अर्थतंत्र की खबरें: सोना-चांदी के दाम औंधे मुंह गिरे! और भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद
सर्राफा बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 800 रुपये घटकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 800 रुपये घटकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना मंगलवार को 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, भारी बिकवाली के कारण चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई। यह 5,730 रुपये घटकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई, जबकि पिछली सत्र में यह 2,40,730 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक (जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बिना किसी नई बातचीत के अमेरिका-ईरान युद्धविराम की समय-सीमा खत्म होने के बाद बनी अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में कमजोरी रही। इससे निवेशकों का रुख सतर्क रहा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से महंगाई और व्यापक आर्थिक हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बातचीत न होने से कारोबारी सतर्क बने हुए हैं।
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख, गौरव गर्ग ने कहा कि सर्राफा पर दबाव बना हुआ है क्योंकि निवेशक भविष्य में ब्याज दरों की दिशा के बारे में नई जानकारी के लिए फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण का इंतजार कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 4,361.76 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 63.33 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 325 अंक लुढ़का
भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 325.78 अंक या 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 और निफ्टी 76.60 अंक या 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,078.30 पर था।
बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिली। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.49 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। निफ्टी मीडिया , निफ्टी पीएसई, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी ऑटो, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी कंजप्शन भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी तरफ निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स हरे निशान में बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 130.65 अंक या 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,408.75 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 101.70 अंक या 0.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,707.15 पर था।
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इन्फोसिस और ट्रेंट गेनर्स थे। पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, एचयूएल, बीईएल, इंडिगो, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे।
रुपया दो पैसे टूटकर 95.76 प्रति डॉलर पर
रुपया बुधवार को दो पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.76 (अस्थायी) पर रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मुद्रा पर दबाव है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में तेज गिरावट से रुपये पर और दबाव पड़ा, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप तथा विदेशी पूंजी के प्रवाह से उसे कुछ समर्थन मिला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 95.72 से 95.76 के सीमित दायरे में रहा। अंत में यह 95.76 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से दो पैसे की गिरावट है।
रुपया मंगलवार को 13 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.74 पर बंद हुआ था।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा, ‘‘ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड पर मजबूत प्रतिफल के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया मामूली कमजोर हुआ है। जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, रुपया मामूली कमजोर बना रहेगा।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि रुपये में तेज गिरावट की गुंजाइश नहीं है क्योंकि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) योजना के तहत पूंजी प्रवाह उम्मीद से काफी बेहतर रहा है।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.85 पर रहा।
भारत का मखाना बाजार 2029-30 तक 12,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना, बढ़ती मांग से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
भारत का मखाना (फॉक्स नट) क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, बढ़ते उत्पादन, मजबूत घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि के बल पर देश का मखाना बाजार वर्ष 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपए के आकार तक पहुंच सकता है।
फैक्टशीट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में केवल 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इस अवधि में इसकी औसत कीमत लगभग 500 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
मखाना आज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कम वसा, उच्च पोषण और पौध-आधारित खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ते रुझान ने इसकी मांग को मजबूत किया है। इसी कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाजारों में इसकी खपत बढ़ रही है।
वर्ष 2024-25 में देश का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा, जबकि औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुंचने की संभावना है और उत्पादकता बढ़कर 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो सकती है।
देश में मखाना उत्पादन के मामले में बिहार सबसे आगे है। वर्ष 2025-26 में राज्य का उत्पादन लगभग 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। बिहार में औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है और यह राज्य राष्ट्रीय उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।
पारंपरिक रूप से मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। फील्ड सिस्टम खेती, स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है। सरकार के अनुसार, खेती के दायरे में विस्तार, उत्पादकता में वृद्धि और खेती से जुड़े जोखिमों में कमी के कारण इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।
भारत हर वर्ष 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत, यानी करीब 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन, का निर्यात किया जाता है, जबकि शेष उत्पादन घरेलू बाजार में खपत होता है।
वैश्विक स्तर पर क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत का मजबूत उत्पादन आधार मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम स्नैक के रूप में स्थापित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात के नए अवसर इस क्षेत्र की विकास दर को और तेज कर सकते हैं।
फैक्टशीट के अनुसार, घरेलू मखाना बाजार ने वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। मजबूत घरेलू मांग ने इस क्षेत्र को वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रखा है।
ट्रंप ने कनाडा पर 50 फीसदी टैरिफ का फैसला टाला, कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन को फिर शुरू करने के संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर प्रस्तावित 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले को तीन दिन के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
ट्रंप ने मंगलवार देर रात सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने प्रस्तावित शुल्क को तीन दिन के लिए रोक दिया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच एक समझौता हो गया है और अब दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन अभी कुछ मुद्दों पर काम किया जाना बाकी है।
अमेरिका का प्रस्तावित 50 फीसदी टैरिफ कनाडा के कई उत्पादों को प्रभावित करता, जिनमें शराब, हॉकी उपकरण, लकड़ी और अन्य सामान शामिल हैं। ये शुल्क बुधवार से लागू होने वाले थे। दोनों देशों के बीच जारी व्यापार विवाद के बीच इस फैसले से तत्काल टकराव टल गया है।
ट्रंप ने इसी घोषणा में विवादित 'कीस्टोन एक्सएल तेल पाइपलाइन परियोजना' को फिर से शुरू करने के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना 'कब्र से बाहर आ सकती है,' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने का व्यापार समझौते से क्या संबंध होगा।
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