अर्थतंत्र की खबरें: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट और रुपया ऑलटाइम लो पर पहुंचा

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,566.16 और निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,028.05 पर बंद हुआ।

फोटो: Getty Images
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नवजीवन डेस्क

शेयर बाजारों में सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 1,353 अंक का गोता लगा गया, जबकि एनएसई निफ्टी 422 अंक लुढ़क गया। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख के साथ भारी बिकवाली से बाजार नीचे आया।

कारोबारियों के अनुसार, इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक यानी 1.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,566.16 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 2,494.35 अंक यानी 3.16 प्रतिशत का गोता लगाकर 76,424.55 अंक पर आ गया था।

कुल 3,379 शेयरों में गिरावट दर्ज की गयी जबकि 972 शेयर लाभ में रहे। वहीं 185 के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।

पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 422.40 अंक यानी 1.73 प्रतिशत टूटकर 24,028.05 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 752.65 अंक यानी 3.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,697.80 अंक पर आ गया था।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करने और तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिखने के कारण बिकवाली तेज हो गई है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ने और आर्थिक वृद्धि को जोखिम है। इससे आरबीआई के नीतिगत रुख में जटिलताएं आने की संभावना है। अमेरिका में कुछ विशिष्ट कोषों में निकासी पर सीमा लगाये जाने की आशंका ने भी बिकवाली में योगदान दिया।

रुपया 53 पैसे टूटकर अपने सबसे निचले स्तर 92.35 प्रति डॉलर पर

पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर के मजबूत होने से सोमवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 53 पैसे टूटकर 92.35 प्रति डॉलर (अस्थायी) के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के बीच विदेशी पूंजी की निकासी जारी रहने से रुपये पर खासा दबाव देखा गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.22 पर खुला और थोड़ी देर के लिए मजबूत होकर 92.15 तक पहुंच गया। लेकिन बाद में लगातार गिरावट के बीच यह अंत में 92.35 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 53 पैसे की कमजोरी है। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 18 पैसे गिरकर 91.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, "कमजोर वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए तेज उछाल के कारण रुपया शुरुआत में ही काफी कमजोर खुला और 92.35 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक खिसक गया। एशियाई कारोबार के दौरान तेल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तेजी देखी गई। डॉलर में मजबूती और विदेशी निवेशकों की निकासी से भी रुपये पर दबाव पड़ा।"


सोने और चांदी की कीमतें लगातार चौथे दिन घटीं, जानिए क्या है गिरावट की वजह

सोने और चांदी की कीमत में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। यह लगातार चौथा दिन है, जब दोनों कीमती घातुओं की कीमत में कमी आई है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत मामूली रूप से 77 रुपए घटकर 1,58,674 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,58,751 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

22 कैरेट सोने की कीमत 1,45,416 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,45,345 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,19,006 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,063 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

चांदी का दाम 667 रुपए कम होकर 2,60,056 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,60,723 रुपए प्रति किलो था।

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह इजरायल-ईरान युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में कमी की संभावना कम हो जाना है, जो अभी तक कीमती घातुओं की रैली के पीछे सबसे बड़ी कारण था।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना कमजोरी के साथ 5,100 डॉलर प्रति औंस पास बना है। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके कारण फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को लेकर सर्तक हो सकता है। इसने कीमती धातुओं में तेजी की संभावना को सीमित कर दिया है।

भारतीय शेयर बाजार 11 महीनों के निचले स्तर पर, इन कारणों के चलते आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ खुला, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी 11 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

बाजार में बड़ी गिरावट की वजह कच्चे तेल में तेजी के माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में सोमवार को 26 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई है और यह 119 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो कि जुलाई 2022 के बाद कच्चे तेल का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि, दोपहर तक कच्चे तेल की तेजी में थोड़ी कमी आई है, फिलहाल कच्चा तेल 14.42 प्रतिशत की तेजी के साथ 106 डॉलर प्रति बैरल है।

कच्चे तेल में कमी की वजह ईराक और कुवैत जैसे देशों की ओर से उत्पादन में कटौती करना है। इससे पहले कतर ने एलएनजी के उत्पादन में कमी का ऐलान किया था।

वैश्विक बाजारों में कमजोरी के संकेत भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह है। एशिया में टोक्यो, शंघाई, सोल, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता सभी बाजार हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को लाल निशान में बंद हुए थे।

भारतीय बाजार में कमजोरी की एक वजह डॉलर का मजबूत होना है। दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स इस साल के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 99.7 पर पहुंच गया है। डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपए में भी कमजोरी देखी जा रही है।

जब भी डॉलर मजबूत होता है, तो उभरते हुए बाजार जैसे भारत के बाजारों से विदेशी निवेशकों की ओर से निकासी देखने को मिलती है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआआई) की ओर से लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह है। विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को इक्विटी बाजार में 6,030.38 करोड़ रुपए की निकासी की थी।