विफलताओं को छिपाने की कोशिश के बावजूद आर्थिक सर्वेक्षण ने खोली मोदी सरकार की पोलः कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा कि संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19, बीजेपी सरकार के बड़े-बड़े दावों की कलई खोल रहा है, हालांकि इसके जरिये बीजेपी सरकार की पिछले पांच वर्षों की भारी विफलताओं और आर्थिक कुप्रबंधन पर पर्दा डालने की असफल कोशिश की गई है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आसिफ एस खान

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि इससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े हवा-हवाई दावों की पोल खुल गई है। अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी का आर्थिक कुप्रबंधन शून्य नौकरियां, शून्य निवेश और शून्य विकास के तीन सोपानों पर टिका हुआ है। सुरजेवाला ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 अर्थव्यवस्था के संबंध में निराशावादी दृष्टिकोण दर्शाता है और आर्थिक मोर्चे पर सत्तारूढ़ पार्टी को गहन निद्रा से जगाने का एक कमजोर प्रयास करता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आर्थिक सर्वेक्षण पर कहा कि इस आर्थिक समीक्षा में क्षेत्रावार विकास को लेकर कोई अनुमान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि धीमी विकास दर, राजस्व में गिरावट, वित्तीय घाटे के लक्ष्य से कोई समझौता किए बिना संसाधन हासिल करने और चालू खाते पर तेल कीमतों के असर की बात करें तो इनमें कुछ भी सकारात्मक और उत्साहजनक नहीं है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा कि आज संसद के पटल पर रखा गया आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19, बीजेपी सरकार के बड़े-बड़े दावों की कलई खोल रहा है, हालांकि इसके जरिये बीजेपी सरकार की पिछले पांच वर्षों की भारी विफलताओं और आर्थिक कुप्रबंधन पर पर्दा डालने की असफल कोशिश की गई है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक समीक्षा ने गहरा रही आर्थिक अनिश्चितताओं और बीजेपी सरकार के कुप्रबंधन के अंश मात्र को प्रदर्शित किया है।

सुरजेवाला ने देश में गहरा रहे राजगार संकट का जिक्र करते हुए कहा कि नौकरियों के सृजन के लिए छोटी फर्मों की सहायता करने जैसे वाक्याशों को छोड़कर, बेरोजगारी की विकराल समस्या से निपटने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण में कोई रोडमैप है ही नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘देश में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है जो पिछले 45 वर्षों के सबसे उच्चतम स्तर पर है। चुनाव के बाद बीजेपी सरकार ने आधिकारिक तौर पर एनएसएसओ के आंकड़ों का अनुमोदन कर दिया है।”

उन्होंने जीडीपी का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2020 के लिए 7 प्रतिशत दर्शाता है, परंतु इसके लिए कोई ठोस आधार नहीं है। इसके अलावा सर्वेक्षण क्षेत्रवार विकास आंकलनों के संबंध में कोई परिकल्पना नहीं दर्शाता है। देश का आर्थिक विकास 5 वर्ष के निम्नतम स्तर पर है। चार तिमाहियों में यह 8.0, 7.0, 6.6 तथा 5.8 प्रतिशत रही। अप्रेल-जून 2019 के दौरान इसमें और गिरावट आने की संभावना है।

देश में निवेश में बारी कमी का जिक्र करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि देश में नया निवेश 15 वर्ष के न्यूनतम स्तर पर है। सार्वजनिक क्षेत्र की नवीन परियोजनाएं आज तक के सर्वोच्च 26 प्रतिशत के स्तर पर रुकी हुई है। निर्माण के क्षेत्र में निजी निवेश को सर्वाधिक झटका लगा है। यही स्थिति निर्यात की भी रही। यूपीए सरकार की तुलना में निर्यात वृद्धि दर में 15 गुना गिरावट आई है। यूपीए के कार्यकाल के दौरान यह दर 393 प्रतिशत थी, जो कि मोदी सरकार के दौरान घटकर 26 प्रतिशत रह गई है।

देश में कृषि संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में किसान प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। अकेले महाराष्ट्र में वर्ष 2019 के दौरान अब तक 808 किसानों ने आत्महत्या की है। कमजोर मानसून के कारण कृषि संकट और गहराएगा। अलनीनो प्रभाव से राहत के कोई संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे ये स्पष्ट होता है कि किसान को पहले की तुलना में अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी तथा आने वाले पांच वर्षों में कृषि आय को दोगुना करना मात्र स्वप्न बनकर रह जाएगा।

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