अर्थतंत्र की खबरें: वैश्विक तनावों के चलते बाजार लाल निशान में बंद और अमेरिका में डीजल $6 प्रति गैलन के पार
घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को कारोबार के दौरान करीब एक प्रतिशत तक गिरने के बाद संभल गए और मामूली नुकसान के साथ बंद हुए।

पश्चिम एशिया में जारी तनावों के चलते वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार दिन के निचले स्तर से उबरकर लाल निशान में बंद हुआ। इस बीच आईटी, एफएमसीजी और बैंक शेयरों के समर्थन से प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर आ गया।
दिन के शुरुआत में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,902.59 से 593.42 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,309.16 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय इसने 14.55 अंक चढ़कर 74,17.15 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि एक समय यह 742.42 अंक यानी करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 74,160.16 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। यानी सेंसेक्स दिन के निम्नतम स्तर से 621.59 अंक उबरकर बंद हुआ।
वहीं निफ्टी की बात करें तो यह अपने पिछले बंद 23,477.80 से 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 23,270.30 पर खुला। हालांकि दिन के कारोबार में एक समय यह 23,448.10 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक समय 246.4 अंक यानी 1 प्रतिशत फिसलकर यह 23,231.40 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया था।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें क्रमशः 2.7 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी में भी गिरावट दर्ज की गई। इनके विपरीत, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
निफ्टी50 इंडेक्स में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि भारतीय इक्विटी पर दबाव बने रहने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सप्लाई में रुकावट की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका में डीजल की कीमत छह डॉलर प्रति गैलन के पार
अमेरिका में डीजल की कीमतों ने शुक्रवार को एक और नया रिकॉर्ड बनाया और इसका औसत भाव छह डॉलर प्रति गैलन (लगभग 135 रुपये प्रति लीटर) के पार पहुंच गया। वाशिंगटन और ईरान के बीच युद्ध से दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसके चलते यह बढ़ोतरी हुई।
मोटर क्लब 'एएए' (अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन) के अनुसार 6.05 डॉलर प्रति गैलन का राष्ट्रीय औसत पिछले सप्ताह के 5.85 डॉलर और पिछले वर्ष इसी अवधि के 3.70 डॉलर प्रति गैलन से अधिक है।
डीजल की ऊंची कीमतों का मतलब रोजमर्रा के सामानों की एक लंबी सूची के लिए परिवहन का अधिक महंगा होना है। इसका कारण कई माल ढुलाई और वितरण नेटवर्कों में डीजल का उपयोग किया जाता है। कुछ व्यवसायों ने ऑनलाइन ऑर्डर और डाक पैकेज पर अतिरिक्त शुल्क जोड़कर बढ़ी हुई लागत का बोझ पहले ही उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है।
खरीदारों को विशेष रूप से किराना सामान की दुकानों पर कीमतों के झटके का अधिक सामना करना पड़ सकता है। मांस और कृषि उपज जैसे जल्द खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को महंगे डीजल के सबसे तात्कालिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
रुपया पांच पैसे टूटकर 95.57 प्रति डॉलर पर
रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे की गिरावट के साथ 95.57 (अस्थायी) पर रहा। कच्चे तेल की कीमत में सुधार और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को मदद मिली।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और कच्चे तेल की ऊंची कीमत रुपये पर दबाव डाल रही हैं। रुपया शुक्रवार को लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।
कारोबारियों ने बताया कि रुपया गिरावट के साथ खुला लेकिन आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप, घरेलू शेयर बाजार में दिन के निचले स्तर से मामूली सुधार और ऊंचे स्तर पर कच्चे तेल में मुनाफावसूली से उसने कुछ नुकसान की भरपाई की।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.70 पर खुला और बाद में 95.79 के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि, बाद में स्थानीय मुद्रा ने नुकसान की भरपाई की और दिन के उच्च स्तर 95.51 प्रति डॉलर पर पहुंची। रुपया अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे की गिरावट के साथ 95.57 (अस्थायी) पर बंद हुआ। रुपया बृहस्पतिवार को 44 पैसे टूटकर 95.52 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘रुपया अपनी गिरावट जारी रखते हुए... 15 मई के बाद से अपने सबसे बड़े साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ा है। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ना है।’’
उन्होंने कहा कि निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 95.80 से 95.15 के आसपास रह सकता है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत बढ़कर 99.13 पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 3.28 प्रतिशत टूटकर 104.10 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
सप्ताह में पांच कार्य दिवस को लेकर बैंक यूनियन की हड़ताल, बैंकिंग सेवाओं पर असर
सप्ताह में पांच कार्य दिवस को लागू करने और अन्य समस्याओं के लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने शुक्रवार को हड़ताल की और इससे बैंकिंग सेवाओं विशेषकर सरकारी बैंकों पर असर हुआ है।
यूएफबीयू में कुल सात बैंकिंग यूनियन शामिल हैं और इसमें सरकारी बैंकों के करीब 90 प्रतिशत कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, इस हड़ताल का निजी बैंकों की सेवाओं पर असर नहीं हुआ है। हड़ताल में कई सरकारी बैंक कर्मचारियों के शामिल होने के कारण सरकारी बैंकों की ब्रांच या तो पूरी तरह से बंद हैं या फिर आंशिक रूप से कामकाज की।
कई शाखाओं में नकद जमा, निकासी, चेक क्लियरेंस और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए। हालांकि, सरकारी बैंकों की डिजिटल सेवाओं पर इस हड़ताल का कोई असर नहीं हुआ है। इंटरनेट बैंकिंग के साथ-साथ यूपीआई सेवाएं भी सामान्य बनी हुई है। इसे लेकर कई सरकारी बैंक ग्राहकों को एडवाइजरी भी जारी कर चुके हैं और वैकल्पिक बैंकिंग सेवाओं को उपयोग करने की सलाह दी है।
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