अर्थतंत्र की खबरें: सोने-चांदी की कीमत में फिर रिकॉर्ड उछाल और ट्रंप की ताजा चेतावनी से शेयर बाजार सतर्क
सोने की कीमतें फिर से 1.36 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.37 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गया है।

हफ्ते के पहले दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है, जिससे सोने की कीमतें फिर से 1.36 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.37 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गया है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम 1,386 रुपए बढ़कर 1,36,168 रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 1,34,782 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,24,730 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,23,460 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने का दाम 1,01,087 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,02,126 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है।
सोने के साथ चांदी की भी कीमतों में तेज इजाफा हुआ है। चांदी की कीमतें 2,513 रुपए बढ़कर 2,37,063 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 2,34,550 रुपए प्रति किलो थी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी सोने और चांदी की कीमतों में तेज इजाफा दर्ज किया गया था। सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 1.28 प्रतिशत बढ़कर 1,37,500 रुपए हो गया है। चांदी के 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 2.75 प्रतिशत बढ़कर 2,42,809 रुपए हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेज इजाफा देखने को मिला है। सोने का दाम 2.26 प्रतिशत बढ़कर 4,427.75 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 5.17 प्रतिशत बढ़कर 74.69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।
ट्रंप की ताजा चेतावनी से शेयर बाजार सतर्क, सेंसेक्स को 322 अंक का नुकसान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारतीय उत्पादों पर शुल्क और बढ़ाने की ताजा चेतावनी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 322 अंक के नुकसान में रहा जबकि निफ्टी में 78 अंक की गिरावट रही।
विश्लेषकों ने कहा कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद ट्रंप की ताजा चेतावनी से धारणा प्रभावित हुई और बैंकिंग, आईटी एवं रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव रहा।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 322.39 अंक यानी 0.38 प्रतिशत गिरकर 85,439.62 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 446.68 अंक फिसलकर 85,315.33 अंक के निचले स्तर पर आ गया था।
वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 26,373.20 अंक के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद बढ़त कायम नहीं रख सका और 78.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,250.30 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर प्रमुख रूप से गिरावट में रहे।
दूसरी तरफ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा स्टील और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार में मुनाफावसूली हावी हो गई, जिससे सूचकांक 26,200 के समर्थन स्तर के आसपास आ गया।
आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा, "अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और ट्रंप की ओर से भारत पर सीमा-शुल्क बढ़ाने की टिप्पणियों से निवेशकों की धारणा सतर्क बनी रही।"
अमेरिकी प्रशासन ने पिछले साल अगस्त में भारतीय उत्पादों पर शुल्क को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसमें से 25 प्रतिशत शुल्क रूसी तेल की खरीद जारी रखने पर जुर्माने के तौर पर लगाया गया था।
रुपया आठ पैसे की गिरावट के साथ 90.28 प्रति डॉलर पर
रुपये में सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह आठ पैसे टूटकर 90.28 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मजबूत अमेरिकी मुद्रा और घरेलू शेयर बाजारों में सुस्ती से रुपये पर दबाव पड़ा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद उत्पन्न हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने विश्व स्तर पर डॉलर की मांग को बढ़ावा दिया। हालांकि कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने भारतीय मुद्रा को निचले स्तर पर थोड़ा समर्थन दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, 90.21 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 90.50 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में डॉलर के मुकाबले 90.28 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से आठ पैसे की गिरावट है। रुपया शुक्रवार को 22 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.20 पर बंद हुआ था।
भारतीय मुद्रा में लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 30 दिसंबर 2025 को यह 89.75 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। तब से इसमें 53 पैसे की गिरावट आई है।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक (जिंस) अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोमवार को रुपये में गिरावट आई।
सुरक्षित निवेश की मांग के चलते अमेरिकी डॉलर सूचकांक मजबूत हुआ, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी और शुक्रवार को विदेशी पूंजी के प्रवाह ने रुपये को सहारा दिया।
चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की गिरती कीमतों से रुपये को निचले स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ केंद्रीय बैंक के किसी भी हस्तक्षेप से भी रुपये को मजबूती मिल सकती है...। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 90 से 90.60 के दायरे में रहने का अनुमान है।’’
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.39 पर रहा।
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