अर्थतंत्र की खबरें: कच्चे तेल में उछाल से सोना-चांदी लुढ़के और बजाज फिनसर्व करेगी ₹2,000 करोड़ का बड़ा निवेश

सोने का दाम 1.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,379 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि कॉमेक्स पर जून फ्यूचर्स के सोने का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,376 डॉलर पर था। सोने की अपेक्षा चांदी में अधिक गिरावट देखी गई।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर ताजा हमले के बाद वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ना और कच्चे तेल में फिर से तेजी आना है।

दोपहर 12 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर में सोने का दाम 1.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,379 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि कॉमेक्स पर जून फ्यूचर्स के सोने का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,376 डॉलर पर था।

सोने की अपेक्षा चांदी में अधिक गिरावट देखी गई। हाजिर में चांदी का दाम 2.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72.92 डॉलर प्रति औंस पर था। कॉमेक्स पर चांदी का जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72.93 डॉलर प्रति औंस पर था। भारतीय बाजार बकरीद ईद की छुट्टी के चलते बंद है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण निवेशकों के सतर्क रहने से सोने पर दबाव बना रहा।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच प्रमुख विवाद के मुद्दों में ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने और अपने परमाणु कार्यक्रम को संरक्षित करने की मांग शामिल है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन ईरान की इन दोनों मांगों को नहीं मानेगा।

जानकारों का मुताबिक, "ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो रही हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता, तेल की ऊंची कीमतें और डॉलर की मजबूती के कारण कीमती धातुओं की कीमतों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

बजाज फिनसर्व अगले पांच साल में एआई, प्रौद्योगिकी स्टार्टअप में 2,000 करोड़ रुपये तक निवेश करेगी

बजाज फिनसर्व अगले पांच साल में कृत्रिम मेधा (एआई) और प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप में 2,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

बजाज फिनसर्व ने ‘फिनसर्व इंटेलिजेंस’ नामक रणनीतिक पहल की शुरुआत के साथ यह घोषणा की।

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल अनुप्रयुक्त अनुसंधान और नवाचार पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य भारत में विकसित उच्च प्रौद्योगिकी, कम लागत और बड़े स्तर पर विस्तार योग्य समाधान तैयार करना है।

बयान में कहा गया, ‘‘बजाज फिनसर्व समूह की कंपनियां अगले पांच वर्षों में एआई, साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी, फिनटेक और उपभोक्ता प्रौद्योगिकी मंचों से जुड़े उच्च विस्तार क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरण की कंपनियों में 1,500-2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।’’

कंपनी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मुंबई के साथ संयुक्त अनुसंधान केंद्र स्थापित करने और एआई, साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा खुदरा कारोबार के भौतिक अनुभव को नए सिरे से विकसित करने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्ययोजना तय करने के लिए साझेदारी भी की है।

कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव बजाज ने कहा, ‘‘वित्तीय सेवाओं में अगले दशक का मूल्य सृजन उन्हीं के हाथ में होगा, जो उसे शक्ति देने वाली प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे।’’


एयर इंडिया ने तेल अवीव-दिल्ली मार्ग पर उड़ानों का निलंबन जुलाई तक बढ़ाया

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच एयर इंडिया ने तेल अवीव-नयी दिल्ली मार्ग पर उड़ानों की अस्थायी निलंबन अवधि को बढ़ाकर अब 31 जुलाई तक कर दिया है।

इससे पहले एयरलाइन ने इस मार्ग पर अपनी उड़ानें जून अंत तक निलंबित करने की घोषणा की थी, जिसे अब एक महीने और आगे बढ़ा दिया गया है।

एयर इंडिया के इजराइल संचालन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उड़ान कार्यक्रम में संशोधन की सूचना बुधवार शाम को जारी कर दी गई है।

उन्होंने कहा, “भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस मार्ग पर हमारी उड़ानें 31 जुलाई तक के लिए निलंबित कर दी गई हैं।”

पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत से जारी संघर्ष के बीच एयरलाइन कंपनियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें बढ़ते ईंधन खर्च, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और संचालन लागत में वृद्धि शामिल है। इसी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने तेल अवीव मार्ग पर सेवाएं सीमित या बंद कर दी हैं।

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