अर्थतंत्र की खबरें: चुनावी नतीजों से शेयर बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स-निफ्टी चढ़ा और रुपया निचले स्तर पर

चुनाव नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहने से सोमवार को घरेलू शेयर बाजार चढ़कर बंद हुए। सेंसेक्स में 356 अंक की मजबूती रही जबकि निफ्टी 122 अंक चढ़ा।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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प्रमुख कंपनियों में लिवाली आने और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहने से सोमवार को घरेलू शेयर बाजार चढ़कर बंद हुए। सेंसेक्स में 356 अंक की मजबूती रही जबकि निफ्टी 122 अंक चढ़ा।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 355.90 अंक यानी 0.46 प्रतिशत बढ़कर 77,269.40 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 997.25 अंक उछलकर 77,910.75 अंक तक पहुंच गया था।

इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 121.75 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,119.30 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से अदाणी पोर्ट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, इटर्नल और मारुति सुजुकी के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे।

दूसरी तरफ, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और आईटीसी के शेयर नुकसान में रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करते हुए पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के अनुकूल रुझान और चौथी तिमाही के बेहतर नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।"

व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.79 प्रतिशत की बढ़त पर रहा जबकि मझोली कंपनियों के मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक में 0.75 प्रतिशत की तेजी रही।

क्षेत्रवार सूचकांकों में रियल्टी खंड, सेवा, पूंजीगत उत्पाद और औद्योगिक खंड एक प्रतिशत से अधिक बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, आईटी और बैंक खंड में गिरावट रही।

बीएसई पर सूचीबद्ध शेयरों में से 2,607 शेयर बढ़कर बंद हुए जबकि 1,735 शेयरों में गिरावट रही और 216 अन्य अपरिवर्तित रहे।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, "बाजार में आगे भी बढ़त का रुख बने रहने की उम्मीद है। यह कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, मजबूत घरेलू आंकड़े और पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक स्पष्टता पर आधारित रहेगा।"

पश्चिम एशिया संकट: बजट अनुमान से अधिक रह सकती है उर्वरक सब्सिडी

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण आयातित यूरिया और अन्य उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन से अधिक होने का अनुमान है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह यह कहा।

उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम जानते हैं कि कीमतें बढ़ी हैं। यूरिया और अन्य उर्वरकों दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का रुझान दिख रहा है...। निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी, लेकिन अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।’’

शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के बावजूद, खरीफ 2026 सत्र में उर्वरकों की उपलब्धता ‘अच्छी’ और ‘स्थिर’ बनी हुई है।

मार्च-अप्रैल के लिए घरेलू उत्पादन 67.76 लाख टन रहा। इसमें यूरिया (40.72 लाख टन), डाई अमोनियम फॉस्फेट (5.39 लाख टन), एनपीके (13.65 लाख टन) और एसएसपी (8 लाख टन) शामिल हैं। इसके अलावा 17 लाख टन का आयात भी किया गया। यह आयात बंदरगाह और विदेश मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों से संभव हो पाया।

विभाग ने मई महीने के लिए 22 लाख टन यूरिया, 4 लाख टन डीएपी और 8 लाख टन एनपीके के घरेलू उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने बताया कि यूरिया के कुछ ऐसे संयंत्र जो अस्थायी रूप से बंद हो गए थे, वे अब फिर से चालू होने वाले हैं। उनके लिए गैस की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।

यूरिया के आयात के लिए एक वैश्विक निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मई-जून तक इसकी आपूर्ति होने की उम्मीद है। उर्वरकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 19 लाख टन एनपीके उर्वरकों के आयात हेतु एक अलग वैश्विक निविदा भी जारी किया गया है।


रुपया 39 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.23 प्रति डॉलर पर

रुपया सोमवार को 39 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.23 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, तेल की कीमतों में उछाल और मुद्रास्फीति और आर्थिक नरमी की आशंकाएं बढ़ने से घरेलू मुद्रा दबाव में है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि ब्रेंट तेल की कीमत 110 डॉलर के आसपास बनी हुई है जिससे भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं। इसके अलावा, वैश्विक अनिश्चितताओं में वृद्धि के बीच विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी जैसे कारकों ने निवेशकों के विश्वास को और भी कमजोर किया है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.95 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट जारी रही और अंत में 95.23 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से 39 पैसे की गिरावट है।

रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.84 पर बंद हुआ था। ‘महाराष्ट्र दिवस’ के उपलक्ष्य में शुक्रवार को शेयर बाजार और मुद्रा बाजार बंद थे।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही इस वृद्धि और विदेशी पूंजी की निकासी से भारत के व्यापार संतुलन एवं कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दबाव पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘डॉलर की निरंतर मांग से अल्पावधि में रुपये पर दबाव बने रहने के आसार हैं जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया 95.35 से 95.70 के स्तर के बीच रह सकता हे।’’

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.26 पर रहा।

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