अर्थतंत्र की खबरें: सेंसेक्स 508 अंक टूटा, शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, ब्याज दरों पर RBI का बड़ा अनुमान

विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार दबाव में रहा।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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अनिश्चित वैश्विक संकेतों के बीच स्थानीय शेयर बाजार सोमवार को वित्तीय, एफएमसीजी एवं वाहन शेयरों में बिकवाली के कारण लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 508 अंक फिसल गया जबकि निफ्टी में 165 अंक की गिरावट रही।

विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार दबाव में रहा।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 74,267.34 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,367.93 अंक के ऊपरी और 74,203.68 अंक के निचले स्तर को भी छुआ। इस तरह सेंसेक्स में 1,164.25 अंक का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 165.15 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 23,382.60 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।

इसके उलट टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंटरग्लोब एविएशन, एचसीएल टेक और टाटा स्टील के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

शेयर बाजार में गिरावट का यह लगातार चौथा सत्र रहा। इस दौरान सेंसेक्स में कुल 2,221.62 अंक यानी 2.90 प्रतिशत और निफ्टी में 649.1 अंक यानी 2.70 प्रतिशत की गिरावट आई है।

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मानक ब्रेंट क्रूड 3.34 प्रतिशत बढ़कर 94.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी है और इसे लेकर बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।’’

रुपया 10 पैसे कमजोर होकर 94.95 प्रति डॉलर पर

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सोमवार को रुपया 10 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.95 (अस्थायी) पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और इजराइल-लेबनान के बीच जारी तनाव से निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर भी रुपये पर पड़ा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.93 के भाव पर खुला और कारोबार के दौरान यह 94.73 के ऊपरी एवं 95.03 के निचले स्तर तक गया। कारोबार के अंत में यह 94.95 प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 10 पैसे की गिरावट है।

शुक्रवार को रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप के बीच 73 पैसे मजबूत होकर 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, “वैश्विक तनाव एक बार फिर बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण रुपये में कमजोरी का रुख रह सकता है।’’

उन्होंने कहा कि अगर शांति वार्ता आगे बढ़ती रहती है तो रुपये में बड़ी गिरावट की आशंका कम हो सकती है। उनके अनुसार, निकट भविष्य में डॉलर-रुपये की विनिमय दर 94.60 से 95.30 के दायरे में रह सकती है।

कारोबारियों के अनुसार, अब बाजार की नजर तीन से पांच जून के बीच होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पांच जून को अपने निर्णयों की घोषणा करेगी।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.10 प्रतिशत बढ़कर 99.04 पर रहा।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 3.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 94.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


जीएसटी संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये के पार

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह वृद्धि वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति में सुधार तथा आयात से मिलने वाले कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। मई, 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.88 लाख करोड़ रुपये रहा था।

घरेलू लेनदेन से मई के दौरान केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 37,397 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,143 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 51,990 करोड़ रुपये रहा।

इस अवधि में कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू मांग को दर्शाती है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र में यह वृद्धि 22.2 प्रतिशत रही जो घरेलू खपत की मजबूती को दिखाती है।

आयात से आईजीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर मई में 59,654 करोड़ रुपये हो गया जो औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है। जीएसटी ‘रिफंड’ 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया।

‘रिफंड’ समायोजित करने के बाद, मई में शुद्ध जीएसटी राजस्व 3.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा।

इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में कुल मिलाकर जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह 4.11 लाख करोड़ रुपये था।

सूत्रों ने कहा, ‘‘ सालाना आधार पर यह संचयी प्रदर्शन अच्छा है और समूचे वर्ष के लिए तय जीएसटी राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के अनुरूप है।’’ सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

आंकड़ों पर कर संबंधी सलाह देने वाली प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि अप्रैल और मई, 2026 को मिलाकर संग्रह में तुलनीय आधार पर 8.8 प्रतिशत की मजबूत सालाना वृद्धि दिखती है।

आरबीआई अगली कुछ तिमाही तक ब्याज दरों को रख सकता है स्थिर: रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) 3-5 जून तक होने वाली बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण महंगाई को लेकर चिंताओं में इजाफा होना है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 22 प्रतिशत की गिरावट हुई है, जिससे पिछले दो हफ्तों में भारत के एक्सटर्नल अकाउंट के आउटलुक में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

कंपनी ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और यह भारत की कंजप्शन रिकवरी स्टोरी और आय साइकिल के लिए बहुत अच्छा है।"

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बाद कच्चा तेल फिर से 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है और इससे डॉलर के मुकाबले रुपए को भी सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, आरबीआई को भी इससे अगले कुछ तिमाही में रेपो रेट को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने से महंगाई 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

लिक्विडिटी को लेकर, रिपोर्ट में बताया गया है कि आरबीआई द्वारा रुपए-डॉलर स्वैप के माध्यम से 5 अरब डॉलर का तरलता प्रवाह करने के बाद सरप्लस की स्थिति घटकर शुद्ध मांग और सावधि देनदारियों के लगभग 0.2 प्रतिशत तक सीमित हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें तत्काल चिंता का कोई कारण नहीं दिखता; एक बार कच्चे तेल पर दबाव कम हो जाए और परिणामस्वरूप मुद्रा पर भी दबाव कम हो जाए, तो आरबीआई तरलता की स्थिति को बहाल करने में सक्षम होगा।"

जमा वृद्धि 12.2 प्रतिशत वार्षिक दर से स्वस्थ बनी हुई है, लेकिन ऋण वृद्धि के साथ तालमेल नहीं रख पा रही है।


अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना कीमत 2,500 रुपये टूटा, चांदी 5,000 रुपये कमजोर

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत 2,500 रुपये टूटकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद वैश्विक बाजारों में आई गिरावट से यहां भी सोने कमजोर पड़ गया।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में 2,500 रुपये (1.53 प्रतिशत) की गिरावट आई। शुक्रवार को बंद हुई कीमत 1,62,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर यह 1,60,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गयी।

चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट आई और यह 5,000 (या लगभग 2 प्रतिशत) टूटकर 2,69,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 2,74,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘सोने ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर रुख के साथ की, क्योंकि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया और डॉलर को मजबूत किया।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में हुई बढ़ोतरी का असर भी कीमती धातुओं पर पड़ा, जिससे सोने और चांदी जैसी संपत्तियों में निवेशकों की दिलचस्पी कम हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना की कीमत लगभग एक प्रतिशत टूटकर 4,504.97 डॉलर प्रति औंस रह गई। हालांकि, चांदी की कीमत में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 75.93 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।