अर्थतंत्र की खबरें: बेरोजगारी दर दिसंबर में 4.8 प्रतिशत पर पहुंची और शेयर बाजार में सेबी की बड़ी तैयारी
बेरोजगारी दर दिसंबर महीने में मामूली रूप से बढ़कर 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि नवंबर में यह 4.7 प्रतिशत थी। बृहस्पतिवार को सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

देश में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के बीच बेरोजगारी दर दिसंबर महीने में मामूली रूप से बढ़कर 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि नवंबर में यह 4.7 प्रतिशत थी। बृहस्पतिवार को सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी 'आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण' (पीएलएफएस) रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि शहरी महिलाओं में यह 9.3 प्रतिशत से घटकर 9.1 प्रतिशत पर आ गई।
दिसंबर महीने में देश के कुल श्रमबल में हल्की बढ़त देखी गई और कुल कार्यशील जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 53.2 प्रतिशत से बढ़कर 53.4 प्रतिशत हो गया।
ग्रामीण पुरुषों का डब्ल्यूपीआर 75.4 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत रहा, जबकि शहरी पुरुषों में यह 70.9 प्रतिशत से 70.4 प्रतिशत पर आ गया।
ग्रामीण महिलाओं का डब्ल्यूपीआर 38.4 प्रतिशत से बढ़कर 38.6 प्रतिशत हो गया जबकि शहरी महिलाओं का कार्यशील जनसंख्या अनुपात लगभग 23 प्रतिशत पर स्थिर रहा।
आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.8 प्रतिशत से बढ़कर 56.1 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 50.4 प्रतिशत से घटकर 50.2 प्रतिशत रही।
सेबी की बड़ी तैयारी, अनलिस्टेड शेयर बाजार में आएगा बड़ा बदलाव
भारत के अनलिस्टेड शेयर बाजार में बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि बाजार नियामक सेबी इस बाजार को रेगुलट करने पर विचार कर रहा है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को कहा कि नियामक विचार कर रहा है कि उसे अनलिस्टेड स्टॉक मार्केट को रेगुलेट करना चाहिए या नहीं, जो कि फिलहाल सेबी के कार्यक्षेत्र से बाहर है।
देश की आर्थिक राजधानी में एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया के 2025-26 के वार्षिक सम्मेलन के दौरान बोलते हुए, सेबी प्रमुख ने कहा कि इस मुद्दे पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ चर्चा की जा रही है।
उन्होंने विस्तार से बताया,"सबसे पहले सेबी को यह जांच करनी होगी कि क्या उसके पास उन कंपनियों को विनियमित करने का कानूनी अधिकार है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हैं और इस तरह का विनियमन कितनी हद तक विस्तारित हो सकता है।"
अनलिस्टेड स्टॉक मार्केट में वह कंपनियां शामिल होती हैं, जो कि फिलहाल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं है।
मौजूदा समय में ज्यादातर निवेशक अनलिस्टेड शेयरों को प्राइवेट डील, कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन प्लान और अन्य बिचौलियों से खरीदते हैं। यह कंपनियां सूचीबद्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें सख्त और निरंतर प्रकटीकरण नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, जिसके कारण निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति और व्यावसायिक जोखिमों के बारे में सीमित या देरी से जानकारी ही मिल पाती है।
पांडे ने कहा कि सेबी की मुख्य चिंताओं में से एक अनलिस्टेड मार्केट में कीमतों और कंपनियों द्वारा प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) जारी करने पर सामने आने वाले मूल्यांकनों के बीच बड़ा अंतर होना है।
उन्होंने कहा, “निजी सौदों में तय की गई कीमतें अकसर आईपीओ बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के दौरान पता चली कीमतों से मेल नहीं खातीं, जिससे निवेशकों के लिए भ्रम और संभावित जोखिम पैदा होते हैं।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पहली किस्त जल्द होगी साइन: वाणिज्य सचिव
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) की पहली किस्त (ट्रांश) को लेकर सहमति लगभग बन चुकी है और इसे जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि, इस पर हस्ताक्षर की कोई तय समयसीमा अभी नहीं दी जा सकती। यह जानकारी गुरुवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने दी।
उन्होंने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी। इसके बाद से दोनों देशों की वार्ता टीमें लगातार संपर्क में हैं और सहमति बनाने की दिशा में बातचीत जारी है।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि इस व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ में राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में अमेरिका ने अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया हुआ है, जो दुनिया में सबसे अधिक में से एक है।
अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात सकारात्मक बना रहेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की खेप, जो फिलहाल टैरिफ से मुक्त है, निर्यात को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है, हालांकि अन्य क्षेत्रों पर ऊंचे शुल्क का असर अब भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं और बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia