अर्थतंत्र की खबरें: चांदी तीन लाख रुपये के करीब पहुंची, सोना 1.65 लाख रुपये पर और शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद
सोने और चांदी की कीमतों में एक फिर से तेजी देखने को मिली है। इससे सोने का दाम 1.65 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2.98 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है।

कीमती धातुओं ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तेज़ी को बरकरार रखा। इस दौरान चांदी की कीमतें बढ़कर 2.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।
कारोबारियों ने कहा कि मजबूत वैश्विक रुख, कमजोर डॉलर ने इस उछाल में योगदान दिया। पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद डॉलर के कमजोर होने से निवेशकों में बहुमूल्य धातुओं के प्रति रुचि फिर से जगी थी।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 14,300 रुपये, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 2,98,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछली सत्र में चांदी 2,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी तेजी से बढ़ा और 7,400 रुपये या 4.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,65,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया, जबकि मंगलवार को यह 1,57,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा, ‘‘सोने और चांदी ने बुधवार को अपनी तेजी जारी रखी, सोने की कीमतें तीन प्रतिशत से अधिक बढ़ीं और लगभग 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जबकि चांदी में भारी अस्थिरता और सुधार की अवधि के बाद दिन के कारोबार के दौरान छह प्रतिशत तक का उछाल आया।’’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 4.28 डॉलर, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 89.35 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि सोना 100.03 डॉलर, या 2.02 प्रतिशत बढ़कर 5,047.07 डॉलर प्रति औंस हो गया।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक - जिंस, सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से सुरक्षित निवेश की नई खरीदारी के कारण बुधवार को सोने और चांदी में तेजी आई।
आईटी शेयरों में भारी गिरावट, इन्फोसिस सात प्रतिशत टूटा
अमेरिकी बाजारों में प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के अनुरूप बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। इस दौरान इन्फोसिस का शेयर सात प्रतिशत से अधिक लुढ़क जाने से पूरे क्षेत्र पर दबाव बना।
बीएसई पर दिग्गज आईटी सेवा प्रदाता इन्फोसिस का शेयर 7.19 प्रतिशत तक गिर गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 6.95 प्रतिशत, एलटीआईमाइंडट्री में 5.51 प्रतिशत और हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज में 4.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 4.69 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 4.22 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 4.12 प्रतिशत और विप्रो में 3.73 प्रतिशत की गिरावट रही।
इन प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में आई इस बड़ी गिरावट से इन कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये घट गया। बीएसई का आईटी सूचकांक 5.49 प्रतिशत गिरकर 35,109.51 अंक पर बंद हुआ।
ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा, “एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक की तरफ से समूची कार्यप्रणाली को स्वचालित करने वाला टूल पेश किए जाने से यह चिंता बढ़ी कि कृत्रिम मेधा (एआई) में तीव्र प्रगति पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबारी मॉडल को प्रभावित कर सकती है।”
अमेरिकी बाजार में मंगलवार को नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक 1.43 प्रतिशत टूट गया था। आईटी शेयरों की कमजोरी घरेलू बाजार के लिए दबावकारी साबित हुई और बीएसई सेंसेक्स 78.56 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 83,817.69 पर बंद हुआ।
रुपया 11 पैसे टूटकर 90.43 प्रति डॉलर पर
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति की घोषणा के बाद पिछले कारोबारी सत्र में आई तेजी के बाद बुधवार को रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 11 पैसे गिरकर 90.43 (अस्थायी) पर आ गया। यह गिरावट कॉरपोरेट और आयातकों द्वारा डॉलर की संभावित खरीदारी के कारण हुई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति के बाद सकारात्मक माहौल के बावजूद अभी भी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि अभी तक कोई हस्ताक्षरित या आधिकारिक रूप से जारी व्यापार समझौता नहीं हुआ है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.35 पर खुला और कारोबार के दौरान 90.26 के उच्चस्तर तथा 90.54 के निचले स्तर घूमता रहा। अंत में घरेलू मुद्रा 90.43 (अस्थायी) पर बंद हुई, जो पिछले बंद स्तर से 11 पैसे कम है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मंगलवार को सहमति होने के बाद भारतीय रुपया एशिया की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनकर उभरा था। उस दिन रुपये ने एक ही कारोबारी सत्र में 117 पैसे या 1.28 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की थी और अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 90.32 पर बंद हुआ था।
पिछले सत्र में तेज बढ़त के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की शर्तों को लेकर निवेशकों की ओर से अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा के कारण बुधवार को भारतीय रुपया कमजोर पड़ गया।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि उम्मीद से कमजोर सेवा क्षेत्र यानी पीएमआई आंकड़ों के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।
उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते को लेकर आशावाद से मंगलवार को रुपये में तेज उछाल आया था, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में रातोंरात हुई बढ़ोतरी ने इसकी आगे की तेजी को सीमित कर दिया।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia