अर्थतंत्र की खबरें: रुपया टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा और शेयर बाजार में उठापटक जारी
डॉलर के मुकाबले रुपया 96.89 पर खुला, फिर और कमज़ोर होकर 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर और 96.65 के उच्चतम स्तर को छुआ, और अंत में 96.83 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट है।

लगातार नौवें सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को 13 पैसे टूटकर 96.83 (अस्थायी) के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, डॉलर के मुकाबले रुपया 96.89 पर खुला, फिर और कमज़ोर होकर 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर और 96.65 के उच्चतम स्तर को छुआ, और अंत में 96.83 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट है। पिछले सत्र में, रुपया 50 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 96.70 पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान में शोध विश्लेषक, जिंस शोध अनुज चौधरी ने कहा, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में उछाल के कारण भारतीय रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुच गया, जबकि 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल 16 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके कारण महंगाई की चिंताएं बढ़ीं और वैश्विक बाजारों में बिकवाली हुई, जिससे बाजार जोखिम से बचने की कोशिश करने लगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि महंगाई की चिंताओं के बीच वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण रुपया नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा। मजबूत डॉलर और बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ाया है और ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों को कम किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘डॉलर-रुपये की हाजिर कीमत के 96.5 रुपये से 97.10 रुपये के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है।’’
रुपये में आई भारी गिरावट नीति निर्माताओं, निवेशकों और कारोबारियों के लिए सबसे बड़े आर्थिक चेतावनी संकेतों में से एक बनकर उभरी है। रुपया इस साल उभरते बाजारों की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा है। इस पर महंगे तेल, पूंजी की निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत होते डॉलर के खतरनाक मेल का दबाव है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स 99.42 पर कारोबार कर रहा था।
भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 118 अंक उछला
पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के चलते बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार उतार-चढ़ाव के बाद मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। इस दौरान, सेंसेक्स 117.54 अंकों यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,318.39 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 50 41 अंकों यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,659 पर बंद हुआ।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 74,806.49 पर खुलकर 75,406.18 का इंट्रा-डे हाई और 74,529.41 का लो बनाया। वहीं एनएसई निफ्टी 23,457.25 पर खुलकर 23,690.90 का दिन का हाई और 23,397.30 का लो बनाया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इेंडेक्स में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, ऑयल एंड गैस में सबसे ज्यादा 1.59 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी मीडिया में 1.45 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में भी गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी50 इंडेक्स में हिंडाल्को, बजाज-ऑटो, ग्रासिम, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, विप्रो और इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत बीईएल, टेक महिंद्रा, इटरनल, टाटा स्टील, एसबीआई लाइफ और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
इस दौरान, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 459 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 461 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को इस सत्र में करीब 2 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिली है, जिससे उनके मुनाफे की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। वहीं दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड, जो इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम एशिया तनाव के कारण 111-112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, कारोबार के दौरान घटकर 105-106 डॉलर के आसपास आ गया।
भारत में एआई नौकरियों की मांग में जबरदस्त उछाल, 2019 के मुकाबले लगभग 6 गुना बढ़ीं जॉब पोस्टिंग: रिपोर्ट
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी नौकरी की पोस्टिंग 2019 के मुकाबले लगभग छह गुना बढ़ गई है। बुधवार को जारी स्ट्रैटेजी कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत तेजी से वैश्विक एआई टैलेंट और एआई कार्यान्वयन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई-आधारित भर्ती में तेजी आने से भारत के ऑफिस बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले वर्षों में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग में भी मजबूत बढ़ोतरी होने की संभावना है।
'एआई एंड द फ्यूचर ऑफ फ्लेक्सिबल वर्कस्पेसेस' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2030 के बीच भारत के नॉलेज-इकोनॉमी ऑफिस स्पेस में लगभग 7.9 करोड़ वर्ग फुट अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है। यह मांग एआई से पहले अनुमानित वृद्धि से भी ज्यादा होगी।
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एसोसिएट पार्टनर छवि सिंह ने कहा, "अब तक एआई को लेकर चर्चा मुख्य रूप से रोजगार पर पड़ने वाले असर तक सीमित थी, लेकिन जमीन पर हम ऑफिस स्पेस के उपयोग के तरीके में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "एआई-आधारित टीमें अब ज्यादा विशेषज्ञता वाली, सहयोग आधारित और तेजी से बदलने वाली हो गई हैं। इससे 'कोर प्लस फ्लेक्स' वर्कप्लेस मॉडल की मांग बढ़ रही है, जहां कंपनियां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों के अनुभव से समझौता किए बिना लचीलापन चाहती हैं।"
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 तक एआई से जुड़ी जॉब पोस्टिंग 2.9 लाख के पार पहुंच गई हैं। इसकी मुख्य वजह मशीन लर्निंग, जेनरेटिव एआई और एमएल ऑप्स जैसे क्षेत्रों में प्रतिभाओं की बढ़ती मांग है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई टैलेंट कंसंट्रेशन ग्रोथ के मामले में भारत अब दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर एआई में बढ़ता निवेश है, जो लगभग 582 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने पहले भी तकनीकी बदलावों को रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों में बदला है।
भारत का ऑफिस स्पेस 2025 तक बढ़कर लगभग 91.5 करोड़ वर्ग फुट हो गया है, जबकि कुल रोजगार संख्या करीब 33 करोड़ कामगारों तक पहुंच चुकी है।
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