपये घट गई।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,800 रुपये घटकर 1,45,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई, जो पहले 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।

चांदी की कीमत में भी गिरावट आई और यह 5,000 रुपये घटकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। पिछले सत्र में चांदी 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 21.15 डॉलर या 0.53 प्रतिशत घटकर 3,978.06 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी भी 0.56 प्रतिशत घटकर 57.10 डॉलर प्रति औंस रह गई।


रुपया 16 पैसे मजबूत होकर 94.39 प्रति डॉलर पर

रुपया बृहस्पतिवार को 16 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.39 (अस्थायी) पर रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट से घरेलू मुद्रा को बल मिला।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, डॉलर की कमजोरी और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख ने भी रुपये को समर्थन दिया। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.30 पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले यह 94.13 से 94.56 के दायरे में रहा। अंत में यह 94.39 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव की तुलना में 16 पैसे अधिक है।

रुपया बुधवार को 21 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.55 पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान में शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘जिंस कीमतों में गिरावट और अमेरिकी डॉलर में नरमी से रुपये में मजबूती आई। कच्चे तेल की कीमतों के घटने और घरेलू बाजारों में सकारात्मक रुझान ने भी रुपये को समर्थन दिया।”

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और डॉलर की समग्र मजबूती के कारण रुपये में कमजोर रुझान रहने की उम्मीद है। हालांकि, जिंस कीमतों में नरमी और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताओं में कमी से निचले स्तर पर रुपये को समर्थन मिल सकता है।’’

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.57 पर रहा।

सोने और चांदी में गिरावट का असर: गोल्ड ईटीएफ 2 प्रतिशत और सिल्वर ईटीएफ करीब 4 प्रतिशत लुढ़का

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर गुरुवार को गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) और सिल्वर ईटीएफ पर देखने को मिला और इनमें करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट आई।

एनएसई डेटा के अनुसार, दिन के दौरान निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (सिल्वर बीईईएस) 3.99 प्रतिशत गिरकर 202.58 रुपए, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ 3.93 प्रतिशत घटकर 208.26 रुपए, एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ 4 प्रतिशत घटकर 200.39 रुपए और टाटा सिल्वर ईटीएफ 3.92 प्रतिशत घटकर 20 रुपए पर पहुंच गया।

सोने से जुड़े ईटीएफ में भी गिरावट देखने को मिली है। निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ (गोल्डबीईईएस) 2.21 प्रतिशत घटकर 114.55 रुपए, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ 2.76 प्रतिशत घटकर 117.95 रुपए, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ 2.8 प्रतिशत घटकर 118.17 रुपए और एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ 2.64 प्रतिशत घटकर 117.75 रुपए पर पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त, सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखी जा रही है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 2,156 रुपए कम होकर 1,40,022 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो कि पहले 1,42,178 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,235 रुपए प्रति 10 ग्राम से घटकर 1,28,260 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,05,017 रुपए प्रति 10 ग्राम गई है, जो कि पहले 1,06,634 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।


होर्मुज़ के खुलने से जोखिम कम, पर आपूर्ति की लागत अधिक होगी: एसएंडपी

होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम कम हुआ है, लेकिन आपूर्ति असंतुलित और महंगी होगी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसमें 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने की प्रतिबद्धता जतायी गयी है। समझौता ज्ञापन में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने का भी जिक्र है।

एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच एमओयू सकारात्मक है, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, क्षेत्रीय सुरक्षा और इजराइल की सुरक्षा चिंता जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।

‘होर्मुज खुला, लेकिन नाजुक हालात बरकरार’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘पोत परिवहन, बीमा, बंदरगाह और परिचालन संबंधी बाधाएं भी संघर्ष से पहले की स्थिति में लौटने में देरी कर सकती हैं।’’

एसएंडपी ने 2026 बची हुई अवधि के लिए ब्रेंट की कीमत का अनुमान औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल बनाए रखा है। इसके 2027 में कम होकर 80 डॉलर प्रति बैरल और 2028 में 65 डॉलर प्रति बैरल पर रहने की संभावना जतायी गयी है।