अर्थतंत्र की खबरें: नया सीएएस सिस्टम बना चुनौती, BSE और NSE पर क्लोजिंग प्राइस में भारी अंतर, निवेशक परेशान

यही स्थिति करीब मुख्य एक्सचेंज पर देखी गई। दिन की शुरुआत में एनएसई का मुख्य सूचकांक निफ्टी और बीएसई का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स अलग-अलग दिशा में खुले।

फोटो: सोशल मीडिया
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भारतीय शेयर बाजार के लिए बाजार नियामक सेबी द्वारा लागू किया गया नया प्राइस डिस्कवरी सिस्टम सीएएस (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) चुनौती बन गया है। इससे दोनों एक्सचेंजों पर एक ही स्टॉक के एक ही समय पर अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस दर्ज किए जा रहे हैं, जिसने निवेशकों को दुविधा में डाल दिया है।

मंगलवार के कारोबारी सत्र की क्लोजिंग के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर ट्रेंट का शेयर 1.15 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,070 रुपए पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर यह 1.89 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,107.70 रुपए पर बंद हुआ।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) की क्लोजिंग प्राइस भी बेहद चौकाने वाली थी। बीएसई पर यह 0.94 प्रतिशत की तेजी के साथ 392 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर यह 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 391.5 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुआ।

बजाज फाइनेंस का शेयर बीएसई पर 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,153 रुपए पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर बजाज फाइनेंस का शेयर 0.35 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,149 रुपए पर बंद हुआ।

एमएंडएम का शेयर बीएसई पर 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,405 रुपए पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर यह 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,433 रुपए पर बंद हुआ।

इसके साथ ही अन्य कई शेयरों में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई, जिनमें बजाज फिनसर्व, टाइटन, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट और अन्य शामिल थे।

यही स्थिति करीब मुख्य एक्सचेंज पर देखी गई। दिन की शुरुआत में एनएसई का मुख्य सूचकांक निफ्टी और बीएसई का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स अलग-अलग दिशा में खुले।

सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 149 अंक या 0.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,788 और निफ्टी 160 अंक या 0.65 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,618 पर था।

कारोबार के अंत तक यह सिलसिला जारी रहा। बीएसई सेंसेक्स 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,428.95 और एनएसई निफ्टी 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ। दोनों एक्सचेंज की क्लोजिंग प्राइस में 0.37 प्रतिशत का अंतर था।

लगातार तेजी के बाद फिर गिरा बाजार, सेंसेक्स 210 अंक लुढ़का, निफ्टी 0.6 प्रतिशत फिसला

वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस तरह लगातार चार सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिल थम गया। इस दौरान, रियल एस्टेट, एफएमसीजी और आईटी शेयरों में कमजोरी के कारण प्रमुख बेंचमार्क नीचे गिर गए, जबकि मेटल शेयरों ने व्यापक रुझान के विपरीत रुख अपनाया। फॉर एंड ओनर्स एक्सपायरी को लेकर बाजार में अस्थिरता बनी रही। वहीं, बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले से पहले निवेशक सतर्क नजर आए।

एनएसई निफ्टी50 159 अंक यानी 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 210.08 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ।

इस बीच, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिलाजुला रहा, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने इस प्रवृत्ति को उलटते हुए 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मीडिया (2.03 प्रतिशत की तेजी) और निफ्टी मेटल (0.91 प्रतिशत की तेजी) को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 2.39 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.15 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.88 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.66 प्रतिशत,निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी 50 इंडेक्स में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी लाइफ, बजाज-ऑटो, मैक्स हेल्थकेयर, रिलायंस और एनटीपीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि इसके विपरीत अपोलो हॉस्पिटल्स, हिंडाल्को, ट्रेंट, आईटीसी, इटरनल और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि मंगलवार को साप्ताहिक एक्सपायरी के साथ ही वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) के क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए लागू की गई नई व्यवस्था का असर बाजार में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। नई प्रणाली के कारण बाजार की चाल में कुछ असामान्य उतार-चढ़ाव दिखाई दिए, जिससे संकेत मिलता है कि नई व्यवस्था फिलहाल अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर पा रही है, जिसके चलते कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई है।

