अर्थजगतः ईरान-इजरायल जंग का असर, सेंसेक्स 1,123 अंक टूटा, डॉलर के मुकाबले रुपया 92.16 के स्तर पर पहुंचा
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच संघर्ष के चलते निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि बुधवार को सोने की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली, तो चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।

ईरान-इजरायल जंग से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,123 अंक टूटा
पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण एशियाई बाजारों में बुधवार को भारी गिरावट हुई, जिससे प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 1.55 प्रतिशत तक टूट गए। लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,122.66 अंक या 1.40 प्रतिशत गिरकर 79,116.19 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में यह एक समय 1,795.65 अंक या 2.23 प्रतिशत तक लुढ़ककर 78,443.20 के निचले स्तर पर आ गया था।
हालांकि, सत्र के दूसरे भाग में कुछ नुकसान की भरपाई हुई। इसी तरह, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 385.20 अंक या 1.55 प्रतिशत गिरकर 24,480.50 पर बंद हुआ। यह पिछले छह महीनों का सबसे निचला बंद स्तर है। दिन के दौरान निफ्टी 560.3 अंक या 2.25 प्रतिशत गिरकर 24,305.40 पर आ गया था।
सेंसेक्स के शेयरों में टाटा स्टील सबसे अधिक 6.76 प्रतिशत टूटा। इसके बाद लार्सन एंड टुब्रो (4.53 प्रतिशत) का स्थान रहा। बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व और कोटक महिंद्रा बैंक में भी उल्लेखनीय गिरावट हुई। दूसरी ओर भारती एयरटेल, इंफोसिस और टेक महिंद्रा लाभ में रहे।
बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 2.42 प्रतिशत और मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 2.10 प्रतिशत लुढ़क गया। क्षेत्रवार बात करें तो धातु में चार प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा बीएसई पीएसयू बैंक में 3.50 प्रतिशत, औद्योगिक वस्तुओं में 3.29 प्रतिशत, रियल्टी में 3.16 प्रतिशत, जिंस में 3.12 प्रतिशत, पूंजीगत वस्तुओं में 2.64 प्रतिशत, बिजली में 2.59 प्रतिशत, सेवा में 2.25 प्रतिशत और ऊर्जा में 2.23 प्रतिशत की गिरावट हुई।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.08 प्रतिशत उछलकर 83.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक 12 प्रतिशत तक टूट गया। जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी भारी गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, यूरोपीय बाजार सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे।सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 8,593.87 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। होली के उपलक्ष्य में मंगलवार को बाजार बंद थे।
डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे टूटा, 92.16 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को रुपया 67 पैसे की गिरावट के साथ 92.16 (अस्थायी) प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ी है। इसके चलते डॉलर सूचकांक 98 के स्तर को पार कर गया, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी रुपये की गिरावट में भूमिका निभाई।
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.05 पर खुला और कारोबार के दौरान 92.35 के अब तक के सबसे निचले स्तर तक चला गया। अंत में यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 67 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.16 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। इससे पूर्व सोमवार को रुपया 41 पैसे टूटकर 91.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार को 'होली' के उपलक्ष्य में विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहा था।
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते सोना 1 प्रतिशत उछला, चांदी में 2.5 प्रतिशत की तेजी
पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के चलते शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि बुधवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली, तो वहीं चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 1.44 प्रतिशत यानी 2,324 रुपए बढ़कर 1,63,432 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, मई डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 2.65 प्रतिशत यानी 7,021 रुपए चढ़कर 2,72,339 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।
हालांकि इससे पहले वाले सत्र में सोने और चांदी में भारी गिरावट आई थी। अप्रैल गोल्ड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत गिरकर 1,61,108 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि मई सिल्वर फ्यूचर्स लगभग 5 प्रतिशत टूटकर 2,65,318 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। इसकी वजह डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड यील्ड में उछाल रही। डॉलर इंडेक्स बढ़कर कई महीनों के उच्च स्तर 99.33 पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड यील्ड 4 प्रतिशत के पार चला गया। निवेशकों को चिंता है कि ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी है। इजरायल ने मंगलवार को तेहरान और बेरूत में नए हमले करने का दावा किया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है, लेकिन जरूरत पड़ी तो वह इससे ज्यादा समय तक भी जारी रह सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमती धातुओं का लंबी अवधि का रुझान मजबूत बना हुआ है, लेकिन फिलहाल बाजार में स्थिरता का इंतजार करना बेहतर होगा। एक विशेषज्ञ ने बताया कि आज के सत्र में सोना और चांदी में नई पोजिशन लेने से बचना चाहिए और बाजार में कुछ स्थिरता आने का इंतजार करना चाहिए। एक्सपर्ट के अनुसार, एमसीएक्स पर सोने को 1,59,100-1,57,700 रुपए पर सपोर्ट और 1,63,500-1,65,800 रुपए पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए 2,57,700-2,51,500 रुपए सपोर्ट और 2,71,000-2,78,800 रुपए रेजिस्टेंस स्तर बताया गया है।
