अर्थतंत्र की खबरें: अमेरिकी शुल्क की चिंता से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट और सोने-चांदी के दाम भी लुढ़के
अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 780 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी को 264 अंकों का बड़ा नुकसान हुआ।

वैश्विक बाजारों में व्यापक बिकवाली और अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 780 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी को 264 अंकों का बड़ा नुकसान हुआ।
विश्लेषकों के मुताबिक, धातु, तेल एवं गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 851.04 अंक तक गिरकर 84,110.10 के स्तर तक आ गया था।
वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 263.90 अंक यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और ट्रेंट सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं।
दूसरी तरफ, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऐसे प्रतिबंधात्मक विधेयक का समर्थन किए जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।
इस विधेयक को पेश करने की तैयारी में जुटे सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि इससे अमेरिका को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करने का दबाव बनाने के लिए 'जबर्दस्त ताकत' मिलेगी।
अमेरिकी प्रशासन पिछले साल अगस्त में ही भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को बड़ाकर 50 प्रतिशत कर चुका है। इसमें से 25 प्रतिशत शुल्क रूसी तेल खरीद जारी रखने के जुर्माने के तौर पर लगाया गया था।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "अमेरिकी शुल्क को लेकर नई चिंताओं और एफआईआई की लगातार बिकवाली के चलते घरेलू बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे मुनाफे की उम्मीदें फीकी पड़ गईं।"
वायदा कारोबार में लगातार दूसरे दिन सोने, चांदी की कीमतों में गिरावट
वायदा कारोबार में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी रोजगार के महत्वपूर्ण आंकड़े आने से पहले निवेशकों की मुनाफावसूली से दोनों के भाव नीचे आए।
विश्लेषकों का कहना है कि रोजगार के आंकड़े फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण पर नए संकेत प्रदान करेंगे।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में फरवरी में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंधों का वायदा भाव 896 रुपये यानी 0.65 प्रतिशत टूटकर 1,37,113 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसमें 14,957 लॉट के लिए कारोबार हुआ।
कारोबारियों के सर्तक रहने के कारण एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव में भी भारी बिकवाली देखी गई। मार्च में आपूर्ति वाले चांदी के अनुबंधों की कीमत 7,365 रुपये यानी 2.94 प्रतिशत फिसलकर 2,43,240 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इसमें 12,295 लॉट का कारोबार हुआ।
रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा, ‘‘ सोने और चांदी में पिछले सत्र की तुलना में गिरावट जारी रही क्योंकि निवेशकों ने मिले-जुले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का आकलन किया जबकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बने रहे। ’’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स में फरवरी में आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,432.80 डॉलर प्रति औंस रहा। दूसरी ओर चांदी के मार्च में आपूर्ति वाले अनुबंध की वायदा कीमत 2.84 प्रतिशत टूटकर 75.41 डॉलर प्रति औंस पर रही।
रुपया सात पैसे टूटकर 89.94 प्रति डॉलर पर बंद
रुपया बृहस्पतिवार को सात पैसे टूटकर 89.94 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर के मजबूत रुख से घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिका के अधिक शुल्क लगाए जाने की आशंका और घरेलू शेयर बाजारों में कमजोर रुख ने स्थानीय मुद्रा पर और दबाव डाला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 89.96 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान 89.73 से 90.13 प्रति डॉलर के बीच इसने कारोबार किया। अंततः यह 89.94 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से सात पैसे की गिरावट है।
रुपया बुधवार को 31 पैसे चढ़कर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.87 पर बंद हुआ था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘‘ अगर अमेरिका शुल्क में 0.1 प्रतिशत की भी बढ़ोतरी करता है तो भारत को अपने निर्यात में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि भावनात्मक रूप से स्थिति ‘समझौते के करीब’ होने से ‘फिर से शुरुआत’ करने जैसी हो जाएगी। वहीं बाजार में केंद्रीय बैंक की ‘शॉर्ट सेलिंग’ से डॉलर की खरीदारी का माहौल बना रहेगा।’’
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को रुपये के 89.80 से 90.30 के बीच रहने का अनुमान है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.70 पर रहा।
घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स 780.18 अंक टूटकर 84,180.9 अंक जबकि निफ्टी 263.90 अंक फिसलकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60.47 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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