अर्थतंत्र की खबरें: ऊर्जा, बैंक शेयरों में बिकवाली से बाजार दूसरे दिन भी गिरा और सोना-चांदी के दामों में भी गिरावट

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, "अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से निवेशक धारणा सतर्क रही।"

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में बीएसई सेंसेक्स बुधवार को लगातार दूसरे दिन 142 अंक टूट गया जबकि एनएसई निफ्टी में मामूली छह अंक की गिरावट रही। पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के बीच निवेशकों के सतर्क रुख और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ताजा पूंजी निकासी से बाजार नुकसान में रहा।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 141.90 अंक यानी 0.19 प्रतिशत टूटकर 75,867.80 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ऊंचे में 76,224.68 अंक तक गया और नीचे में 75,748.21 अंक तक आया। सेंसेक्स में शामिल 20 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 10 में गिरावट रही।

वहीं, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 6.55 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 23,907.15 अंक पर रहा।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में प्रमुख रूप से गिरावट रही।

दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में पावर ग्रिड, इटर्नल, एनटीपीसी और टाटा स्टील शामिल हैं।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, "अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से निवेशक धारणा सतर्क रही।"

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.24 प्रतिशत टूटकर 96.35 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सूचकांक 0.29 प्रतिशत की गिरावट पर रहा जबकि मझोली कंपनियों के मिडकैप सूचकांक में 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने पर बीमा की वृद्धि दर पड़ सकती नरमः एलआईसी प्रमुख

अग्रणी बीमा कंपनी एलआईसी के प्रमुख आर दुरईस्वामी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक बने रहने की स्थिति में देश के बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है, क्योंकि इससे लोगों की आय और बचत क्षमता प्रभावित हो सकती है।

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दुरईस्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है तो इसका शृंखलाबद्ध प्रभाव लोगों की आय, खर्च और बचत के रुझान पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी।

हालांकि दुरईस्वामी ने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस संकट से प्रभावित होता है तो बीमा उद्योग भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। लोगों की आय और बचत क्षमता पर असर पड़ने से बीमा क्षेत्र पर भी स्वाभाविक रूप से प्रभाव पड़ेगा।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर असर पड़ा है। इससे आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी इस तरह के कदमों के लिए पहले से तैयार है।

उन्होंने कहा, “जब हमने अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी शुरू की थी, तभी से हम आगे के ऐसे कदमों के लिए तैयार थे। इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।”

एलआईसी प्रमुख ने कहा कि जैसे ही समय और हिस्सेदारी के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा, एलआईसी सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए तैयार है।


अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर सतर्क रुख के चलते सोने के वायदा भाव में गिरावट।

वायदा कारोबार में बुधवार को सोने की कीमतें 561 रुपये गिरकर 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को लेकर व्यापारियों ने सतर्कता बरती।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के जून माह में आपूर्ति वाले अनुबंध का भाव 561 रुपये यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,57,055 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इसमें 4,436 लॉट का कारोबार हुआ।

इसी प्रकार, सोने के अगस्त माह में आपूर्ति वाले अनुबंध का भाव 521 रुपये यानी 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,60,340 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इसमें 5,338 लॉट का कारोबार हुआ।

बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों तथा निवेशकों की सतर्क कारोबारी धारणा के कारण घरेलू वायदा बाजार में सोना वायदा कीमतों में गिरावट आई।

वैश्विक स्तर पर अगस्त डिलीवरी वाला कॉमेक्स सोना वायदा गिरावट के साथ 4,518.87 डॉलर प्रति औंस रह गया।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दो पैसे की मामूली तेजी के साथ 95.68 पर

रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की मामूली तेजी के साथ 95.68 (अस्थायी) पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और बातचीत में हो रही देरी के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

विदेशीमुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी मुद्रा की मजबूती और घरेलू बाजारों में कमजोर रुख ने भी रुपये पर दबाव डाला। अब सबका ध्यान तीन से पांच जून के बीच होने वाली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक पर है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.60 पर खुला, और कारोबार के दौरान अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.79 के निचले पर आ गया। अंत में, रुपया 95.68 (अस्थायी) पर रहा, जो इसके पिछले बंद भाव से दो पैसे कम है। रुपया मंगलवार को 44 पैसे कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.70 पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक, अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई की चिंताओं के कारण रुपया नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी निचले स्तरों पर रुपये को सहारा दे सकती है। डॉलर-रुपया हाजिर कीमत 95.50 से 96.10 की दायरे में कारोबार करने का अनुमान है।’’

विश्व की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती को मापने वाला, डॉलर सूचकांक 0.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.07 पर रहा।

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