अर्थतंत्र की खबरें: फिर सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट और भारत में थोक महंगाई दर आई रिपोर्ट
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, और इसके पीछे का कारण अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव के चलते डॉलर की मजबूती रही।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को कीमती धातुओं यानी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, और इसके पीछे का कारण अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव के चलते डॉलर की मजबूती रही।
दिन के कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.50 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 1,54,125 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया, जो दिन का निम्नतम स्तर है। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 2,35,208 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (अपरह्न 2.47 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना 0.25 प्रतिशत यानी 395 रुपए गिरकर 1,55,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 1.39 प्रतिशत यानी 3,403 रुपए की गिरावट के साथ 2,40,957 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
जनवरी में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में आई नरमी के चलते डॉलर इंडेक्स 0.10 प्रतिशत बढ़कर 97 पर पहुंच गया। इससे पहले मजबूत रोजगार आंकड़ों से सूचकांक को मजबूती मिली थी, जो अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती का संकेत देते हैं। डॉलर मजबूत होने से डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने-चांदी अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है।
जनवरी में अमेरिकी सीपीआई में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दिसंबर में यह 0.3 प्रतिशत बढ़ा था। सालाना आधार पर महंगाई दर जनवरी में 2.4 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने के 2.7 प्रतिशत से कम है। मजबूत रोजगार आंकड़ों और संतुलित महंगाई दर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का अवसर मिल सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,54,000 और 1,53,150 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,56,800 और 1,58,200 रुपए पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए 2,38,800 और 2,32,000 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 2,49,100 और 2,55,000 रुपए पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश की तलाश के कारण कीमती धातुओं का लंबी अवधि का रुख अभी भी सकारात्मक है।
शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 650 अंक उछला
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ।
हालांकि बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ सपाट हुई थी, लेकिन बंद होने के समय बीएसई सेंसेक्स 650.39 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,277.15 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 211.65 (0.83 प्रतिशत) की उछाल के साथ 25,682.75 पर था। इस दौरान निफ्टी ऑटो को छोड़कर तकरीबन सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड करते हुए नजर आए।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप में 0.48 प्रतिशत तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप में 0.11 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।
सेक्टर वार देखें, तो सिर्फ निफ्टी ऑटो में 0.73 प्रतिशत और निफ्टी ग्रोसेक्ट 15 में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जबकि निफ्टी बैंक में 1.27 प्रतिशत की बढ़त, निफ्टी एफएमसीजी में 0.82 प्रतिशत की तेजी तो निफ्टी आईटी में 0.17 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।
इस दौरान, सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 9 शेयर ऐसे रहे जिसमें गिरावट देखी गई। पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईटीसी और एशियन पेंट्स के शेयरों में 4.45 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। वहीं, टेक महिंद्रा, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एम एंड एम और इंफोसिस के शेयरों में 1.44 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल मार्केट्स में मिले-जुले संकेतों के बीच सोमवार को घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों (सेंसेक्स और निफ्टी) ने कमजोर शुरुआत की। हालांकि, बाद में निवेशकों की खरीदारी से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं दिन के दूसरे हिस्से में बाजार ने रफ्तार पकड़ते हुए 600 अंकों की बढ़त दर्ज की और हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा।
भारत में थोक महंगाई दर जनवरी में 1.8 प्रतिशत रही
भारत में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जनवरी में सालाना आधार पर 1.81 प्रतिशत रही है। यह जानकारी सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री की ओर से दी गई।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि जनवरी में महंगाई बढ़ने की वजह बेसिक मेटल की कीमतों में इजाफा होना और मैन्युफैक्चरिंग एवं गैर-खाद्य उत्पादों, खाद्य वस्तुओं और टेक्सटाइल की कीमतों में बढ़ोतरी होना है।
खाद्य सूचकांक, जिसमें प्राथमिक वस्तुओं के समूह से 'खाद्य पदार्थ' और विनिर्मित उत्पादों के समूह से 'खाद्य उत्पाद' शामिल हैं, दिसंबर 2025 में 196.0 से घटकर जनवरी 2026 में 194.2 हो गया है। थोक महंगाई दर जनवरी में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में बढ़कर 1.41 प्रतिशत हो गई।
डब्ल्यूपीआई में विनिर्माण समूह का भार 64.23 प्रतिशत है, और इस सूचकांक में महीने के दौरान 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 22 विनिर्मित उत्पादों में से 19 समूहों की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जबकि तीन समूहों की कीमतों में कमी दर्ज की गई। जिन महत्वपूर्ण समूहों की कीमतों में महीने-दर-महीने वृद्धि हुई, उनमें बेसिक मेटल का निर्माण, खाद्य उत्पाद, वस्त्र, अन्य विनिर्माण और विद्युत उपकरण शामिल हैं।
जिन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, उनमें दवाइयों का निर्माण, औषधीय रसायन और वनस्पति उत्पाद, मशीनरी और उपकरण एवं फर्नीचर शामिल हैं, जिनकी कीमतें जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 की तुलना में कम हुई हैं।
भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही थी। बेस ईयर में बदलाव के बाद खुदरा महंगाई दर के यह पहले आंकड़े हैं। सरकार की ओर से बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है, जो कि पहले 2012 था। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी। हालांकि, यह पुराने बेस ईयर 2012 पर आधारित थी।
एआई भारत के लिए बड़ा मौका, रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगा : इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स
एआई भारत के लिए बड़ा मौका है। अगर भारत को इसमें यूजर की जगह क्रिएटर की भूमिका निभानी है, तो एआई के माध्यम से ऐसे समाधानों को विकसित करना होगा, जिनकी दुनिया में आवश्यकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह जानकारी सोमवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कोरोवर एआई और भारतजीपीटी एआई के संस्थापक और सीईओ अंकुश सभरवाल ने कहा,"मौजूदा समय में जो भी ऐप्स आ रहे हैं उनमें एआई का उपयोग हो रहा है। आगे इसमें और बढ़ोतरी होगी। ऐसे हम सभी धीरे-धीरे एआई के यूजर बनेंगे। ऐसे में एआई भारत के लिए क्रिएटर बनने का बड़ा अवसर है, क्योंकि इससे सॉल्यूशंस बनाना आसान हो गया है, अब केवल इंजीनियर ही नहीं कोई व्यक्ति भी ऐप बना सकता है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।"
खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक संजय सेठी ने कहा कि यहां सभी संख्या में लोग एआई के प्रभावों को समझने आए हैं। कृषि क्षेत्र में एआई काफी बदलाव ला सकता है। यह मौसम को समझने, खेती के समय सही आवश्यकताओं का अनुमान लगाने और खाद्य श्रृंखला को छोटा करने में काफी मदद कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो से तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र पर एआई का प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा। इस एआई समिट में युवा भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
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