एक्सपर्ट के अनुसार, इस बढ़ी हुई अस्थिरता का सबसे ज्यादा असर उन निवेशकों पर पड़ा, जिन्होंने डेरिवेटिव्स बाजार में पोजिशन ले रखी थी। विशेष रूप से खुदरा निवेशकों (रिटेल इन्वेस्टर्स) को 15 मिनट की ब्लाइंड डेरिवेटिव्स क्लोजिंग विंडो से पहले अपनी पोजिशन मजबूरी में काटनी या बंद करनी पड़ी, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया।

हालांकि, इसे नई प्रणाली से जुड़ी शुरुआती तकनीकी और परिचालन चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है। एक्सचेंजों और बाजार नियामक को इन विसंगतियों को दूर करने की जरूरत है। फिलहाल इसका प्रभाव मुख्य रूप से एफएंडओ से जुड़े शेयरों और प्रमुख सूचकांकों तक सीमित है। अच्छी बात यह है कि यह कोई बड़ी संरचनात्मक या बुनियादी समस्या नहीं है और समय के साथ इसे नियंत्रित किए जाने की संभावना है।


आरबीआई अगस्त एमपीसी में ब्याज दरों को रख सकता है स्थिर : एक्सपर्ट्स

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) बुधवार को आने वाले निर्णय में ब्याज दरों को यथावत रख सकती है। इसकी वजह महंगाई का निर्धारित लक्ष्य के नीचे होना और आर्थिक विकास पर फोकस होना है। यह जानकारी मंगलवार को एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।

मौजूदा समय में देश में खुदरा महंगाई की दर आरबीआई द्वारा तय सीमा 2-6 प्रतिशत के बीच है और केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कीमतों में स्थिरता के साथ विकास सुनिश्चित करने के लिए इस रेंज के बीच के 4 प्रतिशत के स्तर को अपना लक्ष्य मानता है।

जून में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.38 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसकी मुख्य वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कुछ आयातित चीजों का महंगा होना था। सरकारी तेल कंपनियों ने ग्राहकों को बचाने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का ज्यादातर बोझ खुद उठाया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने संकेत दिया है कि मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू कमेटी ब्याज दरों में बढ़ोतरी तभी करेगी जब महंगाई का दबाव व्यापक हो जाए, न कि सिर्फ आपूर्ति में अस्थायी रुकावटों की वजह से हो।

जून में आरबीआई के आर्थिक अनुमान के मुताबिक, 31 मार्च, 2027 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये अनुमान इस धारणा पर आधारित थे कि कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल रहेगी। कच्चे तेल की कीमतें इस स्तर से नीचे रही हैं, इसलिए इन अनुमानों के सही साबित होने की उम्मीद है।

खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने जुलाई में रूस से रियायती कीमतों पर 50 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात किया है, जिससे कीमतों को काबू में रखने में मदद मिली है। इसी तरह, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अपने एलपीजी आयात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अमेरिका से मंगाना शुरू कर दिया है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​था कि आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ाकर गिरते रुपए को सहारा देना चाहिए ताकि वैश्विक निवेशकों से अधिक विदेशी मुद्रा आकर्षित की जा सके।

हालांकि, आरबीआई के कुछ कदमों—जैसे भारतीय सरकारी बॉन्ड रखने वाले विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल-गेन्स टैक्स खत्म करना और अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए डॉलर जमा योजनाओं को अधिक आकर्षक बनाना—से रुपए को स्थिर करने के लिए लगभग 40 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने में सफलता मिली है।

रुपया तीन पैसे टूटकर 95.40 प्रति डॉलर पर

कच्चे तेल की की ऊंची कीमतों और घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी के बीच रुपया मंगलवार को तीन पैसे की गिरावट के साथ 95.40 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा, लेकिन हाल ही में विदेशी कोषों के प्रवाह ने रुपये को कुछ हद तक समर्थन दिया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.35 प्रति डॉलर पर खुला। यह 95.25 से 95.42 के दायरे में कारोबार करता रहा। अंत में यह 95.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की गिरावट है।

रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.37 पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से वैश्विक जोखिम संबंधी धारणाओं में सुधार के चलते रुपये में मामूली सकारात्मक रुझान की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल रुपये पर उच्च स्तर का दबाव डाल सकते हैं।’’

चौधरी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 94.95 से 95.60 के दायरे में रह सकता है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 100.02 प्रतिशत चढ़कर 0.13 पर रहा।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 2.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.05 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 210.08 अंक गिरकर 78,428.95 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 159.40 अंक टूटकर 24,614.90 अंक पर रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को शुद्ध रूप से 922.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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