अर्थतंत्र की खबरें: सोने की चमक बढ़ी, चांदी का दाम फिर से नए ऑल-टाइम हाई पर और शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन टूटा

सोने की कीमत 1,36,660 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,43,150 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है, जो कि हाजिर बाजार में नया ऑल-टाइम हाई है।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को फिर से तेजी देखने को मिली, जिससे सोने की कीमत 1,36,660 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,43,150 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है, जो कि हाजिर बाजार में नया ऑल-टाइम हाई है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 492 रुपए बढ़कर 1,36,660 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो कि पहले 1,36,168 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,25,181 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो कि पहले 1,24,730 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। 18 कैरेट सोने की कीमत 1,02,126 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,02,495 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है।

सोने की अपेक्षा चांदी कीमतों में तेज उछला देखा गया है और कीमतें नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई हैं। चांदी की कीमत 6,087 रुपए बढ़कर 2,43,150 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 2,37,063 रुपए प्रति किलो थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,474.45 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 78.35 डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई है।

एमसीएक्स पर सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में 0.32 प्रतिशत और चांदी के 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में 1.63 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोने में सकारात्मक कारोबार हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कीमत 600 रुपए बढ़कर 1,38,700 रुपए पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4,475 डॉलर प्रति औंस पर है। दिन के दौरान उच्च स्तरों से मुनाफावसूली भी देखने को मिली।

प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से बाजार लगातार दूसरे दिन टूटा, सेंसेक्स 376 अंक कमजोर

वैश्विक स्तर पर तनाव और अमेरिकी शुल्क बढ़ने की चिंताओं के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज एवं एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन गिरकर बंद हुए। सेंसेक्स में 376 अंक की गिरावट रही जबकि निफ्टी करीब 72 अंक फिसल गया।

विश्लेषकों के मुताबिक, एशियाई बाजारों के मजबूत रुख के बावजूद भारत पर शुल्क बढ़ाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी से निवेशकों ने सतर्कता बरती।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 376.28 अंक यानी 0.44 प्रतिशत टूटकर 85,063.34 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 539.52 अंक तक लुढ़ककर 84,900.10 अंक पर आ गया था।

वहीं, एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी 71.60 अंक यानी 0.27 प्रतिशत गिरकर 26,178.70 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से टाटा समूह की कंपनी ट्रेंट के शेयर में 8.62 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर तिमाही में कंपनी की राजस्व वृद्धि के आंकड़े निवेशकों को उत्साहित करने में नाकाम रहे हैं।

वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 4.42 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एचडीएफसी बैंक भी नुकसान में रहे।


वाहनों की खुदरा बिक्री बीते वर्ष 7.7 प्रतिशत बढ़कर 2.81 करोड़ इकाई रहीः फाडा

देश में वर्ष 2025 के दौरान वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 7.71 प्रतिशत बढ़कर 2.81 करोड़ इकाई से अधिक हो गई। वाहन डीलरों के संगठन फाडा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) ने वर्ष 2025 के बिक्री आंकड़े जारी करते हुए कहा कि साल की सुस्त शुरुआत के बावजूद जीएसटी दरों में कटौती के बाद मांग में सुधार आया और बिक्री को मजबूती मिली।

फाडा के मुताबिक, वर्ष 2025 में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 9.7 प्रतिशत बढ़कर 44.75 लाख इकाई रही, जो एक साल पहले 40.79 लाख इकाई थी।

इसी तरह, पिछले साल दोपहिया वाहनों की बिक्री 7.24 प्रतिशत बढ़कर 2.02 करोड़ इकाई पर पहुंच गई।

इस दौरान तिपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 7.21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13.09 लाख इकाई रही, जबकि वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 6.71 प्रतिशत बढ़कर 10.09 लाख इकाई हो गई।

फाडा के अध्यक्ष सी एस विग्नेश्वर ने इन आंकड़ों पर कहा कि 2025 का साल दो हिस्सों में बंटा रहा। बजट में प्रत्यक्ष कर राहत और आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती जैसे अनुकूल संकेत मौजूद होने के बावजूद जनवरी से अगस्त तक बाजार सुस्त बना रहा। इस दौरान ग्राहक खर्च को लेकर सतर्क रहे और वित्त मंजूरी भी कुछ क्षेत्रों में सीमित रही।

हालांकि विग्नेश्वर के मुताबिक, सितंबर में जीएसटी की दरों में कटौती लागू होने के बाद वाहन बिक्री की तस्वीर बदल गई। दरों में कटौती से खासकर छोटी कारों, दोपहिया, तिपहिया और कुछ वाणिज्यिक वाहनों की कीमतें कम हो गईं। इससे ग्राहकों की धारणा सुधरी और सितंबर से दिसंबर के बीच बिक्री में साफ उछाल देखने को मिला।

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