कतर ने एलएनजी उत्पादन रोका, भारत को आपूर्ति प्रभावित
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कतर ने अपने ऊर्जा संयंत्रों पर हुए हमलों के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का उत्पादन रोक दिया है। इससे भारत को होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई है और प्रमुख घरेलू क्षेत्रों के लिए ईंधन की उपलब्धता का संकट खड़ा हो गया है।
भारत अपनी गैस आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए कतर के साथ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर निर्भर है। कतर से खेप का आवागमन अस्थायी रूप से रुकने के कारण औद्योगिक उपभोक्ताओं और शहरी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत तक की कटौती देखी गई है।
जहां कुछ औद्योगिक इकाइयां वैकल्पिक ईंधन का उपयोग कर सकती हैं, वहीं सीएनजी बेचने वाले शहरी गैस क्षेत्र ने गंभीर संकट की चेतावनी दी है। सीजीडी कंपनियों का कहना है कि कतर की सस्ती गैस के स्थान पर दोगुनी कीमत वाली 'स्पॉट एलएनजी' खरीदने से सीएनजी का मूल्य लाभ समाप्त हो जाएगा, जिससे ग्राहक स्थायी रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं।
भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक 'पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड' कतर में अपने जहाज नहीं भेज पा रही है। इसका मुख्य कारण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' का लगभग बंद होना है। कतर सहित अधिकांश पश्चिम एशियाई देश इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से अपने तेल और गैस का निर्यात करते हैं। इसके अलावा ईरान के ड्रोन हमले में दुनिया के सबसे बड़े निर्यात केंद्र (कतर स्थित) को निशाना बनाए जाने के बाद वहां उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया गया है।"
एआई से बने युद्ध वीडियो पर एक्स का सख्त कदम
अमेरिका-इजरायल और ईरान में जारी युद्ध के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने घोषणा की है कि अगर कोई क्रिएटर बिना साफ तौर पर जानकारी दिए एआई से बने युद्ध या सशस्त्र संघर्ष के वीडियो पोस्ट करता है, तो उसे रेवेन्यू-शेयरिंग प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक संकटों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान एआई से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरों की बाढ़ आ गई है। इन बेहद वास्तविक दिखने वाले विजुअल्स से लोगों को गुमराह होने का खतरा बढ़ जाता है और जमीन पर हो रही असली घटनाओं की समझ प्रभावित हो सकती है।
एक्स के प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने कहा कि जो क्रिएटर्स एआई से बने युद्ध संबंधी वीडियो पोस्ट करेंगे और यह स्पष्ट नहीं करेंगे कि यह कंटेंट एआई से तैयार किया गया है, उन्हें 90 दिनों के लिए प्लेटफॉर्म के क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम से हटा दिया जाएगा। उन्होंने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट में लिखा, "युद्ध के समय लोगों तक सही और प्रामाणिक जानकारी पहुंचना बेहद जरूरी है। आज की एआई तकनीक से ऐसा कंटेंट बनाना बहुत आसान हो गया है जो लोगों को भ्रमित कर सकता है।"
अगर 90 दिन की सस्पेंशन अवधि के बाद भी कोई क्रिएटर ऐसे भ्रामक एआई वीडियो पोस्ट करता है, तो उसे हमेशा के लिए मोनेटाइजेशन प्रोग्राम से बाहर कर दिया जाएगा। नया नियम खास तौर पर उन वीडियो पर लागू होगा जो सशस्त्र संघर्ष को दिखाते हैं और जिनमें यह खुलासा नहीं किया गया हो कि वे एआई से तैयार किए गए हैं। एक्स ने कहा कि वह भ्रामक एआई कंटेंट की पहचान के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम और कम्युनिटी आधारित सिस्टम, दोनों का इस्तेमाल करेगा। प्लेटफॉर्म ऐसे टूल्स का उपयोग करेगा जो जेनरेटिव एआई से बने मीडिया को पहचान सकते हैं। इसके साथ ही 'कम्युनिटी नोट्स' फीचर का भी सहारा लिया जाएगा, जिसमें यूजर्स किसी पोस्ट पर अतिरिक्त संदर्भ या फैक्ट-चेक जोड़ सकते हैं अगर उन्हें वह पोस्ट भ्रामक लगती है। कम्युनिटी नोट्स, कंटेंट मॉडरेशन के मामले में एक्स की रणनीति का अहम हिस्सा है, खासकर तब से जब प्लेटफॉर्म ने ज्यादा विकेंद्रीकृत समीक्षा प्रणाली अपनाई है।
एक्स का क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम योग्य यूजर्स को उनके पोस्ट पर मिलने वाली एंगेजमेंट के आधार पर विज्ञापन से होने वाली कमाई का हिस्सा देता है। इस योजना को प्लेटफॉर्म पर ज्यादा कंटेंट और एक्टिविटी बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। हालांकि, कई शोधकर्ताओं और यूजर्स ने इस मॉडल की आलोचना की है। उनका कहना है कि एंगेजमेंट के आधार पर भुगतान करने से कुछ क्रिएटर्स सनसनीखेज या विवादित कंटेंट पोस्ट करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं ताकि ज्यादा व्यूज और कमेंट मिल सकें। कुछ आलोचकों का यह भी मानना है कि पेड सब्सक्रिप्शन जैसी पात्रता शर्तें और अपेक्षाकृत ढीला कंटेंट नियंत्रण, वायरल लेकिन भ्रामक पोस्ट को बढ़ावा दे सकता है। फिलहाल नया नियम केवल एआई से बने युद्ध संबंधी कंटेंट पर लागू होगा। यह उन अन्य क्षेत्रों को सीधे तौर पर कवर नहीं करता, जहां एआई से बने फोटो और वीडियो का इस्तेमाल राजनीतिक गलत सूचना फैलाने या भ्रामक उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है।
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