अर्थतंत्र की खबरें: पेट्रोल-डीजलों की कीमतों में बढ़ोतरी से थोक महंगाई में आया उछाल और शेयर बाजार बड़ी तेजी
आईसीआरए में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि थोक महंगाई में वृद्धि व्यापक आधार पर थी, जिसमें क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस के साथ ईंधन एवं ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।

पेट्रोल और डीजलों की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत में थोक महंगाई दर में मार्च में उछाल देखने को मिला है और इससे आने वाले में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। यह जानकारी अर्थशास्त्रियों की ओर से बुधवार को दी गई।
आईसीआरए में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि थोक महंगाई में वृद्धि व्यापक आधार पर थी, जिसमें क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस के साथ ईंधन एवं ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई।
उन्होंने आगे कहा,"मार्च 2026 में फरवरी 2026 की तुलना में मुख्य महंगाई में 175 आधार अंकों की वृद्धि में से 150 आधार अंकों का योगदान संयुक्त रूप से इन दोनों समूहों का था।
अग्रवाल ने आगे कहा कि मार्च में खाद्य महंगाई दर 1.8 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई फरवरी के 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 41 महीनों के उच्चतम स्तर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई।
उन्होंने आगे कहा कि क्रमिक आधार पर, मार्च में मुख्य सूचकांक में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले तीन महीनों के औसत के अनुरूप है।
अर्थशास्त्री ने बताया कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की अधिक कीमतें और उसके साथ शिपिंग, माल ढुलाई और इनपुट लागत में बढ़ोतरी के कारण आयात लागत में इजाफा हो सकता है। इससे अप्रैल में थोक महंगाई में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ताजा थोक महंगाई डेटा पश्चिम एशिया संकट के अधिक गंभीर प्रभाव को दर्शाता है, जिसमें खुदरा महंगाई की तुलना में अधिक तीव्र वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने कहा, "यह अंतर थोक डीजल और अन्य वाणिज्यिक ईंधन की कीमतों में तीव्र वृद्धि के कारण है, जबकि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रही हैं।"
उन्होंने बताया कि रिफाइनरियों ने मार्च में थोक डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की, जबकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपए और वाणिज्यिक सिलेंडरों की कीमत में कुल 310 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई।
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया संकट के शीघ्र समाधान के बावजूद, वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें औसतन 85-90 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा, "वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का बोझ परिवारों, सरकार और तेल विपणन कंपनियों पर पड़ेगा।"
अमेरिका-ईरान वार्ता बहाल होने की संभावना से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,264 अंक चढ़ा
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता की उम्मीदों के बीच घरेलू शेयर बाजार बुधवार को बड़ी बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,264 अंक चढ़ गया, जबकि निफ्टी में 389 अंक की तेजी रही।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,263.67 अंक यानी 1.64 प्रतिशत चढ़कर 78,111.24 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय यह 1,422.85 अंक चढ़कर 78,270.42 अंक तक पहुंच गया था।
वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 388.65 अंक यानी 1.63 प्रतिशत बढ़कर 24,231.30 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन (यानी इंडिगो), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टेक महिंद्रा, टीसीएस और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख रूप से बढ़त में रहीं। दूसरी तरफ, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में गिरावट रही।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड पश्चिम एशिया तनाव कम होने के संकेतों के बीच गिरकर 95.74 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया। तेल कीमतों में गिरावट से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध ‘समाप्ति के करीब’ है और दोनों देशों के बीच वार्ता फिर शुरू होने की संभावना है। मीडिया की खबरों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है।
रुपया नौ पैसे टूटकर 93.44 प्रति डॉलर पर
रुपया बुधवार को शुरुआती बढ़त गंवाकर नौ पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.44 (अस्थायी) पर रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद हुई बढ़ोतरी और घरेलू मुद्रास्फीति के उच्च आंकड़ों के कारण बाजार का रुझान कमजोर हुआ।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.19 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 93.13 के उच्च स्तर तक पहुंचा। अंततः यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.44 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से नौ पैसे की गिरावट है।
रुपया सोमवार को 52 पैसे कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.35 पर बंद हुआ था। ‘आंबेडकर जयंती’ के मौके पर मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाजार बंद थे।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा) जतीन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘ रुपया होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है...निकट भविष्य में, रुपये के 93.10 से 93.65 के दायरे में कारोबार करने के आसार हैं। इसकी दिशा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।’’
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.5 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 97.95 पर रहा।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 1,263.67 अंक या 1.64 प्रतिशत चढ़कर 78,111.24 अंक पर जबकि निफ्टी 388.65 अंक या 1.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,231.30 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.21 डॉलर प्रति बैरल रहा।
भू-राजनीतिक तनावों के बीच मार्च में गोल्ड ईटीएफ में जोरदार उछाल
भले ही फिजिकल सोने की मांग मजबूत रही हो, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सोने में निवेश तेजी से बढ़ा है। गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अब रिटेल और संस्थागत निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं। मार्च 2026 में इनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 1,71,468.4 करोड़ रुपए हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना है।
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में 64.76 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) को दर्शाता है। मार्च 2021 में यह एयूएम सिर्फ 14,122.72 करोड़ रुपए था।
सालाना आधार पर देखें तो मार्च 2025 के 58,887.99 करोड़ रुपए के मुकाबले एयूएम में 191.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो बताता है कि भारत में गोल्ड से जुड़े निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं।
मार्च 2026 में गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश (इनफ्लो) 2,265.68 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले साल इसी समय 77.21 करोड़ रुपए की निकासी (आउटफ्लो) हुई थी। वहीं मार्च 2021 में यह इनफ्लो सिर्फ 662.45 करोड़ रुपए था।
हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर इनफ्लो में गिरावट देखी गई। फरवरी 2026 के 5,254.95 करोड़ रुपए के मुकाबले मार्च में यह 56.88 प्रतिशत घट गया। इसकी वजह सोने की कीमतों में थोड़े समय के लिए गिरावट और वैश्विक जोखिम में कमी बताई गई है।
आईसीआरए एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केट डेटा के हेड अश्विनी कुमार ने कहा कि निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने के पीछे दो बड़े कारण हैं; पहला, वैश्विक अनिश्चितता और दूसरा, सोने की मजबूत कीमतें।
उन्होंने बताया कि हाल के समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सोने की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनाया है।
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