अर्थतंत्र की खबरें: शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी और अक्टूबर में 0.25% ब्याज दर बढ़ने के आसार
कच्चे तेल के दाम घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने और बैंकों एवं रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जोरदार लिवाली से स्थानीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे दिन चढ़कर बंद हुए। सेंसेक्स में 685 अंक और निफ्टी में 220 अंक की तेजी रही।

पिछले सप्ताह चारों सत्रों में भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो सत्रों से लगातार जोरदार खरीदारी देखने को मिल रही है। इस बीच आरबीआई एमपीसी की बैठक के नतीजों से पहले मंगलवार को लगातार दूसरे दिन घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों, बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50, में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और इनमें करीब 1 प्रतिशत की तेजी आई।
बाजार बंद होने के समय, सेंसेक्स 685.34 अंक यानी 0.95 प्रतिशत बढ़कर 73,067.81 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776.10 पर पहुंच गया।
निफ्टी50 इंडेक्स में ट्रेंट, बीएसई, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और एचयूएल के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत कोल इंडिया, टेक महिंद्रा, मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, अल्ट्रा टेक सीमेंट, अपोलो हॉस्पिटल और आईटीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 1.08 प्रतिशत और 1.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी केमिकल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर में सबसे ज्यादा यानी 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई, जबकि निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट आई।
बता दें कि बीएसई सेंसेक्स इस सप्ताह 1,000 से अधिक अंक चढ़ा है, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक ने पिछले दो सत्रों में 300 से अधिक अंक जोड़े हैं। सोमवार से आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई है और इसका अंतिम परिणाम कल यानी 7 अक्टूबर को आने वाला है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
अक्टूबर में ब्याज दरों में हो सकती है 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी, महंगाई 5.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान: रिपोर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) में ब्याज दरों को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है। साथ ही, कहा गया कि अगले कुछ महीनों में बैंकिंग सिस्टम से 6 लाख करोड़ रुपए की तरलता हटाने की आवश्यकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई दर अगस्त में 4.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में लगभग 5.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है और 2026 की चौथी तिमाही में यह औसतन 6 प्रतिशत से थोड़ी अधिक हो सकती है।
6 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त तरलता में से, लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत को सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी से पूरा किया जा सकता है, जबकि बाकी हिस्से को ओपन मार्केट ऑपरेशन सेल्स, फॉरेन-एक्सचेंज स्पॉट सेल्स, एफएक्स स्वैप और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे मौजूदा तरीकों से मैनेज किया जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी में कमी धीरे-धीरे होने की संभावना है, जब तक कि कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) बढ़ाने जैसे कड़े उपायों का इस्तेमाल न किया जाए।
रिपोर्ट में कहा गया, "मुख्य महंगाई में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह सर्विस सेक्टर में महंगाई है। हमारा अनुमान है कि अगले 12 महीनों में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ज्यादा रहेगी।"
रिपोर्ट में बाहरी हालात को चिंताजनक बताया गया है, क्योंकि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं और 2027 के लिए तेल की कीमत का अनुमान 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। तेल की ऊंची कीमतें, साथ ही ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर का मजबूत होना, आमतौर पर उभरते बाजारों में पूंजी के प्रवाह के लिए अच्छा नहीं होता है और हाल ही में देश में पूंजी की निकासी भी देखी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना बेहद जरूरी, घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम: सऊदी अरामको सीईओ
सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा।
नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।
रुपया शुरुआती कारोबार में चार पैसे टूटकर 96.39 प्रति डॉलर पर
रुपया मंगलवार को शुरुआती कारोबार में चार पैसे टूटकर 96.39 प्रति डॉलर पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी से घरेलू मुद्रा पर दबाव है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि हालांकि घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख और डॉलर सूचकांक में कमजोरी ने रुपये को निचले स्तर पर समर्थन दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.29 प्रति डॉलर पर खुला। बाद में टूटकर 96.39 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से चार पैसे की गिरावट है।
रुपया सोमवार को 10 पैसे टूटकर 96.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 102.12 पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 0.23 प्रतिशत बढ़कर 100.6 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 120.22 अंक चढ़कर 72,535.41 अंक पर और निफ्टी 47.15 अंक की बढ़त के साथ 22,603.10 अंक पर आ गया।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को शुद्ध रूप से 4,699.14 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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