अर्थतंत्र की खबरें: UPI पर MDR से व्यापारियों की बढ़ी धुकधुकी! और निवेशकों के सतर्क रुख से शेयर बाजार भी सुस्त
व्यापारियों का यह भी कहना है कि यूपीआई से भुगतान की आदत पड़ जाने के कारण अब बहुत कम लोग नकदी लेकर निकलते हैं। ऐसे में यह बदलाव दुकानदारों तथा ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

बड़े मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाए जाने के बीच खुदरा एवं थोक व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इससे कम मुनाफे पर काम करने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि यूपीआई से भुगतान की आदत पड़ जाने के कारण अब बहुत कम लोग नकदी लेकर निकलते हैं। ऐसे में यह बदलाव दुकानदारों तथा ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी के थोक बाजार ‘सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगने से छोटे व्यापारियों पर महीने में 3,000 से 5,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार की डिजिटल पहल को पीछे धकेलने वाला कदम है। एक तरफ सरकार कहती है कि आपको जेब में नकदी रखने की जरूरत नहीं है, वहीं ऐसा कदम उठाया गया है कि दुकानदार और ग्राहक सभी नकदी की ओर रुख करेंगे।’’
हालांकि, खुदरा व्यापारियों के संगठन ‘कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘‘इस शुल्क का छोटे दुकानदारों पर असर नहीं पड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने रुपे डेबिट कार्ड से भुगतान पर शुल्क नहीं लगने की बात कही है और बड़े व्यापारी यह तरीका अपना सकते हैं।’’
निवेशकों के सतर्क रुख से शेयर बाजार लगभग स्थिर बंद, सेंसेक्स में 22 अंक की मामूली गिरावट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने और मौद्रिक नीति में आगे भी सख्ती के संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों के सतर्कता बरतने से बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजार लगभग स्थिर बंद हुए।
बीएसई का 30 शेयर पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत फिसलकर 74,314.59 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 341.11 अंक यानी 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,677.56 पर पहुंच गया था। लेकिन बाद में अपनी बढ़त गंवा बैठा।
हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयर वाला मानक सूचकांक निफ्टी 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,270.60 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से एचडीएफसी बैंक, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल और एक्सिस बैंक के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही।
दूसरी तरफ, टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), इटर्नल, मारुति और एशियन पेंट्स के शेयर बढ़त में रहे।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद मिले-जुले रुख के साथ बंद हुआ। चुनिंदा शेयरों में लिवाली से निफ्टी को समर्थन मिला, लेकिन निजी क्षेत्र के बैंकों और आईटी कंपनियों के शेयर में कमजोर रुख ने व्यापक सुधार को सीमित कर दिया।’’
छोटी कंपनियों से संबंधित बीएसई स्मॉलकैप सिलेक्ट सूचकांक 0.95 प्रतिशत और मझोली कंपनियों मिडकैप सिलेक्ट सूचकांक 0.72 प्रतिशत चढ़ा।
बीएसई के क्षेत्रवार सूचकांकों में बीमा क्षेत्र में सबसे अधिक 3.23 प्रतिशत की तेजी रही। दूसरी ओर शीर्ष 10 बैंक का सूचकांक 0.72 प्रतिशत टूटा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने तथा इस साल एक और बढ़ोतरी के संकेत दिए जाने के बाद बाजार की धारणा सतर्क बनी रही।
टाटा मोटर्स का बड़ा एलान, 1 अक्टूबर से कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की करेगी बढ़ोतरी
टाटा मोटर्स ने गुरुवार को कहा कि वह 1 अक्टूबर 2026 से अपने पूरे कमर्शियल वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करेगी।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि कीमतों में यह संशोधन मॉडल और वेरिएंट के अनुसार अलग-अलग होगा। बढ़ती कमोडिटी कीमतों और अन्य इनपुट लागतों के प्रभाव को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
इस वर्ष कमर्शियल वाहन श्रेणी में टाटा मोटर्स द्वारा की जा रही यह दूसरी मूल्य वृद्धि है। इससे पहले कंपनी ने 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। उस समय भी कंपनी ने बढ़ती कमोडिटी और इनपुट लागतों को इसका कारण बताया था।
ताजा फैसला टाटा मोटर्स के विभिन्न कारोबारों में कीमतों में हो रही बढ़ोतरी की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने भी 1 जुलाई से अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। इसमें आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले मॉडल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों शामिल थे। यह पैसेंजर वाहन कारोबार में वर्ष 2026 की दूसरी मूल्य वृद्धि थी। इससे पहले 1 अप्रैल से कंपनी ने अपने आईसीई पोर्टफोलियो की कीमतों में 0.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी।
अप्रैल में किए गए संशोधन के तहत कुछ वेरिएंट्स की कीमतों में 1.09 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई थी, जबकि टाटा अल्ट्रोज के कुछ वेरिएंट्स की कीमतों में मामूली कमी की गई थी।
पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग में वाहन निर्माता बढ़ती कमोडिटी कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च, सप्लाई चेन लागत और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में बदलाव कर रहे हैं।
मारुति सुजुकी ने जून 2026 से अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की थी, जबकि ह्युंडई मोटर इंडिया ने 1 जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी की थी।
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