अर्थतंत्र की खबरें: कच्चे तेल में उछाल से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 388 अंक फिसला

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल ने बाजार का ध्यान फिर से महंगाई के जोखिमों की ओर खींच लिया, जिससे अच्छे नतीजों के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम हो गया। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट और अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर चिंताओं ने बाजार के मूड को सतर्क बनाए रखा।

फोटोः सोशल मीडिया
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भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक या 0.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,154.25 और निफ्टी 112.10 अंक या 0.46 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,471.70 पर था।

बाजार में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक एफएमसीजी और रियल्टी स्टॉक्स में देखने को मिला। सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। निफ्टी मेटल 0.95 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.86 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.84 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.63 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.56 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.55 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।

दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 0.61 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.08 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक या 0.02 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,843.85 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,857.15 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में इटरनल, इन्फोसिस, टाइटन, एचसीएल टेक और टीसीएस गेनर्स थे। अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, इंडिगो, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, आईटीसी, एमएंडएम, टाटा स्टील, एचयूएल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, एसबीआई, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल लूजर्स थे।

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल ने बाजार का ध्यान फिर से महंगाई के जोखिमों की ओर खींच लिया, जिससे अच्छे नतीजों के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम हो गया। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट और अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर चिंताओं ने बाजार के मूड को सतर्क बनाए रखा, खासकर भारत और अमेरिका में महंगाई के अहम आंकड़ों के आने से पहले। इसके चलते, ऊर्जा की अधिक लागत से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर पर दबाव पड़ा, जबकि फार्मा और कुछ आईटी कंपनियों के शेयरों में बढ़त देखी गई। फिर भी, विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की अच्छी कमाई से गिरावट का जोखिम सीमित बना हुआ है।

सेबी ने रिटेल निवेशकों का एफएंडओ में नुकसान कम करने के लिए उठाए कदम, वित्त वर्ष 26 में 18 प्रतिशत की आई कमी : केंद्र

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के नुकसान को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं और इससे वित्त वर्ष 26 में उनका नुकसान 18 प्रतिशत कम होकर 91,685 करोड़ रुपए हो गया है। यह जानकारी मंगलवार को सरकार की ओर से संसद में दी गई।

राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि नवंबर 2024 से लागू किए गए रेगुलेटरी बदलावों के बाद, सेबी ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में हिस्सा लेने वाले यूनिक निवेशकों की संख्या में गिरावट और ट्रेडिंग में कमी देखी है।

उनके अनुसार, वित्त वर्ष 25 में निवेशकों को एफएंडओ में कुल 1,11,788 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 25 के 98.1 लाख से लगभग 20 प्रतिशत घटकर वित्त वर्ष 26 में 78.6 लाख हो गई।

उन्होंने कहा, "रेगुलेटरी उपायों के बाद, सेबी ने देखा है कि पिछले साल की तुलना में 2025-26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यूनिक निवेशकों की संख्या 98.10 लाख से घटकर 78.60 लाख हो गई है और लोगों का कुल नुकसान 1,11,788 करोड़ रुपए से घटकर 91,685 करोड़ रुपए हो गया है।"

कुल नुकसान में कमी के बावजूद, प्रति इन्वेस्टर औसत नुकसान एक साल पहले के 1,13,913 रुपए से बढ़कर 1,16,654 रुपए हो गया।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल टर्नओवर भी कम हुआ और वित्त वर्ष 25 के 213 लाख करोड़ रुपए से घटकर वित्त वर्ष 26 में 202 लाख करोड़ रुपए हो गया।

सेबी के उपायों में साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स को सही करना, इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट साइज, ऑप्शंस की एक्सपायरी के दिनों में ज्यादा टेल-रिस्क कवरेज, खरीदारों से ऑप्शन प्रीमियम की पहले से वसूली, एक्सपायरी के दिनों में कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना और पोजीशन लिमिट की इंट्राडे मॉनिटरिंग शामिल थी।


रुपया 13 पैसे टूटकर 95.43 प्रति डॉलर पर

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 95.43 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि हाल के दिनों में विदेशी पूंजी के प्रवाह से घरेलू मुद्रा को कुछ बल मिला।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.38 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.37 से 95.45 प्रति डॉलर के दायरे में रहा और अंत में 13 पैसे की गिरावट के साथ 95.43 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

रुपया सोमवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 95.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से रुपये पर दबाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता ने भी रुपये को प्रभावित किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि रुपये में हल्की नकारात्मक धारणा के साथ कारोबार होगा। हालांकि, निचले स्तर पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का हस्तक्षेप रुपये को बल दे सकता है। इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले कारोबारी सतर्क रह सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की हाजिर विनिमय दर 95.15 से 95.80 रुपये के दायरे में रह सकती है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत बढ़कर 99.86 पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 2.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 89.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

घरेलू शेयर बाजार में बीएसई का सेंसेक्स 388.19 अंक की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर और एनएसई का निफ्टी 112.10 अंक फिसलकर 24,471.70 अंक पर बंद हुआ।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को शुद्ध आधार पर 1,974.76 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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