अर्थतंत्र की खबरें: कमजोर रुपये, मुद्रास्फीति की चिंता से बाजार में गिरावट और नहीं थम रहा रुपए में गिरावट

विनोद नायर ने कहा, "हाल में आई तेजी के बाद निवेशक सतर्क हो गए हैं। बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल, कमजोर रुपये और ईंधन कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।"

फोटो: IANS
i
user

नवजीवन डेस्क

google_preferred_badge

शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार को शुरुआती बढ़त गंवाकर गिरावट के साथ बंद हुए। धातु, तेल एवं गैस और पीएसयू बैंक शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच निवेशकों में सतर्कता देखी गई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स उतार- चढ़ाव के बीच 160.73 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 75,237.99 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने एक समय करीब 470 अंक तक की बढ़त ले ली थी। लेकिन बाद में बिकवाली के दबाव में यह नीचे आ गया।

वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का मानक सूचकांक निफ्टी 46.10 अंक यानी 0.19 प्रतिशत गिरकर 23,643.50 पर बंद हुआ। इसके साथ ही दो दिनों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया।

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से टाटा स्टील, भारतीय स्टेट बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, लार्सन एंड टुब्रो, ट्रेंट, एक्सिस बैंक और एशियन पेंट्स के शेयरों में गिरावट रही।

दूसरी तरफ, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, पावरग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और सन फार्मा में बढ़त दर्ज की गई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "हाल में आई तेजी के बाद निवेशक सतर्क हो गए हैं। बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल, कमजोर रुपये और ईंधन कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।"

रुपया 22 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 95.86 प्रति डॉलर पर

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 22 पैसे टूटकर 95.86 (अस्थायी) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। कारोबार के दौरान एक समय यह 96 प्रति डॉलर के से नीचे चला गया था।

रुपया इस वर्ष अब तक छह प्रतिशत से अधिक टूट चुका है और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह लगभग दो प्रतिशत कमजोर हुआ है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ रुपये में गिरावट आई है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं, अपेक्षाकृत उच्च मूल्यांकन और एआई-आधारित निवेश अवसरों की कमी ने पूंजी प्रवाह पर दबाव डाला है।

इसके अलावा, कमजोर शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ने की संभावना है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा रही हैं।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.86 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह पिछले बंद भाव से 50 पैसे टूटकर 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।

अंततः रुपया 95.86 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 22 पैसे की गिरावट है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से इसे कुछ सहारा मिला।

रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, अंत में दो पैसे की मामूली बढ़त के साथ 95.64 पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘ हमारा अनुमान है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बीच रुपये में गिरावट जारी रहेगी। मजबूत डॉलर और विदेशी पूंजी की निकासी से भी रुपये पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक का कोई भी हस्तक्षेप और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी निचले स्तरों पर रुपये को सहारा दे सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 95.60 से 96.20 के बीच रह सकता है।’’


देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.29 अरब डॉलर बढ़कर 696.99 अरब डॉलर पर

देश का विदेशी मुद्रा भंडार आठ मई को समाप्त सप्ताह में 6.29 अरब डॉलर बढ़कर 696.99 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 7.79 अरब डॉलर घटकर 690.69 अरब डॉलर पर रहा था।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह में 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद रुपये पर दबाव बढ़ने से आरबीआई को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, आठ मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) 56.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 552.39 अरब डॉलर हो गईं।

डॉलर के संदर्भ में व्यक्त विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर शामिल होता है।

समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.64 अरब डॉलर बढ़कर 120.85 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 8.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर हो गया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत का आरक्षित कोष भी 1.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पहुंच गया।

भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में हुए अहम करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने शुक्रवार को ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती देने के लिए कई अहम समझौतों और पहलों पर सहमति जताई।

अबू धाबी में दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के बयान के अनुसार, भारत और यूएई ने व्यापक ऊर्जा साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू करने पर सहमति बनाई।

दोनों नेताओं ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच हुए रणनीतिक सहयोग समझौते का स्वागत किया। इसके तहत भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की भागीदारी बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल की जाएगी। साथ ही भारत में रणनीतिक गैस भंडार स्थापित करने के लिए भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एडीएनओसी के बीच दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति को लेकर हुए समझौते का भी स्वागत किया गया।

बैठक के दौरान यूएई की संस्थाओं द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की गई। इसमें एमिरेट्स न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा आरबीएल बैंक में 3 अरब डॉलर, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी द्वारा भारत के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट फंड में 1 अरब डॉलर और इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी द्वारा सम्मान कैपिटल में 1 अरब डॉलर का निवेश शामिल है।

पीएमओ के अनुसार, ये निवेश भारत की विकास यात्रा में यूएई की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और दोनों देशों की रणनीतिक निवेश साझेदारी को मजबूत करेंगे।

Google न्यूज़व्हाट्सएपनवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia