अर्थतंत्र की खबरें: पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद संभला बाजार और अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को रखा बरकरार
शेयर बाजार में बुधवार को तेजी आई और दोनों मानक सूचकांक लाभ में रहे। बैंक शेयरों में बढ़त और अमेरिका में महंगाई का आंकड़ा उम्मीद से कम रहने के साथ बीएसई सेंसेक्स 130 अंक के लाभ में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी में 26 अंक की तेजी रही।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी सत्र बुधवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। शुरुआती तेजी के बाद दिन भर के उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.17 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 130.49 अंक या 0.17 प्रतिशत बढ़कर 77,185.43 पर था, तो वहीं निफ्टी50 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत बढ़कर 24,078.50 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,054.94 से 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,192.76 पर खुला और एक समय यह 591.33 अंकों या 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,646.27 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,052.05 से 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085.85 पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान यह 168.3 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,220.35 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया था।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स मं 0.28 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.67 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।
वहीं, सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी आई। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.73 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.63 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। इसके साथ ही निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी ऑटो में भी तेजी दर्ज की गई।
इसके विपरीत, निफ्टी मेटल में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी में भी कमजोरी रही।
निफ्टी 50 इंडेक्स में अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स, और एसबीआई के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
यात्री वाहनों की थोक बिक्री जून में 24.1 प्रतिशत बढ़कर 3.88 लाख यूनिट्स के पार
भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री (कंपनियों द्वारा डीलर्स को बिक्री) जून में सालाना आधार पर 24.1 प्रतिशत बढ़कर 3,88,144 यूनिट्स रही है। इससे पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 3,12,851 यूनिट्स था। यह जानकारी इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।
सियाम के डेटा के मुताबिक, यात्री वाहनों में यूटिलिटी व्हीकल (यूवी) सेगमेंट लगातार बढ़ रहा है और जून में इसकी सालाना वृद्धि दर 19.9 प्रतिशत रही और वॉल्यूम 2,17,228 यूनिट्स रही।
यात्री गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत बढ़कर 98,610 यूनिट्स हो गई है। वैन की बिक्री सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर 10,230 यूनिट्स पर पहुंच गई है।
दोपहिया वाहन श्रेणी ने भी मजबूत रफ्तार बनाए रखी। जून में कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए दोपहिया वाहनों की संख्या 18.6 प्रतिशत बढ़कर 18,51,400 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 15,61,283 यूनिट्स पर था।
दोपहिया वाहनों में स्कूटर सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी रही। इसकी घरेलू बिक्री 39.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7,44,823 यूनिट्स पर पहुंच गई।
वहीं, मोटरसाइकिल की बिक्री 6.4 प्रतिशत बढ़कर 10,56,422 यूनिट्स हो गई, जबकि मोपेड की बिक्री कम आधार के चलते 50.4 प्रतिशत बढ़कर 50,155 यूनिट्स हो गई है।
तिपहिया वाहनों की डीलरों को बिक्री सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 77,951 यूनिट्स हो गई है, जबकि पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 61,828 यूनिट्स पर था।
जून में पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़कर 64,181 यूनिट्स रही, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़कर 11,828 यूनिट्स पर पहुंच गई।
इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों ने भी मजबूत वृद्धि दर्ज की। ई-रिक्शा की बिक्री 52.4 प्रतिशत बढ़कर 1,590 यूनिट्स हो गई। सियाम के आंकड़ों के अनुसार, जून में वाहन निर्यात भी मजबूत बना रहा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने अमेरिकी कांग्रेस में अपनी पहली पेशी के दौरान कहा कि केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फेडरल रिजर्व लगातार मूल्य स्थिरता बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है और बढ़ती महंगाई को किसी भी कीमत पर लंबे समय तक बने रहने नहीं देगा।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के सामने केविन वार्श ने बताया कि जून में हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक में संघीय ब्याज दर को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही रखने का फैसला लिया गया।
उन्होंने कहा, "हमारी समिति के सदस्य लंबे समय तक ऊंची महंगाई को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे। हम 2 प्रतिशत महंगाई के लक्ष्य को हासिल करने और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह जिम्मेदारी किसी और पर डालने का समय नहीं है।"
केविन वार्श ने कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। घरेलू उपभोग में कुछ नरमी आई है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग लगातार बढ़ रहा है और श्रम बाजार भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, हाउसिंग क्षेत्र अभी भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है।
उन्होंने माना कि विदेशों में चल रहे संघर्ष और अन्य वैश्विक घटनाएं फेडरल रिजर्व के नियंत्रण से बाहर हैं, लेकिन ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट के प्रभावी प्रबंधन के जरिए महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "हमारे पास इसके लिए सभी जरूरी उपकरण हैं। हमारे पास प्रतिबद्धता, जिम्मेदारी और साधन, तीनों मौजूद हैं और हम अपना लक्ष्य हासिल करेंगे।"
रुपया 16 पैसे टूटकर 96.32 प्रति डॉलर पर
रुपया बुधवार को 16 पैसे की गिरावट के साथ 96.32 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मुद्रा पर दबाव है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख और डॉलर के कमजोर होने से रुपये में गिरावट सीमित रही।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.12 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 96.04 से 96.32 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। अंत में यह 96.32 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव की तुलना में 16 पैसे की गिरावट है।
रुपया मंगलवार को 48 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कोष प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘‘ कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की आयात लागत और अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये में मजबूती की गुंजाइश सीमित कर रही हैं। विकल्प बाजार की कीमतों से अब भी रुपये को लेकर कमजोर धारणा झलक रही है। इससे संकेत मिलता है कि कारोबारी भू-राजनीतिक जोखिमों और तेल कीमतों में और वृद्धि होने पर रुपये पर फिर दबाव बढ़ने की आशंका को लेकर चिंतित हैं।’’
उन्होंने कहा कि निकट अवधि में रुपया 95.80 से 96.50 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। आने वाले दिनों में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने पर यह 95 प्रति डॉलर के स्तर की ओर मजबूत हो सकता है।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 100.78 पर रहा।
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