अर्थतंत्र की खबरें: सोने की रिकॉर्ड छलांग, सिल्वर की कीमतें 4 लाख के पार और शेयर बाजर में तेजी

सोना दोपहर 12:02 बजे 6.98 प्रतिशत यानी 11,575 रुपए बढ़कर 1,77,490 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,633 रुपए यानी 6.13 प्रतिशत चढ़कर 4,08,999 रुपए प्रति किलो हो गई।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद सुरक्षित निवेश की मांग पर व्यापक असर पड़ा है। इसके चलते गुरुवार को कीमती धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।

केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही खरीदारी और अमेरिकी डॉलर के और कमजोर होने से भी सोने-चांदी की कीमतों में तेजी आई है। इससे निवेशकों का भरोसा इन कीमती धातुओं पर और बढ़ा है।

एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना दोपहर 12:02 बजे 6.98 प्रतिशत यानी 11,575 रुपए बढ़कर 1,77,490 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,633 रुपए यानी 6.13 प्रतिशत चढ़कर 4,08,999 रुपए प्रति किलो हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। इस साल अब तक चांदी की कीमतों में 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसकी बड़ी वजह सप्लाई की कमी बताई जा रही है।

कीमती धातुओं में यह तेज उछाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें उसने ब्याज दरों को बिना बदले रखने का ऐलान किया। इससे निवेशकों को सोना-चांदी खरीदने का और प्रोत्साहन मिला।

खबरों के मुताबिक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। इसके बाद ट्रंप ने ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोबारा बातचीत शुरू करने का दबाव बनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने बातचीत से इनकार किया तो अमेरिका की कार्रवाई और ज्यादा सख्त हो सकती है।

अमेरिकी बाजार में अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव 300 डॉलर बढ़कर 5,588.71 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गए। इससे पहले सोना 5,626 डॉलर का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी छू चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहले 5,600 डॉलर के आसपास जो स्तर रुकावट माना जा रहा था, अब वही मजबूत सपोर्ट बन गया है। इससे साफ है कि सोने में तेजी का दौर मजबूत बना हुआ है।

आर्थिक सर्वेक्षण का असर, भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद; मेटल स्टॉक्स में हुई खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में लगातार तीसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 221.69 अंक या 0.27 प्रतिशत की तेजी के साथ 82,566.37 और निफ्टी 76.15 अंक या 0.30 प्रतिशत की मजबूती के साथ 25,418.90 पर था।

बाजार में तेजी की वजह आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर जारी किए गए सकारात्मक अनुमानों को माना जा रहा है।

शेयर बाजार को ऊपर खींचने का काम मेटल और एनर्जी शेयरों ने किया। निफ्टी मेटल 3.07 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 1.87 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 1.58 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.03 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.85 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.82 प्रतिशत और निफ्टी ऑयलएंडगैस 0.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.21 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.96 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 0.91 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 0.81 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.79 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 0.76 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूती देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 102.40 अंक या 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 58,541 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 34.05 अंक या 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,825 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, इटरनल, एनटीपीसी, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक , एसबीआई और बजाज फिनसर्व गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, इंडिगो, मारुति सुजुकी, बीईएल, एमएंडएम, टीसीएस, सन फार्मा, एचयूएल, ट्रेंट, टाइटन, आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट लूजर्स थे।

बाजार के जानकारों ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 27 में विकास का अनुमान मजबूत आने के कारण घरेलू बाजारों में तेजी देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण सोने और चांदी एवं की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के कारण एमसीएक्स पर सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 4 लाख रुपए प्रति किलो से अधिक हो गई है।


रुपये में तीन पैसे का मामूली सुधार, 91.96 प्रति डॉलर पर हुआ बंद

विदेशी कोषों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर होने के बीच, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 91.96 पर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब बंद हुआ। हालांकि, बुधवार के मुकाबले रुपये में तीन पैसे का मामूली सुधार है, पर यह अब के निम्नतम स्तर के आसपास जा पहुंचा है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 92 के अपने अब तक के सबसे निचले दिन के कारोबार के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भी रुपये पर दबाव पड़ा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया 91.95 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 91.82 के उच्चस्तर पर पहुंचा, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई और यह डॉलर के मुकाबले 92 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

कारोबार के अंत में रुपया 91.96 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की मामूली बढ़त को दर्शाता है।

बुधवार को, रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ बंद हुआ था, और डॉलर के मुकाबले 91.99 के अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर फिर से पहुंच गया। 23 जनवरी को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के अपने अब तक के सबसे दिन के कारोबार के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा पेश की, जिसमें बाहरी क्षेत्र से जोखिमों और विदेशी पूंजी निकासी पर चिंता जताई गई।

इस बीच, दुनिया की छह प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला, डॉलर इंडेक्स 0.07 प्रतिशत गिरकर 96.37 पर कारोबार कर रहा था।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 1.83 प्रतिशत गिरकर 69.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

चॉइस वेल्थ के शोध एवं उत्पाद प्रमुख, अक्षत गर्ग ने कहा, ‘‘लगातार डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी, और विदेशी कोषों की निकासी ने मिलकर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनाए रखा है, और रुपया भी इसका अपवाद नहीं है।’’

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