अर्थतंत्र की खबरें: सोना-चांदी सस्ते में खरीदने का मौका, कीमतों में बड़ी गिरावट और शेयर बाजार धड़ाम

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 1,184 रुपए कम होकर 1,49,937 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,51,121 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली है, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: करीब 1,200 रुपए और 8,000 रुपए कम हो गया है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 1,184 रुपए कम होकर 1,49,937 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,51,121 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,427 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,37,342 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,12,453 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,13,341 रुपए प्रति 10 ग्राम था। सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

चांदी का दाम 7,883 रुपए कम होकर 2,36,158 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,44,041 रुपए प्रति किलो था।

वायदा बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हुआ है। खबर लिखे जाने तक सोने के 05 जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.47 प्रतिशत बढ़कर 1,52,488 रुपए हो गया है और चांदी के 05 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.60 प्रतिशत कम होकर 2,38,483 रुपए हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में बिकवाली देखी गई। सोना 0.11 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 4,770 डॉलर प्रति औंस और चांदी 74 डॉलर प्रति औंस पर थी।

युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता से बीएसई सेंसेक्स 931 अंक लुढ़का, निफ्टी भी नुकसान में

भारी बिकवाली से स्थानीय शेयर बाजारों में पांच दिन से जारी तेजी बृहस्पतिवार को थम गयी और बीएसई सेंसेक्स 931 अंक लुढ़क गया जबकि एनएसई निफ्टी 222 अंक के नुकसान में रहा। पश्चिम एशिया में युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता के बीच वित्तीय, बैंक और आईटी शेयरों में बिकवाली से बाजार नुकसान में रहा।

एशिया और यूरोप के अन्य बाजारों में कमजोर रुख, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर निकासी ने भी घरेलू बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

बाजार में तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 931.25 अंक यानी 1.20 प्रतिशत टूटकर 76,631.65 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, एक समय यह 1,215 अंक की गिरावट के साथ 76,347.90 अंक पर आ गया था।

एनएसई निफ्टी 222.25 अंक यानी 0.93 प्रतिशत टूटकर 23,775.10 अंक पर बंद हुआ।

लेबनान पर इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने के बाद युद्धविराम समझौते को लेकर अनिश्चितता बढ़ गयी है।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘युद्धविराम से जो उम्मीद बंधी थी, वह अब फीकी पड़ गयी है क्योंकि अमेरिका-ईरान तनाव के फिर से बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल की कीमत फिर से बढ़ गई। इससे भारत में मुद्रास्फीति को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ घरेलू स्तर पर, मुनाफावसूली, 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि और रुपये की विनिमय दर में गिरावट ने अल्पकालिक जोखिम लेने की प्रवृत्ति को कम कर दिया। पिछले सत्र की जोरदार तेजी के बाद वित्तीय क्षेत्र में गिरावट देखी गई। इसका कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर बिकवाली है।’’

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में से इंटरग्लोब एविएशन, लार्सन एंड टुब्रो, इटर्नल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।

दूसरी तरफ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड, एनटीपीसी और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में तेजी रही।

बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.26 प्रतिशत चढ़ा जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप 0.15 प्रतिशत के लाभ में रहा।


रुपया नौ पैसे कमजोर होकर 92.63 प्रति डॉलर पर

पश्चिम एशिया में बनी नाजुक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में सतर्कता बने रहने से बृहस्पतिवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ पैसे टूटकर 92.63 (अस्थायी) पर आ गया।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि संघर्ष विराम होने के बावजूद ईरान एवं इजराइल के बीच तनाव और लेबनान पर हमले जारी रहने से भू-राजनीतिक जोखिम ऊंचा बना हुआ है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.63 के भाव पर खुला। रुपये ने कारोबार के दौरान 92.92 के निचले स्तर और 92.53 के उच्च स्तर को भी छुआ। कारोबार के अंत में यह 92.63 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से नौ पैसे की कमजोरी दर्शाता है।

बुधवार को ईरान एवं अमेरिका के बीच संघर्ष विराम की घोषणा होने के बाद रुपया 52 पैसे मजबूत होकर 92.54 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि संघर्ष विराम के उल्लंघन की खबरें आने और इजराइली कार्रवाई जारी रहने से कच्चे तेल के दाम में तेजी आने और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव पड़ा।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड तीन प्रतिशत से अधिक बढ़कर 97.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

भारत हर वैश्विक संकट से और भी मजबूत होकर उभरा है: शक्तिकांत दास

भारत ने वैश्विक संकटों के दौरान लगातार मजबूत लचीलापन (रेजिलिएंस) दिखाया है और सिर्फ उनसे उबरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर बार खुद को और मजबूत बनाकर उभरा है। यह बात प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कही।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआईएमए नेशनल लीडरशिप कॉन्क्लेव में बोलते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि कठिन समय में भारत की यात्रा यह दिखाती है कि देश चुनौतियों के बावजूद लगातार आगे बढ़ता रहा है।

उन्होंने कहा, "हर संकट के दौरान देश ने सिर्फ मुश्किलों को झेला ही नहीं, बल्कि हर बार पहले से ज्यादा मजबूत बनकर बाहर निकला है।"

उन्होंने बताया कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तनाव से गुजर रही है, जहां भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावट और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान विकास देखने को मिल रहा है।

दास ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम फिलहाल नीचे की ओर ज्यादा झुके हुए हैं।" ऐसे माहौल में उन्होंने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि देश ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत सिर्फ संकट झेलने में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में खुद को बदलने और बेहतर बनाने में है।