अर्थतंत्र की खबरें: मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत तक गिरावट और शेयर बाजार में रौनक लौटी

सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करने और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करने और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना।

एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव (5 जून) 0.50 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 1,52,419 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया, जबकि दिन के दौरान सोने ने दिन के दौरान 1,52,990 रुपए का उच्च स्तर भी छुआ। हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12 बजे) यह 849 रुपए यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,52,585 रुपए पर ट्रेड कर रहा था।

वहीं, चांदी (5 मई वायदा) करीब 0.80 प्रतिशत गिरकर 2,41,510 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई, जबकि एक समय यह 2,43,704 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी। हालांकि खबर लिखे जाने तक चांदी 2,333 रुपए यानी 0.96 प्रतिशत गिरकर 2,41,435 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

विश्लेषकों के अनुसार, एमसीएक्स गोल्ड फिलहाल 1,52,500 रुपए के आसपास बना हुआ है और निचले स्तरों पर खरीदारी भी देखी जा रही है, लेकिन तेजी का मजबूत संकेत अभी नहीं मिला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर कीमत 1,53,000 रुपए के ऊपर टिकती है, तो यह 1,55,000 रुपए तक जा सकती है।

वहीं अगर कीमत 1,52,000 रुपए से नीचे जाती है तो यह 1,50,000 से 1,48,000 रुपए तक गिर सकती है। फिलहाल रुख थोड़ा सकारात्मक है, लेकिन मजबूत तेजी के लिए ब्रेकआउट जरूरी है।

चांदी की बात करें तो यह 2,42,000 रुपए के आसपास बनी हुई है, जिसे सेफ-हेवन डिमांड और इंडस्ट्रियल मांग का सपोर्ट मिल रहा है।

वैश्विक संघर्षों के चलते मार्च में गोल्ड ईटीएफ निवेश में आई गिरावट

एम्फी यानी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में मार्च के दौरान निवेश में भारी गिरावट देखने को मिली और गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जो फरवरी के मुकाबले आधे से भी कम है।

फरवरी में निवेशकों ने इन फंड्स में 5,255 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया था, जिससे यह गिरावट काफी अहम मानी जा रही है।

इस गिरावट की मुख्य वजह भू-राजनीतिक अनिश्चितता रही, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया।

गोल्ड ईटीएफ, जो सोने की कीमत को ट्रैक करते हैं, निवेश का एक आसान और टैक्स-एफिशिएंट विकल्प माने जाते हैं। इनमें निवेश करने पर फिजिकल गोल्ड रखने की जरूरत नहीं होती, जिससे सुरक्षा और स्टोरेज की चिंता खत्म हो जाती है।

फिलहाल भारत में ऐसे 25 गोल्ड ईटीएफ स्कीम्स निवेशकों के लिए उपलब्ध हैं। निवेश में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

घरेलू बाजार में मार्च के दौरान सोने की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जो उसी अवधि में बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स में आई गिरावट के समान रही।

कीमतों में इस गिरावट से निवेशकों की रुचि कम हुई है, जबकि आमतौर पर अनिश्चितता के समय सोना एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) माना जाता है।


आरबीआई की समयसीमा से पहले डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत

शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 10 पैसे की बढ़त के साथ खुला। यह मजबूती भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों को अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन खत्म (अनवाइंड) करने की डेडलाइन के नजदीक आने के कारण देखी गई। साथ ही, व्यापारी अमेरिका-ईरान सीजफायर को लेकर अनिश्चितता के बीच बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.57 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि पिछला बंद स्तर 92.66 था।

10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन खत्म करने की आखिरी तारीख है।

इससे पहले मार्च में आरबीआई ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर कारोबारी दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि कई बैंकों ने समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बरकरार रखा, जिससे बैंकों को आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी पड़ी।

विश्लेषकों के अनुसार, जब तक आरबीआई के ओवरनाइट पोजीशन लिमिट पर स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि डेडलाइन के बाद रुपए में तेज गिरावट की आशंका शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही है।

इस बीच, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों और ट्रेडर्स के रडार पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.13 प्रतिशत अधिक है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 99.24 डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, इससे पहले कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से करीब 20 प्रतिशत तक नीचे आ गई थीं।

वित्तीय शेयरों में खरीदारी से बाजार में रौनक लौटी, सेंसेक्स 919 अंक उछला

वैश्विक बाजारों के सकारात्मक रुख के बीच घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को बैंकों में तगड़ी खरीदारी आने से बढ़कर बंद हुए। सेंसेक्स 918.60 अंक उछल गया जबकि निफ्टी में 275.50 अंक की बढ़त दर्ज की गई।

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट नरम पड़ने की संभावना, अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदें और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 918.60 अंक यानी 1.20 प्रतिशत चढ़कर 77,550.25 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 990.85 अंक उछलकर 77,622.50 के स्तर तक चला गया था।

वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 275.50 अंक यानी 1.16 प्रतिशत बढ़कर 24,050.60 अंक पर पहुंच गया।

सेंसेक्स के समूह में शामिल 30 कंपनियों में से एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंटरग्लोब एविएशन (यानी इंडिगो), एक्सिस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे।

दूसरी तरफ, सन फार्मा, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयरों में गिरावट का रुख रहा।

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।

यूरोपीय बाजार भी सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।

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