अर्थतंत्र की खबरें: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के बीच सोना और चांदी धड़ाम और ईरान युद्ध से बढ़ी महंगाई की आशंका

कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के कारोबार में कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे मध्य पूर्व में तनाव के उच्च स्तर पर बने रहने के बावजूद एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों कई हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के बीच गुरुवार को कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के कारोबार में कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे मध्य पूर्व में तनाव के उच्च स्तर पर बने रहने के बावजूद एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों कई हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को 999 प्यूरिटी वाला गोल्ड 1,47,889 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर पहुंच गया, जबकि इससे पहले बुधवार को 999 प्यूरिटी वाले गोल्ड की कीमत 1,54,879 रुपए थी। यानी एक ही दिन में सोने का भाव 6,990 रुपए गिर गया।

वहीं, अगर चांदी की बात करें तो आईबीजेए के अनुसार, गुरुवार को 999 प्यूरिटी वाली चांदी का भाव 2,29,873 रुपए प्रति किलोग्राम रहा, जो बीते बुधवार को 2,49,907 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानी एक ही दिन में चांदी की कीमत 20,034 रुपए प्रति किलो कम हो गई।

ध्यान देने वाली बात है कि आईबीजेए के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में ही सोने का दाम 12,000 रुपए से ज्यादा गिर गया है, जबकि चांदी का भाव 38,000 रुपए से ज्यादा सस्ता हो गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी सोने और चांदी की कीमतों बड़ी गिरावट देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक (शाम करीब 6.36 बजे) अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 6.87 प्रतिशत यानी 10,509 रुपए गिरकर 1,42,516 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 11.94 प्रतिशत यानी 30,297 रुपए गिरकर 2,23,400 रुपए प्रति किलो पर ट्रेड करती नजर आई।

गुरुवार को 2 अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना 1,51,941 रुपए खुलने के बाद एक समय 1,52,449 रुपए के उच्चतम स्तर तो एक समय 1,41,121 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निम्नतम स्तर तक पहुंच गया, जो फरवरी की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है।

वहीं, 5 मई की डिलीवरी वाली चांदी 2,45,000 रुपए पर खुलने के बाद एक समय 2,45,674 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर तो एक समय 2,14,212 रुपए प्रति किलो के दिन के निम्नतम स्तर तक पहुंच गई थी।

ईरान युद्ध से बढ़ी महंगाई की आशंका, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने प्रमुख ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर कायम रखा

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल और गैस की कीमतों में हुई वृद्धि के मद्देनजर बैंक ऑफ इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।

करीब तीन सप्ताह पहले अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर बमबारी शुरू किए जाने के बाद इस निर्णय की व्यापक संभावना जताई जा रही थी। बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सभी नौ सदस्यों ने ऋण लागत में कोई बदलाव न करने के पक्ष में मतदान किया। 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने से पहले यह लगभग तय माना जा रहा था कि बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में कटौती करेगा, क्योंकि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के आने वाले महीनों में दो प्रतिशत के लक्ष्य तक नीचे आने की उम्मीद थी।

बैंक के गवर्नर एंड्रयू बेली ने बयान में कहा, ‘‘घटनाक्रम किस दिशा में मुड़ता है, इसका आकलन करने के लिए हमने ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। स्थितियां चाहे जो भी हों, हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि मुद्रास्फीति वापस अपने दो प्रतिशत के लक्ष्य पर आए।’’

ईरान युद्ध और इसके कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के बंद होने से वैश्विक आर्थिक अनुमानों और कीमतों पर गहरा असर पड़ा है।


ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल; ब्रेंट क्रूड 116.38 डॉलर

ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और कुवैत की दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया। कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस की आपूर्ति करती है।

इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 116.38 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी।

प्राकृतिक गैस की कीमतों के यूरोपीय टीटीएफ मानक में बृहस्पतिवार को 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ईरान के हमले में कतर के रास लफान टर्मिनल को निशाना बनाया गया, जहां से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति की जाती है। कतर आम तौर पर वैश्विक एलएनजी खपत का करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति करता है जिसे जहाजों के जरिये भेजा जाता है। ड्रोन हमले के बाद यह सुविधा बंद हो गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य के अधिकतर टैंकर यातायात के लिए बंद होने से गैस की आपूर्ति के लिए कोई अन्य मार्ग नहीं बचा है।

ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर किए गए हमलों से उत्पन्न व्यवधान यदि लंबे समय तक तेल और गैस की कीमतों को ऊंचा बनाए रखते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम साबित होगा।

अमेरिका के कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार सुबह 1.1 प्रतिशत बढ़कर 96.45 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी प्राकृतिक गैस के मानक हेनरी हब वायदा अनुबंध में 5.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।