अर्थतंत्र की खबरें: आईटी शेयरों में कमजोरी से लुढ़का शेयर बाजार और RBI ने सोना बेचने की दावों को नकारा

सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,346.17 और निफ्टी 77.95 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,405.60 पर बंद हुआ।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहा। दिन के दौरान बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली, लेकिन सत्र के आखिर में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से निचले स्तरों से रिकवरी हुई।

सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,346.17 और निफ्टी 77.95 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,405.60 पर बंद हुआ।

दिन के दौरान बाजार पर दबाव बनाने का काम आईटी शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी 5.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ टॉप लूजर था। निफ्टी रियल्टी 1.39 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.01 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 0.59 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.35 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांक थे।

बैंकिंग शेयर ने बाजार में निचले स्तरों से रिकवरी को सहारा दिया। निफ्टी बैंक 0.88 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। निफ्टी हेल्थकेयर 0.54 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.38 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.38 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे।

सेंसेक्स पैक में टीसीएस 8.43 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 6.23 प्रतिशत, एचसीएल टेक 5.25 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.82 प्रतिशत और आईटीसी 2.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष पांच गिरने वाले शेयरों में शामिल थे।

दूसरी तरफ इंडिगो 1.57 प्रतिशत, एसबीआई 1.43 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 1.30 प्रतिशत, ट्रेंट 1.13 प्रतिशत और पावर ग्रिड 1.01 प्रतिशत की मजबूती के साथ शीर्ष पांच बढ़ने वाले शेयरों में शामिल थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,687.20 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 20.25 अंक या 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,032.05 पर था।

आरबीआई ने सोना बेचने की खबरों को बताया गलत, कहा- देश के पास अब भी 880.52 टन गोल्ड रिजर्व सुरक्षित

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने अपने स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) का एक हिस्सा बेच दिया है। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार पहले की तरह 880.52 टन ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

आरबीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि रिजर्व बैंक ने सोना बेचा है, लेकिन यह जानकारी सही नहीं है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसके स्वर्ण भंडार से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से मासिक बुलेटिन में प्रकाशित की जाती है और वर्तमान में भौतिक सोने का स्टॉक 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है।

आरबीआई ने कहा कि उसके स्वर्ण भंडार का पूरा विवरण मासिक बुलेटिन में उपलब्ध रहता है, जिसे कोई भी व्यक्ति आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकता है। बैंक ने दोहराया कि अभी तक सोने के भौतिक भंडार में कोई कमी नहीं आई है।

केंद्रीय बैंक ने लोगों से अपील की कि वे इस तरह की खबरों पर भरोसा करने के बजाय आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें।

इस मामले पर प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी स्पष्टीकरण जारी किया। पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है, जबकि यह दावा पूरी तरह फर्जी है।


वैश्विक तनाव के बीच कीमती धातुओं में गिरावट; चांदी 1,300 रुपए फिसली

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। बुधवार के कारोबारी सत्र में घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,59,346 रुपए से 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,59,447 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं जुलाई वायदा चांदी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,66,668 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली।

वहीं खबर लिखे जाने तक (सुबह 11:36 बजे के करीब) 5 अगस्त कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 0.24 प्रतिशत यानी 390 रुपए की गिरावट के साथ 1,58,956 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं दूसरी ओर 3 जुलाई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 0.49 प्रतिशत यानी 1,307 रुपए की गिरावट के साथ 2,65,400 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका-ईरान संघर्ष के और तेज होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से निवेशकों का रुझान सोने की ओर सीमित रहा।

स्पॉट गोल्ड 0.2 प्रतिशत गिरकर 4,476.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4,504.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। स्पॉट सिल्वर भी 0.5 प्रतिशत टूटकर 74.73 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

आरबीआई की तीन दिवसीय एमपीसी बैठक आज से शुरू, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर रहेगी नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे।

जून की मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे आर्थिक परिदृश्य और अधिक जटिल हो गया है।

हालांकि, अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई इस बार ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए उसके बयान का रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क या सख्त हो सकता है।

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की नीति अपना सकता है, लेकिन समय के साथ कुछ सख्ती की संभावना भी बन सकती है।

उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल 2026 की चौथी तिमाही से लगभग दो बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना देख रहा है, न कि किसी बड़े स्तर की सख्ती की।

भंडारी के मुताबिक, आरबीआई के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा, खासकर इस बात पर कि वह ऊर्जा क्षेत्र में जारी झटकों का आकलन कैसे करता है और क्या वह कच्चे तेल की औसत कीमत का अपना अनुमान पहले के लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि यदि तेल की कीमतों का आधारभूत अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान भी पहले के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

वहीं, केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम मानसून की आशंका और हाल में ईंधन की खुदरा कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थोक महंगाई में वृद्धि का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेजी से पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की वजह से हो रही है, न कि मांग बढ़ने के कारण।

केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे।

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच जाती हैं, तो आर्थिक वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत रह सकती है।


रुपया 31 पैसे कमजोर होकर 95.67 प्रति डॉलर पर

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा श्रम उल्लंघनों का हवाला देते हुए भारतीय आयात पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बुधवार को रुपया 31 पैसे टूटकर 95.67 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि डॉलर की मजबूत मांग, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और विदेशी कोषों की भारी निकासी ने भी निवेशकों के विश्वास को और कमजोर कर दिया है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.43 के भाव पर खुला और कारोबार के दौरान 95.80 के निचले स्तर पर रहा और कारोबार के अंत में 95.67 (अस्थायी) पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 31 पैसे की गिरावट है। मंगलवार को रुपया 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और शांति वार्ता रुकने के बीच यूएसटीआर की कार्रवाई ने निवेशकों के जोखिम लेने की धारणा पर नकारात्मक असर डाल रही है।

यूएसटीआर ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित उत्पादों के आयात पर रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।

इस बीच, निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है।

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