अर्थतंत्र की खबरें: चांदी ने फिर बनाया नया ऑल-टाइम हाई, कीमतें आसमान पर और शेयर बाजार में तीसरे दिन गिरावट

चांदी की कीमत 4,850 रुपए बढ़कर 2,48,000 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि मंगलवार को 2,43,150 रुपए प्रति किलो थी।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

चांदी की कीमतों में तेजी जारी है और बुधवार को इसने फिर नया ऑल-टाइम हाई बनाया। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, चांदी की कीमत 4,850 रुपए बढ़कर 2,48,000 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि मंगलवार को 2,43,150 रुपए प्रति किलो थी।

चांदी की अपेक्षा सोने की कीमतें स्थिर रहीं। 24 कैरेट सोने की कीमत मामूली 15 रुपए बढ़कर 1,36,675 रुपए पर पहुंच गई है, जो कि पहले 1,36,660 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,25,194 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो कि पहले 1,25,181 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। 18 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,02,506 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,02,495 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

हाजिर बाजार के उलट वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.80 प्रतिशत कम होकर 1,37,969 रुपए हो गया है। चांदी के 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 2.12 प्रतिशत कम होकर 2,53,326 रुपए हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। कॉमेक्स पर सोने का दाम 0.85 प्रतिशत कम होकर 4,457.71 और चांदी का दाम 2.89 प्रतिशत कम होकर 78.692 डॉलर प्रति औंस हो गया है।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि वायदा बाजार में सोने में कमजोरी की वजह डॉलर के मुकाबले रुपए का 0.30 प्रतिशत मजबूत होकर 89.84 होना है।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी बाजार के लिए आने वाला सप्ताह आंकड़ों से भरा रहेगा, जिसमें एडीपी के गैर-कृषि रोजगार, गैर-कृषि वेतन और प्रारंभिक बेरोजगारी दावों के आंकड़े जारी होंगे, जो सोने की कीमतों में अस्थिरता और दिशा ला सकते हैं। फिलहाल, निकट भविष्य में सोने की कीमत 1,36,500 रुपए प्रति 10 ग्राम और 1,41,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच रहने की उम्मीद है।

शेयर बाजार में तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 102 अंक टूटा

शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 102 अंक टूटा जबकि एनएसई निफ्टी 38 अंक नुकसान में रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव और अमेरिकी शुल्क बढ़ने को लेकर चिंताओं के बीच कारोबारी धारणा प्रभावित होने से बाजार में गिरावट आई।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी बाजार प्रभावित हुआ।

तीस शेयर पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 102.20 अंक यानी 0.12 प्रतिशत टूटकर 84,961.14 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसमें 445.85 अंक यानी 0.52 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी।

पचास शेयर पर आधारित एनएसई निफ्टी 37.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,140.75 अंक पर रहा।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से मारुति, पावर ग्रिड, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स और टाटा स्टील के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहें।

दूसरी ओर, लाभ में रहने वाले शेयर में टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज शामिल हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों और अमेरिका के महत्वपूर्ण रोजगार आंकड़ों से पहले जोखिम से बचने के संकेतों के कारण घरेलू बाजार का माहौल सतर्क बना हुआ है। तिमाही आधार पर कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है लेकिन वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं।’’

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘भारतीय शेयर बाजार आज के सत्र में सुस्त और सतर्क रुख के साथ समाप्त हुए। निवेशकों ने मिश्रित घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाया। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और शुल्क संबंधी नई चिंताओं ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति को सीमित रखा और आक्रामक निवेश को हतोत्साहित किया।’’

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 107.63 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,749.35 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई कम्पोजिट सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्की सूचकांक तथा हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुए।

यूरोप के ज्यादातर प्रमुख बाजारों में दोपहर तक कारोबार में गिरावट का रुख रहा। अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.81 प्रतिशत टूटकर 60.21 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

सेंसेक्स में मंगलवार को 376.28 अंक की गिरावट आई थी जबकि एनएसई निफ्टी 71.60 अंक टूटा था।


देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 6.5 प्रतिशत से अधिक है। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह अनुमान जताया गया।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी राष्ट्रीय आय के प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किए जाने की संभावना है।

मंत्रालय ने कहा, "वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की अनुमानित 7.3 प्रतिशत वृद्धि में सेवा क्षेत्र की मजबूत वृद्धि की प्रमुख भूमिका रही है।"

हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों और ‘बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य जन केंद्रित सेवा’ क्षेत्रों में चालू वित्त वर्ष के दौरान वृद्धि अपेक्षाकृत मध्यम रहने का अनुमान है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद के 2025-26 में आठ प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। राष्ट्रीय आय के अग्रिम अनुमानों का इस्तेमाल केंद्रीय बजट की तैयारी के लिए किया जाता है।

वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है।ौ

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे मजबूत होकर 89.87 पर बंद

रुपया बुधवार को 31 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.87 (अस्थायी) पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.20 पर खुला और 89.75-90.23 के दायरे में कारोबार करने के बाद 89.87 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 31 पैसे अधिक है। रुपया मंगलवार को 12 पैसे की मजबूती के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.18 पर बंद हुआ था।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘‘ रुपये में मजबूती आई... क्योंकि आरबीआई ने 90.23 के स्तर पर डॉलर बेचे जिससे यह संकेत मिला कि मुद्राओं की एकतरफा चाल बाजार में स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल रुपये की दिशा के बारे में कुछ कहना मुश्किल है लेकिन जनवरी में यह 89.50-90.50 के दायरे में रह सकता है।"

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत बढ़कर 98.65 पर रहा।

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