अर्थतंत्र की खबरें: इजरायल-ईरान युद्ध से सोने-चांदी की कीमतें बेलगाम और युद्ध के तनाव ने इन कंपनियों की तोड़ी कमर

इजरायल-ईरान युद्ध के चलते सोने और चांदी की कीमतों में बेतहासा बढ़ोतरी हुई है। सोना 8 हजार रुपए से अधिक महंगा हो गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी 23 हजार रुपए से अधिक का इजाफा हुआ।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

इजरायल-ईरान युद्ध के चलते सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बढ़ी तेजी देखी गई। इससे सोना 8 हजार रुपए से अधिक महंगा हो गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी 23 हजार रुपए से अधिक का इजाफा हुआ।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए)के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 8,374 रुपए बढ़कर 1,67,471 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि शुक्रवार को 1,59,097 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 22 कैरेट सोने की कीमत 1,45,733 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,53,403 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।

18 कैरेट सोने की कीमत 1,19,323 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,25,603 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। चांदी का दाम 23,148 रुपए बढ़कर 2,89,848 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,66,700 रुपए प्रति किलो था।

हाजिर के साथ वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 4.09 प्रतिशत बढ़कर 1,68,740 रुपए हो गई है। चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 4.49 प्रतिशत बढ़कर 2,95,336 रुपए हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 2.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 5,397 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.90 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.09 डॉलर प्रति औंस पर थी।

सोने और चांदी में तेजी की वजह इजरायल-ईरान के साथ पूरे मध्यपूर्व का युद्ध में जाना है। इससे सोने में सुरक्षित खरीदारी को बढ़ावा मिला है।

ईरान संकट से भारत का खाद्य तेल और उर्वरक आयात प्रभावित होगा

उद्योग संगठनों ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बढ़ने से भारत के खाद्य योग्य सूरजमुखी तेल और ज़रूरी उर्वरकों के आयात में रुकावट आ सकती है, जबकि पश्चिम एशिया और यूरोप को कृषि जिंसों का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।

पोत परिवहन कंपनियों ने पश्चिम एशिया से गुज़रने वाले मालवाहक पोतों (कार्गो) पर आपात संघर्ष अधिभार लगाना शुरू कर दिया है, जिसमें फ्रांस की कंटेनर क्षेत्र की बड़ी कंपनी सीएमए सीजीएम प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर से 4,000 डॉलर के बीच अधिभार लगा रही है, जिससे आयात की लागत बढ़ रही है।

घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (एसएफआईए) के अध्यक्ष, राजीब चक्रवर्ती ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘पश्चिम एशिया को निर्यात अभी रुका हुआ है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लड़ाई के जारी रहने के साथ, जोखिम भी बढ़ेगा और शिपिंग कंपनियां बीमा अधिभार लगा सकती हैं, जिससे आयात महंगा हो जाएगा।’’

चक्रवर्ती ने जून में शुरू होने वाले भारत के खरीफ बुवाई सत्र से पहले डीएपी और एसएसपी उर्वरक बनाने के लिए ज़रूरी आदान की आपूर्ति पर चिंता जताई। कतर, सयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान मिलकर भारत के गंधक (सल्फर) आयात का 76 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘इतने सारे बंदरगाह बंद होने से जाम लगेगा और कंटेनर की कमी हो जाएगी।’’


पश्चिम एशिया संकट से विमानन, टूर ऑपरेटर कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई क्षेत्र बंद होने से विमानन एवं यात्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयर सोमवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विमान ईँधन एटीएफ के महंगा होने की आशंका से निवेशकों ने इन शेयरों में मुनाफावसूली की।

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो का परिचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन का शेयर बीएसई पर कारोबार में 7.50 प्रतिशत तक लुढ़कने के बाद 6.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

स्पाइसजेट एयरलाइन के शेयर में भी 9.20 प्रतिशत तक की गिरावट आई और यह 5.72 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

ऑनलाइन ट्रैवल कंपनियों में यात्रा ऑनलाइन 9.59 प्रतिशत टूट गया, ईजी ट्रिप प्लानर्स में 7.08 प्रतिशत, टीबीओ टेक में 4.04 प्रतिशत, थॉमस कुक इंडिया में 3.57 प्रतिशत और ली ट्रेवेन्यूज टेक्नोलॉजी के शेयर में 2.08 प्रतिशत की गिरावट रही।

बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,743.46 अंक यानी 3.37 प्रतिशत टूटकर 78,543.73 अंक पर आ गया था। हालांकि, निचले स्तर पर खरीदारी आने से अंत में यह 1,048.34 अंक यानी 1.29 प्रतिशत के नुकसान के साथ 80,238.85 अंक पर बंद हुआ।

इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिससे उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खासकर खाड़ी देशों के प्रमुख विमानन केंद्रों के जरिये भारत-यूरोप मार्ग पर उड़ानों में व्यवधान की स्थिति बनी है।

रुपया 42 पैसे की भारी गिरावट के साथ 91.50 प्रति डॉलर पर

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा प्रबल होने से सोमवार को रुपया 42 पैसे की भारी गिरावट के साथ 91.50 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इन सैन्य हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और अमेरिकी मुद्रा की मांग में तीव्र वृद्धि हुई है।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी कोषों की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव को और बढ़ा दिया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.23 पर खुला और कारोबार के दौरान इसने 91.65 का निचला स्तर छुआ। अंत में रुपया पिछले बंद भाव के मुकाबले 42 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 91.50 (अस्थायी) पर बंद हुआ। शुक्रवार को रुपया 17 पैसे टूटकर 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।


तीसरी तिमाही में चालू खाते का घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर : आरबीआई

भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.3 प्रतिशत हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था। यह वृद्धि मुख्य रूप से व्यापार घाटे में वृद्धि के कारण हुई है।

हालांकि, चालू खाते का घाटा अप्रैल-दिसंबर, 2025 की अवधि में घटकर 30.1 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 36.6 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, "भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था।

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