अर्थतंत्र की खबरें: पश्चिम एशिया तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें उच्चतम स्तर पर और जानें सोना, चांदी के दाम
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को तेज उछाल देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में संभावित सैन्य हमले की चेतावनी देने के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 8 प्रतिशत बढ़कर 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
सप्ताह के दौरान यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी भी देखने को मिल रही है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
इस हफ्ते दिए गए अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर 'बेहद कड़ा प्रहार' कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और करेंसी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी।
कीमती धातुओं की बात करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं।इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे।
वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्कों - सेंसेक्स और निफ्टी - में कमजोरी रही।
'गुड फ्राइडे' के अवसर पर शुक्रवार को शेयर बाजार में छुट्टी, इक्विटी से लेकर कमोडिटी तक सभी में कारोबार बंद
आज शुक्रवार यानी 3 अप्रैल 2026 को गुड फ्राइडे के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग गतिविधि नहीं होगी। बाजार में यह अप्रैल महीने की पहली और इस सप्ताह की दूसरी छुट्टी है। इससे पहले 31 मार्च को महावीर जयंती के कारण भी बाजार बंद रहा था।
स्टॉक एक्सचेंज के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, शुक्रवार को इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, एनडीएस-आरएसटी और ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट के साथ-साथ कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) सेगमेंट में भी ट्रेडिंग पूरी तरह बंद रहेगी।
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि अब बाजार सोमवार यानी 6 अप्रैल से फिर से सामान्य रूप से खुलेगा और सभी ट्रेडिंग गतिविधियां शुरू हो जाएंगी, क्योंकि 4 और 5 अप्रैल को शनिवार और रविवार पड़ने के कारण बाजार में साप्ताहिक अवकाश रहेगा।
वैश्विक स्तर पर भी गुड फ्राइडे के कारण प्रमुख बाजारों में छुट्टी रहेगी। अमेरिका सहित कई एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजार शक्रवार को बंद रहेंगे, जिससे वैश्विक ट्रेडिंग पर भी असर देखने को मिलेगा।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो देश का प्रमुख एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) भी आज पूरी तरह बंद रहेगा। इसमें सुबह और शाम दोनों सत्रों में ट्रेडिंग नहीं होगी, जिसके चलते सोना, चांदी, कच्चा तेल, तांबा और अन्य धातुओं में कोई कारोबार नहीं होगा।
शेयर बाजार में अप्रैल महीने में कुल दो हॉलिडे हैं। आज गुड फ्राइडे के बाद अगली छुट्टी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के मौके पर होगी।
साल 2026 में कुल 20 स्टॉक मार्केट छुट्टियां निर्धारित हैं, जिनमें से 4 वीकेंड पर पड़ती हैं। यानी नियमित कारोबारी दिनों में बाजार कुल 16 दिन बंद रहेगा, जिनमें से अब तक 5 छुट्टियां हो चुकी हैं।
दिल्ली में सोना, चांदी की कीमतें रहीं अपरिवर्तित
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को जौहरियों और खुदरा विक्रेताओं की ओर से मांग कम रहने से चांदी और सोने की कीमतें स्थिर रहीं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी।
चांदी की कीमत 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों समेत) पर अपरिवर्तित रही। इसी तरह 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों समेत) पर स्थिर बनी रही।
सर्राफा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू कीमतें एक सीमित दायरे में ही रहीं, क्योंकि वैश्विक बाजारों से कोई नया संकेत नहीं मिला। वैश्विक बाजार 'गुड फ्राइडे' के अवसर पर बंद थे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जौहरियों और खुदरा विक्रेताओं की ओर से मांग कम होने के कारण भी कीमतें स्थिर रहीं।
बाजार के प्रतिभागी अब सर्राफा की कीमतों में आगे की दिशा जानने के लिए विदेशी बाजारों के फिर से खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर रहने पर खुदरा महंगाई छह प्रतिशत से अधिक होने के आसार: एचएसबीसी
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने पर खुदरा महंगाई दर छह प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तय दायरे की ऊपरी सीमा है और इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। विदेशी ब्रोकरेज एचएसबीसी ने यह अनुमान जताया है।
एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने एक रिपोर्ट में अपने विश्लेषण के आधार पर कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों का औसत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर छह प्रतिशत से नीचे बनी रह सकती है।
अर्थशास्त्रियों ने कहा, ‘‘यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई दर छह प्रतिशत से अधिक हो सकती है और इससे ब्याज दरों में संभवतः बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।’’
अगले बुधवार को द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या आरबीआई डॉलर के मुकाबलो रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों के साधन का इस्तेमाल करेगा। इस रिपोर्ट में ऐसे कदम से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है।